महाराष्ट्र की राजनीति में दशहरा रैली के मंच से एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुंबई के शिवाजी पार्क में आयोजित अपनी पार्टी की वार्षिक दशहरा रैली में कानून-व्यवस्था, किसानों की परेशानी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चुनौती दी कि अगर सरकार में दम है, तो लॉरेंस बिश्नोई को साबरमती जेल से महाराष्ट्र लाकर दिखाए। उद्धव के बयानों के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी पलटवार किया। इस राजनीतिक टकराव ने महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था से लेकर सत्ता परिवर्तन तक के मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है।
बिश्नोई गैंग और टाइगर श्रॉफ पर हमले को लेकर फडणवीस पर निशाना
शिवाजी पार्क की रैली में उद्धव ठाकरे ने अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हमले में अभिनेता का बच जाना राहत की बात है और आरोपियों को गिरफ्तार करना पुलिस की कार्रवाई का हिस्सा है। लेकिन, उनके मुताबिक, असली सवाल यह है कि हमलावरों के पास हथियार पहुंचे कैसे।
उद्धव ने लॉरेंस बिश्नोई का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वह साबरमती जेल में बंद होने के बावजूद उसके गिरोह के सदस्य सक्रिय होने के दावे कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गिरोह से जुड़े लोगों की ओर से 70 हजार शूटर होने की बात कही जा रही है। इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि खबर में उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे उद्धव के बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें हिम्मत है, तो बिश्नोई को साबरमती जेल से खींचकर महाराष्ट्र ले आएं।
इस बयान के जरिए उद्धव ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। आम लोगों के लिए इस बहस का सीधा संबंध सुरक्षा से है। किसी भी हमले के बाद यह जानना महत्वपूर्ण होता है कि आरोपियों तक हथियार कैसे पहुंचे और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस तथा प्रशासन क्या कदम उठा रहे हैं।
SIR और चुनाव आयोग पर भी बरसे उद्धव, मतदाताओं को लेकर उठाए सवाल
उद्धव ठाकरे ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि 13 करोड़ मतदाताओं को सूची से बाहर किया गया और सवाल उठाया कि क्या वे सभी बांग्लादेशी थे।
उन्होंने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर विरोध की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए सवाल किया कि जब दूसरे मामलों में इस्तीफे मांगे जा सकते हैं, तो इस मामले में ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा।
उद्धव ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि परिवार अपने बच्चों के साथ आंदोलन में शामिल हुए और पुलिस ने उनके साथ कठोर व्यवहार किया।
हालांकि, मतदाताओं को सूची से हटाने के उनके दावे और इसके पीछे बताए गए कारणों की पुष्टि के लिए आधिकारिक आंकड़ों की जरूरत होगी। मतदाता सूची में नाम होना मतदान के अधिकार के इस्तेमाल के लिए अहम है। इसलिए ऐसे मामलों में सही आंकड़ों, आपत्तियों की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण को समझना जरूरी है।
किसानों की परेशानी और ‘रिजीम चेंज’ की बात, भगवा पहचान पर भी जोर
दशहरा रैली में उद्धव ठाकरे ने सत्ता परिवर्तन की बात करते हुए कहा कि महाराष्ट्र से बदलाव की शुरुआत हो सकती है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भगवा झंडे और शिवसेना की पहचान का जिक्र किया। उनका कहना था कि पार्टी की पहचान को कोई छीन नहीं सकता।
उन्होंने शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि क्रांति के लिए जीवंत और मजबूत इच्छाशक्ति जरूरी है। दशहरे के संदेश को जोड़ते हुए उन्होंने बुराई के खिलाफ खड़े होने की बात कही।
उद्धव ने राज्य में सूखे और किसानों की स्थिति को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि किसानों की हालत गंभीर है और यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें कितनी मदद मिली है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि कितने किसानों को सहायता दी गई।
किसानों की मदद और सूखे से जुड़ा मुद्दा ग्रामीण महाराष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण है। खेती पर निर्भर परिवारों की आमदनी, फसल की स्थिति और सरकारी सहायता का समय पर मिलना सीधे उनकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है। हालांकि, रैली में लगाए गए आरोपों के जवाब में सरकार की ओर से दिए गए आंकड़े इस खबर में उपलब्ध नहीं हैं।
संजय राउत का बड़ा दावा, राम मंदिर और मोदी सरकार पर भी हमला
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भी रैली के दौरान केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने राम मंदिर से जुड़े खर्च को लेकर 1,400 करोड़ रुपये की कथित लूट का दावा किया। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी दावा किया और कहा कि वह अप्रैल के अंत तक सरकार में नहीं रहेंगे। यह उनका राजनीतिक दावा है, कोई पुष्ट घटनाक्रम नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि जनता अब मोदी और अमित शाह से नहीं डरती।
धनुष-बाण के चुनाव चिह्न को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई का जिक्र करते हुए राउत ने उम्मीद जताई कि अगले दशहरे तक यह चुनाव चिह्न उनकी पार्टी के पास होगा। इस मुद्दे पर अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी प्रक्रिया और फैसले पर निर्भर करेगी।
एकनाथ शिंदे का पलटवार, बोले- सत्ता जनता बदलती है
उद्धव ठाकरे के ‘रिजीम चेंज’ वाले बयान पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सत्ता बदलने का फैसला जनता करती है और वही तय करती है कि किसे शासन की जिम्मेदारी मिलेगी।
शिंदे ने उद्धव पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता उन्हें कई बार सत्ता से बाहर कर चुकी है। उन्होंने शिवसेना के भीतर हुए राजनीतिक बदलाव का भी उल्लेख किया और सवाल किया कि उद्धव सत्ता परिवर्तन की बात किस आधार पर कर रहे हैं।
आपातकाल का जिक्र करते हुए शिंदे ने कहा कि 1975 में नागरिकों को जेल में डाला गया था, पत्रकारों पर पाबंदियां लगाई गई थीं और न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित हुई थी। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा स्थिति को आपातकाल कहना उचित नहीं है, क्योंकि राजनीतिक दल रैलियां कर रहे हैं, अदालतों में जा रहे हैं और मीडिया में अपनी बात रख रहे हैं।
इस तरह दशहरा रैली में उद्धव ठाकरे ने कानून-व्यवस्था, किसानों, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए, जबकि एकनाथ शिंदे ने सत्ता परिवर्तन और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर जवाब दिया। महाराष्ट्र की राजनीति में इन बयानों का असर कितना होगा, यह आने वाले समय में राजनीतिक प्रतिक्रिया और जनता के रुख से स्पष्ट होगा।
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