UP में महिलाओं की जिंदगी कैसे बदल रही है? CM योगी ने गिनाईं योजनाओं की उपलब्धियां, 1.20 करोड़ महिलाएं SHG से जुड़ीं

UP में महिलाओं की जिंदगी कैसे बदल रही है? CM योगी ने गिनाईं योजनाओं की उपलब्धियां, 1.20 करोड़ महिलाएं SHG से जुड़ीं

उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी योजनाओं की उपलब्धियां गिनाई हैं। शारदीय नवरात्र की अष्टमी पर मां महागौरी की पूजा के बाद उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने, बच्चों के पोषण में सुधार करने और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश में 1.20 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं, जबकि 31 जिलों में चार लाख से ज्यादा महिलाएं दुग्ध उत्पादन से जुड़े कारोबार में भागीदारी कर रही हैं। सरकार का दावा है कि इन पहलों से महिलाओं को रोजगार और आय के नए अवसर मिल रहे हैं। हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक असर समझने के लिए महिलाओं की आय, रोजगार और जीवन स्तर से जुड़े आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं।

महिलाओं की सुरक्षा से आत्मनिर्भरता तक, सरकार ने बताई अपनी प्राथमिकताएं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मां महागौरी की आराधना का संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक तरक्की तभी संभव है, जब महिलाएं सुरक्षित हों, बेटियों को पर्याप्त पोषण और बेहतर शिक्षा मिले तथा महिलाओं को सम्मान के साथ आत्मनिर्भर बनने के अवसर मिलें।

योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा, पोषण और आर्थिक स्वावलंबन पर काम कर रही है। सरकार का जोर महिलाओं को केवल सरकारी योजनाओं का लाभार्थी बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि उन्हें प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में सक्रिय भागीदार बनाने पर है।

महिला सशक्तिकरण का सीधा संबंध परिवार की आर्थिक स्थिति से भी है। जब महिलाओं के पास अपनी कमाई का साधन होता है, तो वे बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों से जुड़े फैसलों में अधिक भागीदारी कर सकती हैं। इसी उद्देश्य से स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण कारोबार से जुड़ी पहलों को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।

टेक होम राशन से महिलाओं को काम, पोषण व्यवस्था पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस समय बच्चों के पोषण से जुड़ी व्यवस्था में कई समस्याएं थीं। उनके मुताबिक, सरकार बनने के बाद टेक होम राशन के उत्पादन और वितरण की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को सौंपी गई।

सरकार का दावा है कि इससे राशन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और महिलाओं के लिए आय के अवसर तैयार करने में मदद मिली। इस पहल के दो अहम पहलू हैं। पहला, बच्चों और जरूरतमंद परिवारों तक पोषण से जुड़ी सेवाएं पहुंचाना। दूसरा, महिलाओं को उत्पादन और वितरण की गतिविधियों से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाना।

अगर ऐसी व्यवस्थाओं में महिलाओं को नियमित काम और उचित भुगतान मिलता है, तो इससे परिवार की आमदनी को सहारा मिल सकता है। साथ ही, पोषण सेवाओं की गुणवत्ता और वितरण की निगरानी भी जरूरी रहती है, ताकि योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय ₹3,000 से ₹12,000 करने का दावा

योगी आदित्यनाथ ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सरकार ने मानदेय को 3,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिमाह किया है। इसके साथ स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने की बात भी कही।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के पोषण, शुरुआती शिक्षा और मातृ-शिशु देखभाल से जुड़े कामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में उनके मानदेय और सामाजिक सुरक्षा में सुधार से उनके कामकाजी जीवन पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, मानदेय की यह राशि किस श्रेणी के भुगतान को दर्शाती है और किन परिस्थितियों में लागू होती है, इसकी विस्तृत जानकारी इस बयान में नहीं दी गई है। इसलिए इसे सरकार की ओर से बताई गई उपलब्धि के रूप में देखा जाना चाहिए।

4 लाख महिलाएं डेयरी कारोबार से जुड़ीं, 1.20 करोड़ SHG सदस्यों का दावा

मुख्यमंत्री ने बताया कि बलिनी, सामर्थ्य, काशी, बाबा गोरखनाथ और सृजनी जैसी दुग्ध उत्पादक कंपनियों के साथ 31 जिलों की चार लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। सरकार के मुताबिक, ये महिलाएं दुग्ध उत्पादन के जरिए आय अर्जित करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही हैं।

दुग्ध उत्पादन ग्रामीण परिवारों के लिए आय का एक नियमित स्रोत बन सकता है। यदि महिलाओं को दूध की बिक्री, भुगतान और कारोबार के संचालन में भागीदारी मिलती है, तो इससे उनकी आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ सकती है।

योगी ने बीसी सखी पहल का भी उल्लेख किया। इस व्यवस्था के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे गांवों में रहने वाले लोगों को वित्तीय लेनदेन से जुड़ी सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ 20 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। उन्होंने लखपति दीदी पहल का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाएं अपने हुनर और मेहनत को नियमित आय में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

स्वयं सहायता समूह महिलाओं को बचत, ऋण और छोटे कारोबार के लिए सामूहिक मंच उपलब्ध करा सकते हैं। लेकिन इन पहलों की सफलता का आकलन केवल समूहों में शामिल महिलाओं की संख्या से नहीं किया जा सकता। यह देखना भी जरूरी है कि कितनी महिलाओं की आय में वास्तविक बढ़ोतरी हुई है, कारोबार कितना टिकाऊ है और उन्हें बाजार तक कितनी पहुंच मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में महिला सशक्तिकरण को प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि सशक्त महिलाएं ही समृद्ध उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव हैं। अब इन योजनाओं के असर को समझने के लिए जमीनी स्तर पर रोजगार, आय, पोषण और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी से जुड़े परिणाम अहम होंगे।