ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का बड़ा हमला: “बिजली विभाग की हड़तालें बाहरी साजिश, यूनियन नेता 2010 में निजीकरण पर चुप क्यों थे?

ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का बड़ा हमला: “बिजली विभाग की हड़तालें बाहरी साजिश, यूनियन नेता 2010 में निजीकरण पर चुप क्यों थे?

हाल के दिनों में बिजली विभाग से जुड़े कुछ कर्मचारी संगठनों और यूनियन नेताओं द्वारा बार-बार विरोध प्रदर्शन और हड़ताल करने पर उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का गुस्सा सामने आया है. उन्होंने सोमवार को सोशल साइट एक्स पर पोस्ट कर कहा कि इन घटनाओं के पीछे साजिश की आशंका जताई है. उर्जा मंत्री ने लिखा कि विद्युत कर्मचारी के वेश में कुछ अराजक तत्व भी सुपारी लेने वालों में हैं. उनसे जलने वाले सभी इकट्ठा हो गए हैं. उन्होंने निजीकरण पर सफाई देते हुए कहा कि ऊर्जा मंत्री एक जेई का भी ट्रांसफर का निर्णय नहीं ले सकता है, तो वह इतना बड़ा निर्णय कैसे ले सकते हैं. उन्होंने कहा कि ये लोग वहीं हैं, जो बिजली विभाग को बदनाम कर रहे हैं, हालांकि ज्यादातर विद्युत अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. ये लोग उनकी मेहनत पर पानी फेर रहे हैं.

एके शर्मा ने लिखा कि उनका तीन साल का कार्यकाल हुआ है और इस दौरान ऐसे लोग चार बार हड़ताल कर चुके हैं. पहली हड़ताल तो तब हुई थी, तो उनके मंत्री बने हुए केवल तीन दिन ही हुए थे. ये हड़तालें बाहर से प्रेरित हैं और इसे लेकर हाईकोर्ट को भी हस्तक्षेप करना पड़ा था.

दूसरे विभागों में फिर क्यों नहीं हो रही हड़ताल? ऊर्जा मंत्री का सवाल

ऊर्जा मंत्री ने सवाल किया कि दूसरे विभागों में फिर क्यों हड़ताल नहीं हो रही है? क्या वहां यूनियन नहीं है या फिर वहां मुद्दे या समस्या नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों का मुख्य मुद्दा विद्युत व्यवस्था में निजीकरण को लेकर है हाल ही में कुछ कर्मचारी यूनियन के सदस्यों ने उनके सरकारी आवास पर जाकर प्रदर्शन किया और कथित तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया. छह घंटे तक चले इस प्रदर्शन के दौरान उनके परिवार के विरुद्ध भी टिप्पणी की गई. इसके बावजूद उन्होंने संयम का परिचय देते हुए प्रदर्शनकारियों को पानी पिलाया और मिठाई खिलाकर उनसे संवाद करने के लिए ढाई घंटे तक प्रतीक्षा की.

निजीकरण ऊर्जा मंत्री ने उनसे सवाल किया कि जब साल 2010 में टोरेंट कंपनी को निजीकरण किया गया और आगरा दिया गया. उस समय वे लोग ही यूनियन लीडर थे. उन्होंने सवाल किया कि निजीकरण कैसे हो गया? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह सभी शांति से इस कारण हुआ, क्योंकि ये बड़े कर्मचारी नेता प्लेन से विदेश दौरे पर गए थे.

निजीकरण का इतना बड़ा निर्णय अकेला का नहीं हो सकता

उन्होंने दूसरा सवाल किया कि निजीकरण का कोई निर्णय अकेले मंत्री का नहीं हो सकता है. जब एक जूनियर इंजीनियर तक का ट्रांसफर वह नहीं कर सकते हैं, UPPCL प्रबंधन की सामान्य काम की शैली स्वतंत्र है. उन्होंने सवाव किया कि इतना बड़ा निर्णय अकेले ऊर्जा मंत्री कैसे कर सकता है. उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि फिलहाल चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बनी टास्क फोर्स ही सारा निर्णय ले रही है और उसके तहत ही कार्यवाही की जा रही है. मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की उच्चस्तरीय अनुमति के बाद ही औपचारिक निजीकरण का शासनादेश हुआ है.

अपने पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा कि ईश्वर और जनता उनके साथ हैं. उनकी भावना बिजली विभाग व्यवस्था बेहतर बनाने की और जनता की सेवा करने की है. इसके अतिरिक्त उनका कोई इरादा नहीं है.