UPI पर चार्ज लगा तो क्या बदल जाएगा पेमेंट का तरीका? सर्वे में बड़ा खुलासा, सिर्फ 14% लोग ही देने को तैयार

UPI पर चार्ज लगा तो क्या बदल जाएगा पेमेंट का तरीका? सर्वे में बड़ा खुलासा, सिर्फ 14% लोग ही देने को तैयार

UPI आज रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। सब्जी खरीदने से लेकर शॉपिंग, होटल बिल और बड़े कारोबारी भुगतान तक लोग मोबाइल से कुछ सेकंड में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। लेकिन अब 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट को लेकर ग्राहकों और कारोबारियों के बीच नई चिंता सामने आई है। एक देशव्यापी सर्वे के मुताबिक, अगर ऐसे भुगतान पर ग्राहकों से किसी तरह का अतिरिक्त चार्ज लिया गया, तो बड़ी संख्या में लोग UPI के बजाय दूसरे पेमेंट विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

LocalCircles के सर्वे में देश के 291 जिलों के 67 हजार से ज्यादा UPI यूजर्स ने अपनी राय दी। सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, 76 फीसदी लोगों ने कहा कि वे 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना चाहते। वहीं केवल 14 फीसदी लोग ऐसे मिले, जो चार्ज लगने की स्थिति में भी UPI का इस्तेमाल जारी रखने को तैयार हैं।

76% ग्राहक बोले- एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देंगे

सर्वे का सबसे अहम संकेत यही है कि ग्राहक UPI को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि यह तेज और सुविधाजनक है। लेकिन सुविधा की कीमत बढ़ने पर उनकी पसंद बदल सकती है।

सर्वे में 76 फीसदी लोगों ने साफ कहा कि 2,000 रुपये से ऊपर के भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया तो वे भुगतान का दूसरा तरीका तलाशेंगे। यानी बड़े मूल्य के लेनदेन में UPI की जगह कैश, कार्ड या बैंक ट्रांसफर जैसे विकल्पों की मांग बढ़ सकती है।

सिर्फ 14 फीसदी यूजर्स ने कहा कि वे अतिरिक्त चार्ज देने के बावजूद UPI का इस्तेमाल जारी रखेंगे। बाकी लोगों ने किसी दूसरे विकल्प की ओर जाने की इच्छा जताई।

यह आंकड़ा डिजिटल पेमेंट कारोबार के लिए इसलिए अहम है क्योंकि UPI की सबसे बड़ी ताकत उसकी आसान और कम लागत वाली उपयोगिता रही है। अगर बड़े भुगतान पर अतिरिक्त लागत जुड़ती है, तो ग्राहक अपने व्यवहार में बदलाव कर सकते हैं।

कैश से लेकर क्रेडिट कार्ड तक, लोगों ने तैयार किए विकल्प

सर्वे में यह भी पूछा गया कि अगर 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगे तो लोग किस विकल्प का इस्तेमाल करेंगे।

जवाबों में सबसे बड़ा विकल्प कैश रहा। करीब 27 फीसदी लोगों ने कहा कि वे दोबारा नकद भुगतान की तरफ लौट सकते हैं।

इसके बाद 26 फीसदी लोग क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने की बात कह रहे हैं। वहीं 14 फीसदी लोग डेबिट कार्ड को विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।

करीब 4 फीसदी यूजर्स ने NEFT या IMPS के जरिए पैसे ट्रांसफर करने की बात कही। वहीं लगभग 9 फीसदी लोग किसी ऐसे दूसरे डिजिटल विकल्प की तलाश में हैं, जिस पर अतिरिक्त शुल्क न देना पड़े।

करीब 2 फीसदी लोगों ने इससे भी अलग जवाब दिया। उनका कहना था कि अगर अतिरिक्त चार्ज लगा तो वे खरीदारी ही टाल सकते हैं।

यानी सर्वे के मुताबिक, चार्ज का असर केवल पेमेंट ऐप बदलने तक सीमित नहीं रह सकता। कुछ ग्राहकों के खरीदारी के फैसले पर भी इसका असर पड़ सकता है।

व्यापारियों के सामने भी बड़ा सवाल, 5,000 रुपये पर कितना खर्च?

इस बदलाव की चिंता केवल ग्राहकों तक सीमित नहीं है। कारोबारियों के सामने भी यह सवाल है कि अगर MDR लागू होता है तो उसका आर्थिक बोझ कौन उठाएगा।

दिए गए सर्वे के मुताबिक, 0.4 फीसदी MDR की दर से 5,000 रुपये के भुगतान पर 20 रुपये का शुल्क बनता है। वहीं 50,000 रुपये के भुगतान पर यह रकम 200 रुपये होगी।

LocalCircles ने 32 हजार से ज्यादा कारोबारियों से भी राय ली। इनमें 41 फीसदी व्यापारियों ने कहा कि वे अपनी जेब से MDR का खर्च नहीं उठाएंगे। केवल 17 फीसदी कारोबारी ऐसे मिले जो इस खर्च को खुद वहन करने के लिए तैयार थे।

वहीं करीब 9 फीसदी कारोबारियों ने कहा कि वे UPI भुगतान स्वीकार ही नहीं करते।

इससे साफ है कि अगर शुल्क का सवाल सामने आता है तो कारोबारियों के लिए भी लागत और भुगतान के तरीके का मुद्दा महत्वपूर्ण रहेगा।

सरकार ने कहा- ग्राहक से चार्ज नहीं वसूला जा सकता

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि अगर MDR लागू होता है तो इसका भुगतान कौन करेगा? रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है और NPCI इसे खुद नहीं वसूल रहा है।

सरकार ने कारोबारियों को ग्राहकों से यह शुल्क वसूलने से रोकने की बात कही है। बैंकों को भी यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि इसका बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए।

हालांकि, दिए गए सर्वे में एक महत्वपूर्ण सवाल अभी खुला हुआ बताया गया है। अगर कोई व्यापारी नियमों के खिलाफ जाकर ग्राहक से अतिरिक्त पैसा वसूलता है, तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी और ग्राहक को रकम वापस कैसे मिलेगी—इसकी प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

ऐसे में 15 अक्टूबर 2026 से बड़े मूल्य के UPI भुगतान को लेकर ग्राहकों और कारोबारियों, दोनों की नजर इस व्यवस्था पर रहेगी। सर्वे के आंकड़े फिलहाल यह संकेत देते हैं कि अगर अतिरिक्त लागत सीधे ग्राहक तक पहुंची, तो बड़े UPI भुगतान में कैश और कार्ड जैसे विकल्पों की वापसी देखने को मिल सकती है।