वाराणसी में भारतीय वायुसेना के एयर शो को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के मौके पर गंगा किनारे आयोजित हो रहे ‘विंग्स ओवर गंगेज’ एयर शो के पास पर बीजेपी नेताओं की तस्वीरें होने को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष अजय राय ने आरोप लगाया कि वायुसेना के कार्यक्रम को राजनीतिक प्रचार का रूप दिया जा रहा है। उन्होंने इसे 23 अक्टूबर को होने वाले एमएलसी चुनाव के संदर्भ में आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताया और निर्वाचन आयोग से जांच की मांग की। समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने भी कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के तरीके और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर निर्वाचन आयोग की जांच या किसी आधिकारिक निष्कर्ष की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
एयर शो के पास पर बीजेपी नेताओं की तस्वीरें क्यों? अजय राय ने उठाए सवाल
वाराणसी में 22, 24 और 25 अक्टूबर को नमो घाट से अस्सी घाट के बीच ‘विंग्स ओवर गंगेज’ थीम पर एयर शो आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के मौके पर हो रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार का अनुमान है कि कार्यक्रम में 20 लाख से ज्यादा लोग पहुंच सकते हैं।
इसी बीच एयर शो में प्रवेश के लिए जारी किए जा रहे पास राजनीतिक विवाद की वजह बन गए हैं। कांग्रेस नेता अजय राय का आरोप है कि ये पास वायुसेना की ओर से जारी होने के बजाय बीजेपी के जनप्रतिनिधियों की ओर से जारी किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, पास पर संबंधित जनप्रतिनिधि की तस्वीर लगी है। साथ ही यह भी दर्ज है कि किस घाट से किस घाट तक लोगों को कार्यक्रम दिखाने के लिए जुटाया जाएगा।
अजय राय ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि जब यह देश की वायुसेना का कार्यक्रम है, तो पास पर राजनीतिक नेताओं की तस्वीरें लगाने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था के जरिए बीजेपी कार्यक्रम को पार्टी से जोड़ने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस नेता ने निर्वाचन आयोग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि वायुसेना देश की संस्था है और उसके कार्यक्रम को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।
किस विधायक को किस घाट पर भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी? सामने आए दावे
एयर शो को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया, जब पास जारी करने और अलग-अलग घाटों पर लोगों को जुटाने की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठे।
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, वाराणसी दक्षिण के विधायक नीलकंठ तिवारी के हिस्से ललिता घाट से प्रहलाद घाट तक लोगों को जुटाने की जिम्मेदारी बताई गई है। वहीं, वाराणसी उत्तर के विधायक रवीन्द्र जायसवाल के लिए राजघाट से प्रहलाद घाट तक का क्षेत्र बताया गया है।
कैंट से बीजेपी विधायक सौरभ श्रीवास्तव को अस्सी घाट से राजेंद्र प्रसाद घाट तक और रोहनिया के विधायक सुनील पटेल को अघोरेश्वर तथा डोमरी क्षेत्र में लोगों को जुटाने से जोड़ा गया है।
इन विवरणों को लेकर विपक्ष का सवाल है कि क्या सरकारी या आधिकारिक कार्यक्रम के लिए राजनीतिक जनप्रतिनिधियों की तस्वीर वाले पास जारी करना उचित है? साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि लोगों को जुटाने की इस व्यवस्था में सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल हो रहा है या नहीं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है। केवल पास पर तस्वीर होने या किसी क्षेत्र में भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी बताए जाने से अपने आप आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन साबित नहीं होता। इसके लिए कार्यक्रम की व्यवस्था, पास जारी करने की आधिकारिक प्रक्रिया और चुनाव आयोग के लागू निर्देशों की जांच जरूरी होगी।
सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने भी घेरा, सरकारी संसाधनों पर उठाए सवाल
इस विवाद में समाजवादी पार्टी भी कूद गई है। चंदौली से सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने एयर शो की तारीख और भीड़ जुटाने के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
वीरेंद्र सिंह का आरोप है कि बीजेपी विधायक अपनी तस्वीर वाले पास जारी कर रहे हैं और कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या निर्वाचन आयोग इस पूरे घटनाक्रम पर ध्यान नहीं दे रहा है।
सपा सांसद ने तंज कसते हुए कहा कि कार्यक्रम भारतीय वायुसेना का कम और बीजेपी तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शो ज्यादा दिखाई दे रहा है।
विपक्ष के इन बयानों से एयर शो को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर कार्यक्रम को वायुसेना के शौर्य और पराक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है, तो दूसरी ओर पास जारी करने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब 23 अक्टूबर को एमएलसी चुनाव होना है। इसी वजह से विपक्षी दल कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को चुनावी आचार संहिता के नजरिए से भी देख रहे हैं।
20 लाख लोगों के पहुंचने का अनुमान, अब निर्वाचन आयोग की भूमिका पर नजर
वाराणसी में गंगा किनारे होने वाला यह एयर शो बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करने की संभावना रखता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसमें 20 लाख से अधिक लोगों के पहुंचने का अनुमान जताया है। ऐसे बड़े आयोजन में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और लोगों की आवाजाही की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।
लेकिन फिलहाल राजनीतिक विवाद का केंद्र कार्यक्रम का आयोजन नहीं, बल्कि पास जारी करने का तरीका और उस पर राजनीतिक नेताओं की तस्वीरें हैं। कांग्रेस और सपा ने इस मामले में सवाल उठाए हैं, जबकि आरोपों की पुष्टि के लिए आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों का जवाब जरूरी है।
अगर निर्वाचन आयोग को शिकायत मिलती है, तो वह उपलब्ध तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर मामले की समीक्षा कर सकता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में आयोग की ओर से किसी अंतिम निष्कर्ष या कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
एयर शो भारतीय वायुसेना की वर्षगांठ से जुड़ा कार्यक्रम है। ऐसे में आयोजन की गरिमा बनाए रखने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि चुनावी अवधि में सरकारी कार्यक्रमों और राजनीतिक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर रहे। अब देखना होगा कि पास को लेकर उठे सवालों पर प्रशासन और निर्वाचन आयोग क्या रुख अपनाते हैं।



