वाराणसी को मिली ₹25 हजार करोड़ से ज्यादा की सौगात! एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और काशी के लिए दो मेगा एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी

वाराणसी को मिली ₹25 हजार करोड़ से ज्यादा की सौगात! एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और काशी के लिए दो मेगा एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वाराणसी के लिए दो बड़ी एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर में लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक दबाव को कम करना, एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना तथा काशी आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की यात्रा को अधिक सुगम बनाना है। दोनों परियोजनाओं पर कुल 25,446 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इनके पूरा होने के बाद वाराणसी की शहरी कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

दो मेगा एलिवेटेड कॉरिडोर से बदलेगी वाराणसी की तस्वीर

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पहले प्रोजेक्ट के तहत वरुणा नदी के किनारे लगभग 43 किलोमीटर लंबा 6-लेन और 4-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। यह कॉरिडोर नमो घाट से शुरू होगा और शहर के प्रमुख हिस्सों को जोड़ते हुए एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगा।

इस परियोजना की अनुमानित लागत 10,998 करोड़ रुपये है और इसे चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि इससे शहर के भीतर ट्रैफिक जाम में कमी आएगी और लोगों का सफर पहले की तुलना में अधिक तेज और सुविधाजनक होगा।

गंगा किनारे बनेगा दूसरा एलिवेटेड कॉरिडोर

कैबिनेट ने गंगा नदी के किनारे बनने वाले दूसरे एलिवेटेड कॉरिडोर को भी मंजूरी दी है। यह परियोजना करीब 46 किलोमीटर लंबी होगी और इस पर 14,448 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

सरकार का मानना है कि इस कॉरिडोर के तैयार होने के बाद श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही शहर की प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

हर साल 15 करोड़ पर्यटकों को मिलेगा फायदा

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, वाराणसी में हर वर्ष करीब 15 करोड़ पर्यटक और तीर्थयात्री आते हैं। लगातार बढ़ रही इस संख्या को देखते हुए शहर के बुनियादी ढांचे का विस्तार जरूरी हो गया था।

सरकार का कहना है कि नई परियोजनाओं से पर्यटन, व्यापार और स्थानीय परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और धार्मिक स्थलों के बीच यात्रा पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएगी।

कैबिनेट ने कई अन्य बड़े फैसलों को भी दी मंजूरी

वाराणसी परियोजनाओं के अलावा केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेलवे, उर्वरक, मोबाइल निर्माण और सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है।

  • डंगोआपोसी-राजखरसवां के बीच चौथी रेलवे लाइन के लिए 1,365 करोड़ रुपये की मंजूरी।
  • पारादीप-हरिदासपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण पर 2,542 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
  • यूरिया-2026 राष्ट्रीय निवेश नीति के तहत 7 से 8 नए प्राकृतिक गैस आधारित यूरिया संयंत्र लगाने की योजना को मंजूरी।
  • 62,500 करोड़ रुपये की लागत वाली मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को स्वीकृति, जिससे करीब 60 हजार प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
  • 1.27 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना को भी मंजूरी दी गई, जिसका उद्देश्य भारत को सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में आत्मनिर्भर बनाना है।

सरकार का कहना है कि इन सभी फैसलों का उद्देश्य देश में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, निवेश बढ़ाना, रोजगार के अवसर पैदा करना और विनिर्माण क्षेत्र को नई गति देना है।