Waqf Bill Reaches SC: वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को लेकर देश की राजनीति में जबरदस्त हलचल मच गई है। संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा से पारित इस बिल ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की नई लकीर खींच दी है। कांग्रेस, AIMIM समेत कई मुस्लिम संगठन इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं, वहीं अब यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई याचिका
AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने वक्फ संशोधन अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में दोनों नेताओं ने इस बिल को संविधान विरोधी बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। ओवैसी ने कहा कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, वहीं मोहम्मद जावेद ने इसे संवैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध बताया।
प्रमोद तिवारी का बयान: “कानूनी लड़ाई तय”
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, “यह विधेयक लोकसभा और राज्यसभा से पारित हो चुका है, अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर बाकी हैं। इसके बाद यह निश्चित रूप से कानूनी लड़ाई से गुजरेगा। हम हर वो कदम उठाएंगे जो संविधान के दायरे में है। हमारा मानना है कि यह संशोधन असंवैधानिक है।”
सोनिया गांधी का तीखा हमला
कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने भी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा, “यह विधेयक संविधान पर सरेआम हमला है और समाज को स्थायी ध्रुवीकरण में रखने की भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। सरकार ने इसे मनमाने ढंग से पारित कराया है।” हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोनिया गांधी की टिप्पणी को अप्रत्यक्ष रूप से आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “विधेयक पर वरिष्ठ सदस्य द्वारा की गई टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण है और संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं है।”
वक्फ संशोधन विधेयक को समर्थन और विरोध
लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक के पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े। वहीं, राज्यसभा में बिल के पक्ष में 128 और विरोध में 95 वोट डाले गए। इस तरह दोनों सदनों में यह विधेयक बहुमत से पारित हो गया है।