Thursday, April 3, 2025

संसद से लेकर दिल्ली की 77% ज़मीन और ताजमहल तक! वक्फ बोर्ड के वो पांच दावे जानकर दंग रह जाएंगे आप

Waqf Board Land Claims India: देश की संसद हो या आगरा का ताजमहल, वक्फ बोर्ड के दावों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। कभी गांव, कभी मंदिर, तो कभी संसद भवन हर जगह वक्फ़ के दावे ठोके जाते रहे हैं। हाल के सालों में वक्फ बोर्ड के असीमित अधिकारों और संपत्ति पर दावों ने देश भर में हंगामा मचा रखा है। आइए, इसके पांच ऐसे किस्सों पर नजर डालते हैं, जो आपको हैरान कर देंगे और सोचने पर मजबूर कर देंगे कि आखिर यह सिलसिला कहां जाकर थमेगा?

1. दिल्ली का 77% इलाका वक्फ का?

वक्फ बोर्ड ने दिल्ली के 77 फीसदी इलाके पर दावा ठोककर सबको चौंका दिया। इसमें इंडिया गेट, संसद भवन और CGO कॉम्प्लेक्स जैसी अहम जगहें भी शामिल हैं। 1970 से चल रहे एक मामले में दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इन संपत्तियों को अपनी बताया था। UPA सरकार ने 2014 में 123 प्रॉपर्टी को गैर-अधिसूचित कर वक्फ को सौंप दिया था, जिसे बाद में मोदी सरकार ने वापस लिया।

 

लेकिन सवाल वही है—क्या बिना ठोस दस्तावेज के इतना बड़ा दावा मुमकिन है? वक्फ एक्ट के सेक्शन 85 के तहत इसके फैसले को कोर्ट में चुनौती भी नहीं दी जा सकती, जिससे आम आदमी की मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

2.जब 1500 साल पुराने मंदिर पर ठोका दावा

तमिलनाडु के तिरुचेंथुरई गांव की कहानी तो और हैरान करने वाली है। 2022 में वक्फ बोर्ड ने पूरे गांव को अपनी संपत्ति घोषित कर दिया, जिसमें 1500 साल पुराना मणेंडियावल्ली चंद्रशेखर स्वामी मंदिर भी शामिल था। एक किसान जब अपनी जमीन बेचने गया, तो पता चला कि वक्फ की इजाजत चाहिए। बोर्ड ने 220 पेज का दस्तावेज पेश किया, जिसमें दावा किया कि रानी मंगम्मल और स्थानीय राजाओं ने यह जमीन दान दी थी। ग्रामीणों ने डीएम से गुहार लगाई, लेकिन यह सवाल अनसुलझा रहा कि 1400 साल पुराना वक्फ 1500 साल पुराने मंदिर पर कैसे हक जता सकता है?

3.ताजमहल और लाल किला भी वक्फ का?

2018 में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि ताजमहल “सर्वशक्तिमान” का है और इसे उनकी संपत्ति में दर्ज करना चाहिए। शाहजहां के हस्ताक्षर वाला कोई दस्तावेज मांगे जाने पर बोर्ड खाली हाथ रहा। फिर भी, दावा वापस नहीं लिया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में बुरहानपुर किले पर वक्फ के दावे को खारिज करते हुए जस्टिस अहलूवालिया ने तंज कसा, “क्या ताजमहल, लाल किला और पूरा देश वक्फ का है?” कोर्ट ने साफ कहा कि ऐतिहासिक धरोहरें केंद्र सरकार के अधीन हैं, वक्फ के नहीं। लेकिन ऐसे दावों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।

4.जब वक्फ के दावे से रातोंरात हिल गए 18 गांवों के निवासी

तमिलनाडु में ही वक्फ बोर्ड ने 18 गांवों की 389 एकड़ जमीन पर हक जताया। दावा था कि 1954 के सर्वे में यह जमीन उन्हें दी गई थी। 220 पन्नों का दस्तावेज सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में जमा कर किसानों के जमीन बेचने पर रोक लगा दी गई। हरियाणा के जठलाना गांव में भी गुरुद्वारे की जमीन वक्फ को हस्तांतरित कर दी गई, जहां न मस्जिद थी, न कोई मुस्लिम बस्ती। ये मामले दिखाते हैं कि वक्फ के दावे कितने मनमाने हो सकते हैं, और आम लोग इसके आगे बेबस हैं।

5.सूरत का नगर निगम मुख्यालय से लेकर मथुरा–काशी तक

नवंबर 2021 में गुजरात वक्फ बोर्ड ने सूरत नगर निगम मुख्यालय को अपनी संपत्ति घोषित कर दिया था। इसके एवज में तर्क था कि शाहजहां ने अपनी बेटी को यह जमीन वक्फ के तौर पर दान दी थी। 400 साल पुराने इस दावे का कोई सबूत नहीं, फिर भी हक जताया गया। वहीं काशी विश्वनाथ, द्वारिकाधीश मंदिर और रामलीला मैदान जैसे स्थानों पर भी वक्फ के दावे सामने आए हैं। ये सिलसिला बताता है कि वक्फ बोर्ड की नजर किसी भी जमीन पर पड़ सकती है, और उसे वर्तमान कानूनों के दायरे से छुड़ाना कोर्ट-कचहरी के चक्कर में सालों की मेहनत मांगता है।

वक्फ़ की जमीनों का क्या है लेखा जोखा?

बता दें कि वक्फ बोर्ड के पास रेलवे और सेना के बाद देश में सबसे ज्यादा कुल 9.4 लाख एकड़ जमीन है। इसके अधिकार इतने व्यापक हैं कि कोई भी संपत्ति इसकी जांच के दायरे में आ सकती है। दावा ठोक दिया जाए, तो उसे गलत साबित करना मालिक की जिम्मेदारी है। कोर्ट में चुनौती न दे पाने की पाबंदी इसे और मुश्किल बनाती है। सवाल यह है—क्या यह व्यवस्था अब सिर्फ विवादों का सबब बनकर रह गई है? इन पांच किस्सों से तो यही लगता है कि वक्फ का दावा अब हकीकत से ज्यादा हंगामे की वजह बन रहा है।

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