पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। मात्र 24 दिन पहले मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया। इस फैसले से राज्य की पहली BJP सरकार अब पूरी तरह से तैयार नजर आ रही है। आम लोगों के लिए यह विस्तार सिर्फ नामों की सूची नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों को संतुलित करने की कोशिश है, जो आने वाले दिनों में राज्य की नीतियों और विकास योजनाओं पर सीधा असर डाल सकता है।
संघर्ष की कहानियां मंत्री पद तक पहुंचीं
कैबिनेट विस्तार में सबसे ज्यादा ध्यान खींच रहा नाम है कलीता माझी का। पूर्वी बर्दवान के औशग्राम से चुनाव जीतने वाली कलीता पहले घरों में नौकरानी का काम करती थीं। उनकी मासिक कमाई महज 2,500 रुपये थी। पति प्लंबर का काम करते हैं। आज उन्होंने मंत्री पद की शपथ ली है। यह कहानी दिखाती है कि BJP ने उन चेहरों को तरजीह दी है जो जमीनी स्तर पर संघर्ष कर चुके हैं।
इसी तरह, 30 साल के युवा विधायक बिराज बिस्वास को भी मंत्री बनाया गया है। उत्तर दिनाजपुर के करांडीघी से जीतने वाले बिराज पेशे से वकील हैं और कलकत्ता हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। छात्र राजनीति से निकलकर वे ABVP के महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। दिग्गज नेता गौतम पाल को हराने वाले इस युवा चेहरे को जिम्मेदारी देकर पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि नई पीढ़ी को मौका मिलेगा।
41 मंत्रियों की मजबूत टीम, तीन पद अभी खाली
आज के विस्तार में 13 कैबिनेट मंत्रियों, 3 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्रियों और 19 राज्य मंत्रियों ने शपथ ली। अब कुल मंत्रियों की संख्या 41 हो गई है। 294 सदस्यीय विधानसभा में अधिकतम 44 मंत्री हो सकते हैं, यानी अभी भी तीन पद खाली हैं।
कैबिनेट मंत्रियों में तपस रॉय, दीपक बर्मन, शंकर घोष, अर्जुन सिंह, मनोज उरांव, गौरी शंकर घोष, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, स्वपन दासगुप्ता, कल्याण चक्रवर्ती, अनूप कुमार दास, अजय कुमार पोद्दार, शरदवत मुखोपाध्याय और दूध कुमार मंडल शामिल हैं। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में मालती राभा रॉय, इंद्रनील खान और राजेश मेहता ने शपथ ली।
राज्य मंत्रियों की सूची में अशोक डिंडा (पूर्व क्रिकेटर), पत्रकार पृष्ठभूमि वाले स्वपन दासगुप्ता और जगन्नाथ चट्टोपाध्याय जैसे नाम शामिल हैं। अशोक डिंडा मोयना से लगातार दूसरी बार जीते हैं।
महिलाओं और उत्तरी बंगाल को मिला बड़ा प्रतिनिधित्व
इस कैबिनेट में महिलाओं की अच्छी भागीदारी दिख रही है। कलीता माझी के अलावा मौमिता बिस्वास मिश्रा, सुमना सरकार, गार्गी घोष दास, पूर्णिमा चक्रवर्ती और पहले से कैबिनेट में मौजूद अग्निमित्रा पॉल को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
खास बात यह है कि उत्तरी बंगाल का प्रतिनिधित्व काफी मजबूत हुआ है। निसिथ प्रमाणिक के अलावा शंकर घोष, विशाल लामा, जुएल मुर्मू, आनंदमय बर्मन, दीपक बर्मन और मालती राभा रॉय जैसे नाम शामिल हैं। विधानसभा स्पीकर रथिंद्र घोष भी इसी क्षेत्र से हैं।
9 मई को शुभेंदु अधिकारी के साथ जब पहली कैबिनेट बनी थी, तब भी विभिन्न समुदायों – मतुआ, राजबंशी, आदिवासी और महिला प्रतिनिधित्व का ध्यान रखा गया था। इस विस्तार में भी उसी सोच को आगे बढ़ाया गया है।
आम पाठक के लिए मायने
इस कैबिनेट विस्तार से राज्य में स्थिरता और समावेशी विकास की उम्मीद बढ़ गई है। विभिन्न वर्गों, क्षेत्रों और पृष्ठभूमि के लोगों को शामिल करके BJP सरकार सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। आम नागरिकों को उम्मीद है कि नई टीम शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देगी, खासकर उन इलाकों में जहां विकास की जरूरत सबसे ज्यादा है।
24 दिन की सरकार में इतना बड़ा विस्तार दर्शाता है कि शुभेंदु अधिकारी तेजी से काम करने के मूड में हैं। अब देखना यह होगा कि ये नए चेहरे राज्य की चुनौतियों से कैसे निपटते हैं।


