पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 इस बार सिर्फ राजनीतिक टकराव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मतदाताओं की भागीदारी ने नया इतिहास रच दिया। दो चरणों में संपन्न हुए इस चुनाव में कुल मतदान करीब 92.47 फीसदी दर्ज किया गया, जो अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल है। हालांकि, ये आंकड़े अभी प्रारंभिक हैं और अंतिम संख्या में हल्का बदलाव संभव है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विवादों के बीच भी मतदाताओं का उत्साह कम नहीं हुआ। यही वजह है कि दोनों चरणों में भारी संख्या में लोग मतदान केंद्रों तक पहुंचे।
महिलाओं ने संभाली कमान, पुरुष भी पीछे नहीं
इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत महिलाओं की भागीदारी रही। पहले चरण में 94.10 फीसदी महिलाओं ने मतदान किया, जबकि दूसरे चरण में यह आंकड़ा 92.28 फीसदी रहा। कुल मिलाकर 93.24 फीसदी महिला मतदाताओं ने अपने अधिकार का इस्तेमाल किया, जो एक मजबूत लोकतांत्रिक संकेत माना जा रहा है। पुरुष मतदाता भी पीछे नहीं रहे। पहले चरण में 92.34 फीसदी और दूसरे चरण में 91.07 फीसदी पुरुषों ने वोट डाले। कुल मिलाकर पुरुषों की भागीदारी 91.74 फीसदी रही। यह आंकड़े बताते हैं कि इस बार चुनाव सिर्फ राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि मतदाताओं की सक्रियता के लिए भी याद किया जाएगा।
क्षेत्रवार तस्वीर: कोलकाता से बर्धमान तक जोश
अगर क्षेत्रीय स्तर पर देखें, तो राजधानी कोलकाता में दूसरे चरण के दौरान करीब 87 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। वहीं, पूर्वी बर्धमान जिला 92.46 फीसदी वोटिंग के साथ सबसे आगे रहा। दक्षिण कोलकाता की चर्चित भवानीपुर सीट पर भी जमकर वोटिंग हुई। यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के बीच मुकाबला है। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर भी लगभग 87 फीसदी मतदान हुआ, जिससे साफ है कि मतदाता इस बार निर्णायक भूमिका निभाना चाहते हैं।
राजनीतिक दलों का दावा: ‘जीत हमारी’
मतदान खत्म होते ही राजनीतिक दलों में उत्साह साफ नजर आ रहा है। तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी—दोनों ही अपनी जीत को लेकर आश्वस्त दिख रहे हैं। महिला वोटर्स की भारी भागीदारी को दोनों दल अपने-अपने पक्ष में मान रहे हैं। पिछले चुनावों में भी महिलाओं की भूमिका निर्णायक रही है, और इस बार भी वही ट्रेंड दोहराया जाता दिख रहा है।
अब नजर 4 मई पर, क्या कहेंगे नतीजे?
चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सबकी निगाहें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। रिकॉर्ड मतदान ने जहां लोकतंत्र को मजबूत किया है, वहीं राजनीतिक समीकरणों को भी जटिल बना दिया है। आम मतदाता के लिए यह चुनाव इसलिए खास है क्योंकि इसमें उनकी भागीदारी ने यह दिखा दिया कि लोकतंत्र सिर्फ वोट देने का अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। अब देखना होगा कि इतनी बड़ी भागीदारी किस दल के पक्ष में जाती है और बंगाल की सत्ता किसके हाथ में जाती है।


