बंगाल चुनाव में सख्ती: बाइक रैली पूरी तरह बैन, पिलियन राइडिंग पर भी रोक—जानिए आयोग का तर्क

बंगाल चुनाव में सख्ती: बाइक रैली पूरी तरह बैन, पिलियन राइडिंग पर भी रोक—जानिए आयोग का तर्क

पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले माहौल को शांत और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग ने सख्त कदम उठाए हैं। अब राज्य में मतदान से 48 घंटे पहले किसी भी तरह की बाइक रैली पर पूरी तरह रोक रहेगी। इतना ही नहीं, इस दौरान बाइक पर पीछे बैठकर यात्रा करने यानी पिलियन राइडिंग पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। आयोग का यह फैसला सीधे तौर पर सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़ा है, लेकिन इसका असर आम लोगों की दिनचर्या पर भी पड़ सकता है।

48 घंटे पहले ‘नो बाइक रैली’: सख्त निर्देश जारी

राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) ने 20 अप्रैल को जारी आदेश में साफ किया है कि मतदान से पहले के 48 घंटे, जिसे ‘साइलेंस पीरियड’ कहा जाता है, उसमें बाइक रैलियों की अनुमति नहीं होगी। जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इस नियम का सख्ती से पालन कराया जाए।

आयोग का कहना है कि कई बार चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद भी राजनीतिक दल बाइक रैलियों के जरिए माहौल बनाने या मतदाताओं पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

पिलियन राइडिंग पर भी रोक, समयबद्ध प्रतिबंध

निर्देशों के मुताबिक, इस अवधि में शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक मोटरसाइकिलों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक रहेगी, सिवाय आपात स्थिति जैसे चिकित्सा या जरूरी पारिवारिक कारणों के।

इसके अलावा, दिन के समय यानी सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक भी बाइक पर पीछे बैठने की अनुमति सामान्य रूप से नहीं होगी। हालांकि, स्कूल जाने वाले बच्चों या जरूरी कार्यों के लिए सीमित छूट दी जा सकती है। मतदान के दिन कुछ शर्तों के साथ परिवार के सदस्यों को मतदान के लिए बाइक इस्तेमाल करने की अनुमति रहेगी।

कैश और शराब के अवैध इस्तेमाल पर लगाम

चुनाव आयोग के इस फैसले के पीछे एक अहम कारण अवैध गतिविधियों को रोकना भी है। अधिकारियों के मुताबिक, संकरी गलियों में बाइक के जरिए नकदी या शराब पहुंचाने के मामले सामने आते रहे हैं, जहां चारपहिया वाहनों की जांच मुश्किल होती है।

इसलिए आयोग ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि मतदाताओं को किसी तरह का प्रलोभन या दबाव न दिया जा सके और चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो।

डिलीवरी एजेंट्स पर असर, नियम को लेकर असमंजस

इस आदेश का असर उन लोगों पर भी पड़ सकता है, जो रोजी-रोटी के लिए बाइक पर निर्भर हैं, खासकर ऐप-आधारित डिलीवरी कर्मी। कई लोग रात के समय काम करते हैं, लेकिन नए नियमों में इस वर्ग के लिए कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिया गया है।

इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन पर भी वही प्रतिबंध लागू होगा या प्रशासन उन्हें अलग से छूट देगा। फिलहाल इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

चुनाव आयोग का यह कदम साफ संकेत देता है कि वह किसी भी कीमत पर निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना चाहता है। लेकिन साथ ही, यह भी जरूरी होगा कि आम नागरिकों और कामकाजी लोगों की जरूरतों को संतुलित तरीके से ध्यान में रखा जाए।