बंगाल चुनाव में तेज हुआ ‘हिंदू vs बांग्ला’ नैरेटिव: वोटिंग के बीच शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान

बंगाल चुनाव में तेज हुआ ‘हिंदू vs बांग्ला’ नैरेटिव: वोटिंग के बीच शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बीच सियासी बयानबाजी अपने चरम पर पहुंचती दिख रही है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने मतदान के दिन ही बड़ा बयान देकर चुनावी बहस को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने कहा कि अगर इस बार राज्य में सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ, तो “सनातन के अस्तित्व पर खतरा” खड़ा हो सकता है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य की 152 सीटों पर पहले चरण का मतदान चल रहा है और राजनीतिक दल मतदाताओं को प्रभावित करने की हर संभव कोशिश में जुटे हैं।

वोटिंग के बीच शुभेंदु का बयान, बदला चुनावी टोन

नंदीग्राम में वोट डालने के बाद मीडिया से बातचीत में शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बंगाल में हिंदू समाज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस बार बदलाव तय है और जनता परिवर्तन के पक्ष में मतदान कर रही है।

हालांकि, उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्रीय सुरक्षा बलों की व्यवस्था की सराहना भी की। साथ ही यह भी कहा कि कुछ जगहों पर अब भी गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिन पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।

नंदीग्राम से संदेश, भबानीपुर पर नजर

नंदीग्राम वही सीट है जहां 2021 के चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराया था। इस बार भी वह यहां से मैदान में हैं, जबकि ममता बनर्जी भबानीपुर सीट से चुनाव लड़ रही हैं, जहां दूसरे चरण में मतदान होगा।

शुभेंदु अधिकारी का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी माना जा रहा है—खासकर तब जब वह खुद को ममता बनर्जी के सीधे मुकाबले में पेश करते रहे हैं।

BJP का हिंदू कार्ड बनाम TMC का बांग्ला नैरेटिव

इस चुनाव में राजनीतिक रणनीति साफ तौर पर दो अलग-अलग नैरेटिव पर टिकती दिख रही है। एक ओर भाजपा ‘हिंदू पहचान’ को केंद्र में रखकर चुनावी मैदान में उतरी है, वहीं तृणमूल कांग्रेस ‘बांग्ला अस्मिता’ को प्रमुख मुद्दा बना रही है।

ममता बनर्जी पहले ही यह आरोप लगा चुकी हैं कि भाजपा की सरकार बनने पर बंगाल की सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हो सकती है। यहां तक कि खाने-पीने की आदतों को लेकर भी बहस छिड़ चुकी है। इसके जवाब में भाजपा नेता सार्वजनिक रूप से मछली खाते हुए अपनी तस्वीरें साझा कर रहे हैं, ताकि इस नैरेटिव को संतुलित किया जा सके।

मतदान के बीच बढ़ती सियासी गर्मी

पहले चरण का मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन बयानबाजी ने माहौल को राजनीतिक रूप से और संवेदनशील बना दिया है। शुभेंदु अधिकारी ने अपने पोलिंग एजेंट की गिरफ्तारी का मुद्दा भी उठाया और सख्त कार्रवाई की मांग की।

बंगाल का यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि पहचान, संस्कृति और राजनीतिक रणनीति का भी केंद्र बन चुका है। अब निगाहें अगले चरण की वोटिंग और इन बयानों के मतदाताओं पर पड़ने वाले असर पर टिकी हैं।