पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान जैसे ही खत्म होगा, सियासी हलकों की नजरें एक बार फिर एग्जिट पोल पर टिक जाएंगी। शाम 6:30 बजे के बाद अलग-अलग एजेंसियां अपने अनुमान जारी करेंगी, जिनसे यह संकेत मिलने की उम्मीद है कि राज्य में अगली सरकार किसकी बन सकती है। हालांकि, पिछले अनुभव को देखते हुए इस बार एग्जिट पोल की विश्वसनीयता भी खुद एक बड़ा सवाल बनी हुई है।
मतदाता के लिए यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है। यह उस भरोसे से जुड़ा है कि जो तस्वीर दिखाई जा रही है, क्या वह जमीन की हकीकत के करीब है या नहीं।
आज शाम आएंगे संकेत, लेकिन नियम सख्त
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान समाप्त होने के आधे घंटे बाद ही एग्जिट पोल सार्वजनिक किए जा सकते हैं। यानी 6:30 बजे से पहले कोई भी चैनल या प्लेटफॉर्म नतीजे जारी नहीं कर सकता। नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है—दो साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों।
इस बार सिर्फ बंगाल ही नहीं, बल्कि असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के एग्जिट पोल भी साथ में सामने आएंगे। इसलिए शाम का समय राजनीतिक रूप से काफी अहम रहने वाला है।
2021 की याद: जब सारे अनुमान उलटे पड़ गए
अगर पिछले चुनाव की बात करें तो तस्वीर बिल्कुल अलग थी। लगभग सभी बड़े एग्जिट पोल्स ने TMC और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर का अनुमान जताया था। कई सर्वे में भाजपा को बढ़त तक दिखा दी गई थी।
उदाहरण के तौर पर, कुछ एजेंसियों ने टीएमसी को 150-160 सीटों के आसपास और भाजपा को 110-120 सीटों तक सीमित बताया। वहीं, कुछ सर्वे ने भाजपा को 130 से ज्यादा सीटें मिलने का दावा भी किया। ‘पोल ऑफ पोल्स’ में भी मुकाबला करीबी दिखाया गया।
लेकिन जब 2 मई 2021 को असली नतीजे आए, तो पूरा गणित बदल गया। ममता बनर्जी की पार्टी ने 215 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि भाजपा 77 सीटों पर सिमट गई। इस अंतर ने एग्जिट पोल की सटीकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
बंगाल में एग्जिट पोल क्यों चूक जाते हैं?
विश्लेषकों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में ‘साइलेंट वोटर’ की भूमिका काफी अहम होती है। कई मतदाता खुलकर अपनी पसंद नहीं बताते, जिससे सर्वे एजेंसियों के आंकड़े वास्तविकता से दूर हो जाते हैं।
इसके अलावा, स्थानीय मुद्दे, क्षेत्रीय भावनाएं और मतदान के दिन का माहौल भी अंतिम परिणाम को प्रभावित करते हैं। इस बार भी मतदाता सूची से नाम हटने और कुछ संवेदनशील घटनाओं के चलते चुनावी समीकरण और जटिल बताए जा रहे हैं।
इस बार क्या बदलेगा समीकरण?
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या 2026 के एग्जिट पोल पिछले अनुभव से सबक लेकर ज्यादा सटीक होंगे, या फिर इस बार भी नतीजे चौंकाएंगे। राजनीतिक दलों के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन अंतिम फैसला मतदाता के हाथ में ही है।
मतगणना 4 मई को होगी, तब तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। फिलहाल, एग्जिट पोल सिर्फ एक संकेत हैं—जिन्हें समझना जरूरी है, लेकिन आंख बंद कर भरोसा करना शायद जल्दबाजी होगी।


