इन दिनों आईपीएल 2026 का रोमांच पूरे देश को अपनी ओर खींच रहा है। हर मैच में रनों की बरसात और विकेटों के गिरने का सिलसिला जारी है। लेकिन इसी बीच भारतीय क्रिकेट में एक गंभीर मुद्दा सामने आया है, जो युवा सितारों की तैयारी और अनुशासन पर सवाल खड़ा कर रहा है। टीम इंडिया के होनहार ओपनर यशस्वी जायसवाल और महिला टीम की तेजतर्रार बल्लेबाज शेफाली वर्मा के खिलाफ नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (NADA) ने शिकायत दर्ज की है। दोनों खिलाड़ी डोप टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं हुए, जिसकी वजह से उनका नाम ‘मिस टेस्ट’ में दर्ज हो गया है।
यह मामला सामान्य नहीं है। क्रिकेट प्रेमी जानते हैं कि आजकल खिलाड़ियों की फिटनेस और स्वच्छता पर नजर रखना कितना जरूरी हो गया है। अगर बड़े नामों में भी लापरवाही बरती जाती है, तो इसका असर पूरे सिस्टम पर पड़ता है। आम фан्स के लिए यह खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये दोनों खिलाड़ी भविष्य के चेहरे माने जाते हैं। यशस्वी घरेलू क्रिकेट से लेकर आईपीएल तक अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से सुर्खियां बटोर चुके हैं, वहीं शेफाली महिला क्रिकेट में आक्रामक ओपनिंग का नया मॉडल पेश कर रही हैं।
NADA के रजिस्टर्ड पूल में शामिल थे दोनों स्टार
रिपोर्ट के अनुसार, NADA के रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल (RTP) में शामिल इन दोनों खिलाड़ियों को साल भर पहले ही अपनी लोकेशन और उपलब्धता की जानकारी एडवांस में देनी होती है। इसे ‘व्हेयरअबाउट क्लॉज’ कहते हैं। अगर खिलाड़ी बताए गए स्थान पर नहीं मिलते, तो यह नियम का सीधा उल्लंघन माना जाता है।
दिसंबर में जब डोप कंट्रोल ऑफिसर यशस्वी के बताए स्थान पर पहुंचे, तो वे वहां मौजूद नहीं थे। इसी तरह नवंबर में शेफाली भी अपने ठिकाने पर नहीं मिलीं। इससे उनका टेस्ट नहीं हो सका। मामला यहीं नहीं रुका। NADA ने दोनों को नोटिस जारी करके 18 और 20 फरवरी तक जवाब देने को कहा, लेकिन दोनों खिलाड़ियों की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। अब एजेंसी ने ‘व्हेयरअबाउट फेलियर’ के तहत दोनों के खिलाफ ‘मिस टेस्ट’ दर्ज कर लिया है। NADA ने एक बार फिर 7 दिन के अंदर जवाब मांगा है और इसकी सूचना BCCI तथा ICC को भी दे दी गई है।
क्या है आगे का सिलसिला और संभावित परिणाम
अभी दोनों खिलाड़ियों पर कोई तत्काल कार्रवाई नहीं हुई है। नियमों के मुताबिक, RTP में शामिल खिलाड़ियों को 12 महीने के अंदर तीन मिस टेस्ट की छूट मिलती है। अगर तीनों मौके चूक जाते हैं, तो खिलाड़ी को NADA के सामने सफाई देनी पड़ती है। अगर सफाई संतोषजनक नहीं पाई गई, तो दो साल तक का प्रतिबंध लग सकता है।
यह घटना खिलाड़ियों, उनके प्रबंधन और बोर्ड के लिए चेतावनी की तरह है। व्यस्त शेड्यूल के बीच भी एंटी डोपिंग नियमों का पालन करना अनिवार्य है। BCCI और ICC दोनों ही WADA के दिशा-निर्देशों से बंधे हैं, इसलिए मामला गंभीरता से लिया जा रहा है।
क्रिकेट प्रेमियों के मन में स्वाभाविक रूप से सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये सिर्फ लापरवाही थी या कोई और वजह रही। फिलहाल दोनों खिलाड़ी आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स (यशस्वी) और अपनी-अपनी फ्रेंचाइजी के साथ जुड़े हुए हैं। उम्मीद है कि वे जल्द ही इस मामले का समाधान निकाल लेंगे और मैदान पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।
यह खबर हमें याद दिलाती है कि प्रतिभा के साथ अनुशासन भी उतना ही जरूरी है। बड़े मंच पर खेलने वाले खिलाड़ियों की हर गलती या चूक न सिर्फ उनके करियर, बल्कि पूरे भारतीय क्रिकेट की छवि को प्रभावित करती है। आम दर्शक चाहते हैं कि उनके पसंदीदा सितारे स्वच्छ और निष्पक्ष माहौल में खेलें, ताकि जीत का जश्न बिना किसी शक के मनाया जा सके।


