अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि को लेकर उठे विवाद ने अब नया कानूनी मोड़ ले लिया है। मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। याचिका में पूरे मामले की CBI जांच कराने और जांच प्रक्रिया को न्यायिक निगरानी में कराने की मांग की गई है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) पहले से ही राम मंदिर में कथित चढ़ावा गड़बड़ी के आरोपों की जांच कर रही है। हाल ही में एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी है, जबकि विस्तृत जांच अभी जारी है।
क्या है सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में मांग की गई है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे, नकद दान और कीमती धातुओं के प्रबंधन से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जांच को CBI को सौंपा जाना चाहिए और इसकी निगरानी अदालत करे।
याचिका में यह भी कहा गया है कि मंदिर में आने वाले दान और उसके उपयोग को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है, क्योंकि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था इससे जुड़ी हुई है।
पहले से जांच कर रही है SIT
राम मंदिर में कथित चढ़ावा गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था।
एसआईटी ने अयोध्या में कई दिनों तक दस्तावेजों की जांच, कर्मचारियों और संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद अपनी शुरुआती रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को सौंप दी है। बताया जा रहा है कि यह रिपोर्ट करीब 125 पन्नों की है और इसमें कुछ सिफारिशें भी शामिल हैं।
हालांकि जांच टीम ने रिपोर्ट की सामग्री सार्वजनिक नहीं की है और कहा है कि जांच अभी जारी है।
दान और चढ़ावे को लेकर क्यों उठा विवाद?
विवाद तब तेज हुआ जब कुछ पूर्व कर्मचारियों और कुछ दानदाताओं ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए कि मंदिर में दिए गए नकद चढ़ावे और कीमती धातुओं के रिकॉर्ड को लेकर गंभीर सवाल हैं। कुछ दानदाताओं ने यह भी दावा किया कि उन्हें दान की औपचारिक रसीद नहीं मिली।
हाल ही में एक उद्योगपति ने दावा किया था कि राम मंदिर निर्माण के लिए दी गई 200 किलोग्राम चांदी की ईंटों के बदले उन्हें कोई रसीद जारी नहीं की गई थी। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां इन पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर नजर
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि शीर्ष अदालत इस याचिका पर क्या रुख अपनाती है। यदि कोर्ट सुनवाई स्वीकार करता है, तो जांच की दिशा और दायरा दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
फिलहाल एसआईटी की जांच जारी है और सरकार का कहना है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। वहीं श्रद्धालुओं और दानदाताओं की सबसे बड़ी अपेक्षा यही है कि मामले में पूरी पारदर्शिता हो और सच्चाई सामने आए।


