ममता की TMC बिखर रही है! 101 पार्षदों ने दिए इस्तीफे, डायमंड हार्बर में भी बगावत

ममता की TMC बिखर रही है! 101 पार्षदों ने दिए इस्तीफे, डायमंड हार्बर में भी बगावत

पश्चिम बंगाल में हालिया विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) गंभीर संकट का सामना कर रही है। सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी अब जमीनी स्तर पर बिखरती नजर आ रही है। राज्य की विभिन्न नगरपालिकाओं से TMC के कुल 101 पार्षदों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप में 17 पार्षद व स्थानीय नेता गिरफ्तार भी हो चुके हैं।

यह घटनाक्रम आम बंगालवासियों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि स्थानीय निकायों में अस्थिरता सीधे विकास कार्यों, सफाई और नागरिक सुविधाओं पर असर डाल सकती है। सत्ता परिवर्तन के बाद TMC में अंदरूनी कलह, दलबदल और बगावत तेज हो गई है।

किन नगरपालिकाओं से कितने पार्षदों ने इस्तीफा दिया?

पार्टी के लिए सबसे ज्यादा झटका विभिन्न नगरपालिकाओं से आया है। जहां उत्तर बैरकपुर से 15, गारुलिया से 18, कोंटाई से 14, हालिसहार से 16 और भटपारा से 30 पार्षदों ने इस्तीफा दिया है। सबसे ज्यादा ध्यान डायमंड हार्बर नगरपालिका पर है, जहां से 8 पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया।

डायमंड हार्बर को TMC का मजबूत गढ़ माना जाता है। यह क्षेत्र ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के प्रभावशाली नेता अभिषेक बनर्जी का संसदीय क्षेत्र है। यहां की बगावत पार्टी के लिए बड़ा संकेत है। सत्ता गंवाने के बाद TMC अब बूथ स्तर और नगरपालिका स्तर पर लगातार कमजोर होती जा रही है।

ममता बनर्जी के सामने संगठन खड़ा करने की चुनौती

2011 में 34 साल के वामपंथी शासन को समाप्त कर सत्ता में आई ममता बनर्जी को 2026 के विधानसभा चुनाव में पहली बार बड़ी हार का सामना करना पड़ा। राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बन गई। अब ममता के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पार्टी को फिर से संगठित करना और जमीनी स्तर पर विश्वास बहाल करना है।

कुछ दिन पहले ममता ने पार्टी नेताओं की बैठक में साफ कहा था कि जिन्हें पार्टी छोड़नी है, वे जा सकते हैं। उन्हें किसी के जाने की चिंता नहीं है। वे अकेले दम पर पार्टी को फिर से खड़ा कर लेंगी। यह बयान पार्टी के मौजूदा संकट को दर्शाता है, जहां कई नेता या तो पार्टी छोड़ रहे हैं या पार्टी लाइन से अलग हो रहे हैं।

बंगाल की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?

TMC के इस संकट से पश्चिम बंगाल की स्थानीय राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। नगरपालिकाओं में इस्तीफों के बाद प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने की आशंका है। आम नागरिकों को चिंता है कि स्थानीय स्तर पर विकास कार्य रुक सकते हैं या नए सिरे से राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं।

ममता बनर्जी के लिए यह समय परीक्षा का है। 15 साल की सत्ता के बाद विपक्ष में बैठकर पार्टी को फिर से मजबूत करना आसान नहीं होगा। भ्रष्टाचार के आरोप और इस्तीफों की लहर ने पार्टी की छवि को भी नुकसान पहुंचाया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर TMC जल्दी से अपनी घरेलू कलह सुलझाने में सफल नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में और बड़े दलबदल देखने को मिल सकते हैं। बंगाल की जनता अब देखना चाहती है कि ममता अपनी पार्टी को कैसे संभालती हैं और विपक्ष में रहते हुए क्या रणनीति अपनाती हैं।