केरल विधानसभा चुनाव में मात्र तीन सीटें जीतने वाली भाजपा ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने सबको चौंका दिया है। पार्टी ने दो केंद्रीय मंत्रियों और बड़े चेहरों को दरकिनार करते हुए कम चर्चित विधायक बी.बी. गोपाकुमार को अपना विधायी दल नेता चुना है। यह फैसला उन लाखों राजनीतिक पर्यवेक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है जो केरल में भाजपा के भविष्य को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
यह घटनाक्रम आम पाठक को बताता है कि पार्टी अब स्थानीय स्तर पर उभरे कार्यकर्ताओं को मौका दे रही है, जो लंबे समय तक जमीनी संघर्ष करने वालों के लिए प्रोत्साहन का विषय बन सकता है।
गोपाकुमार का चयन और दिग्गजों का किनारा
विधानसभा चुनाव परिणाम आने के करीब चार हफ्ते बाद, बुधवार को भाजपा ने यह ऐलान किया। गोपाकुमार को विधायी दल का नेता बनाया गया, जबकि राजीव चंद्रशेखर (प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री) और वी. मुरलीधरन (पूर्व केंद्रीय मंत्री) जैसे अनुभवी नेता मौजूद थे।
गोपाकुमार ने खुद कहा कि यह फैसला उन्हें भी चौंका गया। राजीव चंद्रशेखर ने जब उन्हें सूचित किया तब उन्हें विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अब वे केरल में भाजपा की मजबूत आवाज बनेंगे। यह उनके लिए बड़े सम्मान की बात है। विधानसभा का सत्र शुक्रवार को शुरू होने वाला है, ठीक दो दिन पहले यह फैसला लिया गया।
चथन्नूर से ‘डार्क हॉर्स’ की जीत
बी.बी. गोपाकुमार लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के गढ़ चथन्नूर सीट से विजयी हुए हैं। यह सीट 2006 से लगातार CPI के पास रही थी। गोपाकुमार स्कूल के रिटायर्ड हेडमास्टर हैं और स्थानीय एझवा समुदाय में पहचाने जाते हैं। वे करीब एक दशक पहले ‘मिस्ड-कॉल’ सदस्यता अभियान के जरिए भाजपा में शामिल हुए थे।
पिछले चुनावों में उन्होंने लगातार मेहनत की। 2016 में उन्हें 24.92 प्रतिशत वोट मिले थे। 2021 में वोट शेयर बढ़कर 30.61 प्रतिशत हो गया। 2026 में उन्होंने CPI उम्मीदवार को हराकर 38.54 प्रतिशत वोट हासिल किए। RSS के साथ जमीनी काम ने उन्हें यह अप्रत्याशित जीत दिलाई।
गोपाकुमार का मॉडल और केरल में भाजपा की उम्मीद
गोपाकुमार ने कहा कि चथन्नूर मॉडल को अन्य सीटों पर दोहराया जा सकता है जहां भाजपा को विधानसभा और लोकसभा दोनों में संभावना दिखती है। उन्होंने स्पीकर पद के लिए भी पार्टी की ओर से चुनाव लड़ा था।
यह फैसला भाजपा की रणनीति को दर्शाता है। पार्टी दिग्गजों के बजाय स्थानीय संघर्ष करने वाले कार्यकर्ता को आगे लाकर नया संदेश दे रही है। आम नागरिकों के लिए यह दिखाता है कि राजनीति में जमीनी काम का महत्व अभी भी बना हुआ है।
केरल की राजनीति में भाजपा की यह कोशिश आने वाले दिनों में उसके विस्तार को नई दिशा दे सकती है। गोपाकुमार जैसे चेहरों की सफलता युवा कार्यकर्ताओं को प्रेरित करेगी। अब देखना होगा कि विधानसभा सत्र में वे इस जिम्मेदारी को कैसे निभाते हैं और पार्टी को केरल में और मजबूती देते हैं।


