हिमाचल प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव से पहले BJP ने शानदार प्रदर्शन किया है। चार नगर निगमों में से तीन पर बीजेपी ने कब्जा कर लिया है। यह नतीजा 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए BJP के हौसले को और मजबूत कर रहा है, जबकि सत्ता में रहते हुए कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा सबक बन गया है।
साल 2022 में सत्ता संभालने के बाद कांग्रेस के लिए यह पहला बड़ा शहरी चुनाव था, जहां उसे भारी नुकसान हुआ। आम लोगों के लिए ये नतीजे इसलिए अहम हैं क्योंकि स्थानीय निकाय चुनाव शहरों की साफ-सफाई, पानी, बिजली और रोजमर्रा की सुविधाओं से सीधे जुड़े होते हैं। इन नतीजों से साफ है कि जनता सरकार के कामकाज से कितनी संतुष्ट है।
तीन नगर निगम BJP के कब्जे में, कांग्रेस सिर्फ पालमपुर में बची
बीजेपी ने धर्मशाला, मंडी और सोलन नगर निगम पर शानदार जीत दर्ज की। सोलन में 17 में से 10 वार्ड, मंडी में 14 में से 12 वार्ड और धर्मशाला में 17 में से 11 वार्ड बीजेपी के खाते में गए। पालमपुर में कांग्रेस 15 में से 11 वार्ड जीतकर अपनी इज्जत बचा पाई।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हार स्वीकार की। उन्होंने कहा कि सोलन में पांच विधायकों के बावजूद एक भी सीट न जीत पाना उनकी गलती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी इस हार की समीक्षा करेगी और कमियों को दूर करेगी।
जिला परिषद चुनाव में भी BJP का दबदबा
बीजेपी ने सिर्फ नगर निगमों तक सीमित नहीं रहते हुए जिला परिषद चुनावों में भी भारी जीत का दावा किया है। पार्टी के अनुसार कुल 251 सीटों में से 190 से ज्यादा सीटें उसके खाते में आई हैं।
कांग्रेस की ओर से कहा जा रहा है कि पूरे 53 शहरी स्थानीय निकायों को देखें तो उनका प्रदर्शन बेहतर रहा। कांग्रेस ने 29 निकायों पर कब्जा किया, जबकि बीजेपी 21 पर। लेकिन जहां दोनों दलों के बीच सीधी लड़ाई हुई, वहां जनता ने BJP को पसंद किया।
2027 चुनाव से पहले कांग्रेस को सुधरने की चुनौती
ये नतीजे कांग्रेस के लिए चेतावनी की तरह हैं। पार्टी को अब जमीनी स्तर पर अपनी संगठनात्मक ताकत बढ़ानी होगी। शहरों में कांग्रेस की पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही है।
बीजेपी का कहना है कि ये नतीजे मुख्यमंत्री सुक्खू की सरकार के खिलाफ जनता की नाराजगी का सबूत हैं। वहीं कांग्रेस का तर्क है कि कुल संख्या में वह आगे है।
17 मई को नगर निगम चुनाव और 26, 28, 30 मई को अन्य स्थानीय निकायों के चुनाव हुए थे। अब सारी नजरें 2027 के विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं। इन स्थानीय नतीजों का असर आगामी बड़े चुनाव पर जरूर पड़ेगा।
हिमाचल के मतदाता उम्मीद कर रहे हैं कि दोनों पार्टियां इन नतीजों से सबक लेकर बेहतर विकास और सुशासन पर ध्यान देंगी। अभी तो कांग्रेस को अपनी रणनीति बदलने और कमजोरियों को दूर करने की जरूरत है, जबकि BJP का आत्मविश्वास बढ़ गया है।


