उत्तर प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले वर्षों में प्रदेश के हर शहर और गांव को ग्रीन मोबिलिटी नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर काम किया जाएगा। इसी कड़ी में शुक्रवार को उन्होंने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) के लिए 45 इलेक्ट्रिक बसों और 3 हाइड्रोजन बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का भी उद्घाटन किया गया। सरकार का लक्ष्य लोगों को बेहतर, सस्ती, आरामदायक और प्रदूषण मुक्त सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है।
जेवर एयरपोर्ट से शुरू हुई नई ग्रीन मोबिलिटी
लखनऊ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 15 जून से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन शुरू होने जा रहा है। ऐसे में यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन बसों का संचालन शुरू किया गया है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल 45 इलेक्ट्रिक बसें और 3 हाइड्रोजन बसें सेवा में उतारी गई हैं। आने वाले दिनों में इनकी संख्या तेजी से बढ़ाई जाएगी ताकि एयरपोर्ट तक पहुंचना आसान और पर्यावरण के अनुकूल बन सके।
हर शहर और गांव तक पहुंचेगी ग्रीन ट्रांसपोर्ट सेवा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। भविष्य में प्रदेश के हर शहर और गांव को आधुनिक, स्वच्छ और हरित परिवहन व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण अनुकूल बनाना समय की जरूरत है। इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन आधारित परिवहन न केवल प्रदूषण कम करेगा बल्कि ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा बन रहे औद्योगिक शक्ति केंद्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र आज देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल हैं। आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर उद्योगों के बड़े निवेश यहां आ रहे हैं।
ऐसे में इन क्षेत्रों को विश्वस्तरीय परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जहां मेट्रो सेवाएं उपलब्ध हैं, वहां भी लास्ट माइल कनेक्टिविटी एक चुनौती बनी रहती है। इलेक्ट्रिक बसें इस समस्या का समाधान करेंगी और लोगों की यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाएंगी।
सरकार की योजना के अनुसार 15 जून तक तीनों प्राधिकरण क्षेत्रों में 110 इलेक्ट्रिक बसें संचालित होने लगेंगी। भविष्य में मांग के अनुसार इनकी संख्या बढ़ाकर 500 तक करने का लक्ष्य रखा गया है।
यूपी बना देश का एयर कनेक्टिविटी हब
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बढ़ती एयर कनेक्टिविटी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश देश का ऐसा राज्य बन चुका है जहां सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं।
उन्होंने बताया कि लखनऊ, वाराणसी, कुशीनगर, अयोध्या और नोएडा समेत प्रदेश में अब 5 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं। जेवर एयरपोर्ट केवल यात्री सेवा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में कार्गो और एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) हब के रूप में भी विकसित होगा।
इलेक्ट्रिक बसों का तेजी से बढ़ रहा नेटवर्क
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 17 नगर निगमों में पहले से 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं। इसके अलावा प्रदेश के 7 शहरों में मेट्रो सेवा भी चल रही है, जो देश में सबसे अधिक है।
उन्होंने कहा कि पहले इलेक्ट्रिक बसों के लिए दूसरे राज्यों या देशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब लखनऊ में टाटा मोटर्स और अशोक लीलैंड समूह के इलेक्ट्रिक बस निर्माण संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। इससे प्रदेश में ही आधुनिक सार्वजनिक परिवहन वाहनों का निर्माण संभव हो रहा है।
सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन आधारित परिवहन व्यवस्था न केवल प्रदूषण कम करेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को भविष्य की ग्रीन इकोनॉमी के लिए भी तैयार करेगी।




