न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जजों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की खुलकर सराहना की है। रिटायर्ड जस्टिस गौतम एस. पटेल के परिवार को विदेश में मिली धमकियों और उनकी बेटी पर कथित हमले के बाद जिस तेजी से CJI सूर्यकांत ने हस्तक्षेप किया, उसे अदालत ने न्यायपालिका के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया है।
सोमवार को इस मामले से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि देश खुद को भाग्यशाली मान सकता है कि उसके पास ऐसा मुख्य न्यायाधीश है, जो न्यायिक परिवार की सुरक्षा और सम्मान के मुद्दों पर व्यक्तिगत स्तर पर पहल करता है।
UK में हमले की सूचना मिली तो तुरंत हरकत में आए CJI
मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आर.वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ ने की। अदालत के समक्ष रखी गई जानकारी के अनुसार, हाल ही में यूनाइटेड किंगडम दौरे के दौरान CJI सूर्यकांत को बताया गया कि रिटायर्ड जस्टिस गौतम पटेल के परिवार को धमकियां मिल रही हैं और उनकी बेटी पर हमला भी हुआ है।
सूचना मिलते ही CJI ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने अपने कार्यक्रम से समय निकालकर लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा।
बताया गया कि उनके हस्तक्षेप के बाद जस्टिस पटेल की बेटी और अन्य परिवारजनों को सुरक्षा उपलब्ध कराई गई।
हाईकोर्ट ने कहा- ऐसा नेतृत्व मिलना सौभाग्य की बात
सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने CJI सूर्यकांत की भूमिका की विशेष प्रशंसा की। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह असाधारण बात है कि देश के मुख्य न्यायाधीश ने स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप किया और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीधे उच्चायुक्त से बात की।
खंडपीठ ने कहा कि न्यायपालिका का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति के हाथों में होना सौभाग्य की बात है, जो संवेदनशील मामलों में सक्रिय भूमिका निभाने से पीछे नहीं हटता।
अदालत की यह टिप्पणी न्यायिक हलकों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार विवाद से जुड़ा है मामला
धमकियों और हमले की यह पूरी घटना कथित तौर पर दाऊदी बोहरा समुदाय के उत्तराधिकार विवाद से जुड़ी हुई बताई जा रही है। रिटायर्ड जस्टिस गौतम पटेल ने अप्रैल 2024 में इस महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाया था।
इसी फैसले के बाद उनके परिवार को निशाना बनाए जाने के आरोप सामने आए। मामले को गंभीर मानते हुए मुंबई की प्रमुख बार संस्थाओं—बॉम्बे बार एसोसिएशन, एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया और बॉम्बे इनकॉरपोरेटेड लॉ सोसायटी—ने संयुक्त रूप से जनहित याचिका दायर की।
याचिका में जस्टिस पटेल और उनके परिवार की सुरक्षा बढ़ाने तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
जस्टिस पटेल को 24 घंटे सुरक्षा देने का आदेश
हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और पुलिस प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जस्टिस गौतम पटेल को चौबीसों घंटे सुरक्षा प्रदान की जाए। अदालत ने कहा कि उनके मुंबई स्थित आवास पर भी लगातार सुरक्षा व्यवस्था बनी रहनी चाहिए, भले ही वह उस समय घर पर मौजूद न हों।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जब भी जस्टिस पटेल या उनके परिवार का कोई सदस्य घर से बाहर निकले, तो उनके साथ सुरक्षा कर्मी मौजूद होना चाहिए।
साथ ही मुंबई पुलिस आयुक्त को जांच की व्यक्तिगत निगरानी करने की सलाह दी गई है ताकि मामले की गंभीरता के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर बड़ा सवाल
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि किसी जज को उसके न्यायिक फैसले के कारण धमकाना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है।
अदालत ने भी इस चिंता को गंभीर माना और संकेत दिया कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और गरिमा से जुड़े मामलों में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और हाईकोर्ट पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।



