उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का तापमान बढ़ गया है। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को लेकर चल रही टूट की अटकलों के बीच अब समाजवादी पार्टी भी राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गई है। इसकी वजह बना है उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर का एक बड़ा दावा।
राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होने वाली है। उन्होंने दावा किया कि सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र सौंपा है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि कथित पत्र में क्या लिखा है और न ही इसके समर्थन में कोई दस्तावेज सार्वजनिक किया। ऐसे में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
एक पोस्ट से बढ़ी सियासी हलचल
बुधवार सुबह किए गए अपने पोस्ट में ओपी राजभर ने सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी की आंतरिक स्थिति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने लिखा कि सपा में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है और पार्टी के भीतर बेचैनी बढ़ रही है।
राजभर ने अपने बयान में खनन घोटाले और गोमती रिवर फ्रंट परियोजना का भी जिक्र किया। उनका दावा था कि इन मामलों को लेकर जांच एजेंसियों का दबाव बढ़ रहा है और इसी वजह से विपक्षी दलों में असहजता दिखाई दे रही है।
हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई नया तथ्य या दस्तावेज पेश नहीं किया। यही वजह है कि उनका बयान राजनीतिक दावा अधिक और स्थापित तथ्य कम माना जा रहा है।
अखिलेश यादव पर लगातार हमलावर हैं राजभर
हाल के महीनों में ओम प्रकाश राजभर लगातार समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव पर हमलावर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में प्रयागराज ट्रिपल मर्डर केस को लेकर भी सपा पर निशाना साधा था।
राजभर ने अपराध के कुछ आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों की भूमिका कई मामलों में सामने आती रही है। इसी क्रम में उन्होंने प्रयागराज में हुई चर्चित हत्या की घटना का उल्लेख करते हुए सपा नेतृत्व को घेरने की कोशिश की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ प्रदेश में आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति और तेज होने वाली है।
सपा ने किया पलटवार
ओपी राजभर के बयान पर समाजवादी पार्टी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधान परिषद सदस्य सुनील सिंह साजन ने राजभर के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा कि राजभर समय-समय पर ऐसे बयान देते रहते हैं, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं होता। साजन ने कहा कि जनता अब ऐसे बयानों को गंभीरता से नहीं लेती।
उन्होंने दावा किया कि पिछली बार पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के जरिए भाजपा को राजनीतिक नुकसान हुआ था और आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी और मजबूत होकर उभरेगी।
2027 से पहले तेज हो रही राजनीतिक जंग
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय सभी प्रमुख दल चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। भाजपा सत्ता बरकरार रखने की रणनीति पर काम कर रही है, जबकि समाजवादी पार्टी खुद को मुख्य विपक्ष के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है।
ऐसे माहौल में दल-बदल, टूट और गठबंधन से जुड़ी चर्चाएं लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। फिलहाल ओपी राजभर के दावों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस जरूर छेड़ दी है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि समाजवादी पार्टी या रामगोपाल यादव की ओर से इस दावे पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया आती है या नहीं।



