अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच के बीच अब एक नया और गंभीर दावा सामने आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व इंजीनियर होने का दावा करने वाले दीनानाथ वर्मा ने ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा पर निर्माण कार्यों में कथित तौर पर 40 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगाया है। इन आरोपों के बाद जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने दीनानाथ वर्मा से उनके दावों के समर्थन में ठोस साक्ष्य मांगे हैं।
राम मंदिर से जुड़े इस मामले पर पहले से राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। ऐसे में नए आरोपों ने जांच को और संवेदनशील बना दिया है। हालांकि अभी तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और SIT तथ्यों की जांच में जुटी हुई है।
SIT ने कहा- आरोप हैं तो सबूत भी दीजिए
दीनानाथ वर्मा का दावा है कि उन्हें शुक्रवार शाम SIT की ओर से संपर्क किया गया। उनके मुताबिक, जांच टीम से जुड़े एक अधिकारी के कार्यालय से फोन आया और उनसे कहा गया कि यदि उनके पास आरोपों से जुड़े कोई दस्तावेज, रिकॉर्डिंग या अन्य साक्ष्य हैं तो वे जांच दल के सामने पेश करें।
वर्मा का कहना है कि वह SIT के समक्ष उपस्थित होने को तैयार हैं, लेकिन उन्होंने सुरक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है तो वे जांच अधिकारियों के सामने पूरी जानकारी साझा करेंगे।
सोशल मीडिया इंटरव्यू में लगाए गंभीर आरोप
हाल ही में सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो इंटरव्यू में दीनानाथ वर्मा ने कई सनसनीखेज दावे किए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण से जुड़े कुछ कार्यों में लागत और बिलिंग के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता था।
वर्मा के अनुसार, जब उन्होंने कथित तौर पर इस बारे में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से शिकायत की, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि बाद में उन्हें निर्माण कार्य से हटाकर दूसरी जिम्मेदारी दे दी गई और अंततः सेवा से अलग कर दिया गया।
हालांकि ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
40% कमीशन का दावा, जांच का दायरा बढ़ा
पूर्व इंजीनियर ने आरोप लगाया कि कुछ सप्लाई और निर्माण कार्यों में कथित रूप से 40 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था। उन्होंने दावा किया कि एक ठेकेदार ने उनसे बातचीत में यह बात कही थी। वर्मा का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कुछ रिकॉर्डिंग भी संबंधित लोगों को सुनाई थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण सामग्री के उपयोग और बिलों के बीच अंतर दिखाई देता था। हालांकि इन सभी दावों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही SIT ने इन्हें सत्य माना है।
यही वजह है कि जांच एजेंसी अब आरोपों के समर्थन में दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य जुटाने पर जोर दे रही है।
पहले भी उठ चुके हैं वित्तीय अनियमितताओं के सवाल
राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर पिछले कुछ दिनों में कई आरोप सामने आए हैं। इससे पहले पूर्व लेखाकार महिपाल सिंह ने भी वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े आरोप लगाए थे। इन दावों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT जांच कर रही है और ट्रस्ट से जुड़े कई अधिकारियों एवं कर्मचारियों से पूछताछ भी की जा चुकी है।
जांच एजेंसियां फिलहाल आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान कर रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में SIT की रिपोर्ट इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है।
फिलहाल यह स्पष्ट करना जरूरी है कि दीनानाथ वर्मा द्वारा लगाए गए आरोप जांच के दायरे में हैं और उनकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। अंतिम निष्कर्ष SIT की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।



