लखनऊ को मिलेगी 50 करोड़ की बिजली सौगात! बनेंगे 7 नए उपकेंद्र, 100 नए फीडरों से खत्म होगी ओवरलोडिंग

लखनऊ को मिलेगी 50 करोड़ की बिजली सौगात! बनेंगे 7 नए उपकेंद्र, 100 नए फीडरों से खत्म होगी ओवरलोडिंग

लखनऊ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। राजधानी में लगातार बढ़ती बिजली मांग और ओवरलोडिंग की समस्या को देखते हुए बिजली विभाग ने करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से बड़े स्तर पर बिजली ढांचे को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस परियोजना के तहत 7 नए बिजली उपकेंद्र, एक नया पावर ट्रांसमिशन सबस्टेशन और 100 नए फीडरों का निर्माण किया जाएगा।

इस योजना के पूरा होने के बाद शहर के कई इलाकों में लो-वोल्टेज, बार-बार बिजली ट्रिप होने और ओवरलोडिंग जैसी समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही आने वाले वर्षों की बढ़ती बिजली जरूरतों को भी ध्यान में रखकर यह निवेश किया जा रहा है।

बढ़ती मांग के बीच बिजली नेटवर्क होगा मजबूत

लखनऊ तेजी से विस्तार कर रहा है। नए आवासीय क्षेत्रों, अपार्टमेंट्स, व्यावसायिक परिसरों और औद्योगिक गतिविधियों के कारण बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मौजूदा बिजली ढांचे पर दबाव भी बढ़ता जा रहा है।

बिजली विभाग का मानना है कि नए उपकेंद्र और ट्रांसमिशन सबस्टेशन बनने से विभिन्न क्षेत्रों में लोड का बेहतर वितरण हो सकेगा। इससे बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनेगी।

100 नए फीडरों से उपभोक्ताओं को सीधा फायदा

परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 100 नए फीडरों का निर्माण है। वर्तमान में कई फीडरों पर जरूरत से ज्यादा लोड है, जिससे तकनीकी खराबियां और कटौती की समस्या सामने आती रहती है।

नए फीडर शुरू होने के बाद लोड का बंटवारा बेहतर होगा। इससे फॉल्ट की संख्या कम होगी और बिजली आपूर्ति में सुधार आएगा। उपभोक्ताओं को कम ट्रिपिंग और बेहतर वोल्टेज मिलने की संभावना है।

नए उपकेंद्रों से तेजी से मिलेगा कनेक्शन

7 नए उपकेंद्र बनने के बाद नए बिजली कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया भी आसान होगी। तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में बिजली आपूर्ति की क्षमता बढ़ेगी और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

बिजली विभाग का लक्ष्य है कि राजधानी के किसी भी क्षेत्र में मांग बढ़ने के कारण आपूर्ति प्रभावित न हो।

आने वाले वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयारी

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि लखनऊ में आबादी और शहरीकरण की रफ्तार को देखते हुए बिजली ढांचे का विस्तार बेहद जरूरी है। यही वजह है कि विभाग केवल वर्तमान समस्याओं के समाधान पर नहीं, बल्कि भविष्य की मांग को भी ध्यान में रखकर निवेश कर रहा है।

परियोजना पूरी होने के बाद राजधानी की बिजली व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक मजबूत, आधुनिक और उपभोक्ता-केंद्रित होने की उम्मीद है।