उत्तर प्रदेश भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी घोषित होने के बाद पार्टी के भीतर ही इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं। मिशन 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए गठित नई टीम को लेकर संगठन में चर्चा है कि घोषित मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। कई नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई टीम में ऐसे चेहरों को जगह मिली है, जिनका संगठनात्मक या चुनावी प्रभाव सीमित माना जाता है, जबकि कुछ पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका नहीं मिला।
सबसे अधिक चर्चा उन विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) को लेकर हो रही है, जिन्हें दोबारा प्रदेश संगठन में जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी के अंदर यह सवाल उठ रहा है कि जब पहले यह तय किया गया था कि सांसद, विधायक और विधान परिषद सदस्य बनने वाले नेताओं को संगठनात्मक पदों से मुक्त कर नई जिम्मेदारियां दी जाएंगी, तो फिर चार एमएलसी—सत्यपाल सैनी, मोहित बेनीवाल, डॉ. धर्मेंद्र सिंह और विजय शिवहरे—को दोबारा प्रदेश टीम में किस आधार पर शामिल किया गया।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश संगठन के गठन से पहले कई महीनों तक लखनऊ और दिल्ली में लगातार बैठकें हुई थीं। इन बैठकों में संगठन के विस्तार के लिए कुछ मानक तय किए गए थे, जिनमें सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने और जनप्रतिनिधियों को संगठनात्मक पदों से अलग रखने की चर्चा भी शामिल थी। हालांकि नई सूची जारी होने के बाद इन मानकों के अनुपालन को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि कुछ नेताओं को वरिष्ठ नेताओं की सिफारिश और करीबी होने का लाभ मिला। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में भी बहस छिड़ी हुई है। कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि चयन अंततः सिफारिश के आधार पर ही होना था, तो फिर लंबे समय तक मानक तय करने और व्यापक विचार-विमर्श की प्रक्रिया का क्या औचित्य था।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठन में बदलाव तो किया है, लेकिन नई टीम में ऐसे प्रभावशाली चेहरे कम दिखाई दे रहे हैं, जो चुनावी स्तर पर बड़ा असर छोड़ सकें। उनका मानना है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय के साथ-साथ क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन भी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा होता है।
हालांकि भाजपा की ओर से नई प्रदेश टीम को लेकर किसी प्रकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि संगठनात्मक नियुक्तियां पूरी तरह आंतरिक प्रक्रिया के तहत की जाती हैं और सभी निर्णय संगठन की आवश्यकताओं तथा भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।
नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा मिशन 2027 की तैयारियों को किस तरह आगे बढ़ाती है और संगठन के भीतर उठ रहे सवालों का जवाब राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर कैसे दिया जाता है।



