उत्तर प्रदेश सरकार गांवों की सड़कों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। केशव प्रसाद मौर्य ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत कार्बन क्रेडिट आधारित सड़कों के निर्माण का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य सड़क निर्माण के दौरान कार्बन उत्सर्जन कम करना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
ग्राम्य विकास विभाग के माध्यम से संचालित प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण कराया जाता है। सरकार का मानना है कि पारंपरिक निर्माण सामग्री के स्थान पर पर्यावरण अनुकूल तकनीकों और सामग्रियों के उपयोग से प्रदूषण कम होगा और वायु गुणवत्ता में सुधार आएगा।
कार्बन क्रेडिट आधारित सड़कों के निर्माण में बायो-डामर, फ्लाई ऐश, पुनर्चक्रित (रीसाइकल) डामर और गिट्टी जैसी सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। बायो-डामर में पेट्रोलियम आधारित बिटुमेन की जगह वनस्पति आधारित सामग्री का इस्तेमाल होता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है। वहीं थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश और पुरानी सड़कों की सामग्री के पुनः उपयोग से प्राकृतिक संसाधनों की बचत के साथ निर्माण लागत भी घटती है। प्लास्टिक वेस्ट का उपयोग भी सड़क निर्माण में किया जा सकता है।
प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (FDR) तकनीक का उपयोग पहले से किया जा रहा है। इस तकनीक में पुरानी सड़क की सामग्री को दोबारा इस्तेमाल कर नई सड़क तैयार की जाती है, जिससे सड़क अधिक टिकाऊ बनती है और पर्यावरण पर प्रभाव भी कम पड़ता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एफडीआर तकनीक से अब तक प्रदेश में 8,000 किलोमीटर से अधिक सड़कें बनाई जा चुकी हैं, जिससे लगभग 4,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है। अब सरकार इसी दिशा में कार्बन क्रेडिट आधारित सड़क निर्माण को भी बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है।
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