अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच में नए खुलासे सामने आए हैं। एसआईटी (SIT) की जांच और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर दावा किया गया है कि यह चोरी किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित गिरोह द्वारा अंजाम दी जा रही थी। जांच में सामने आया है कि ड्यूटी पर जाने से पहले आरोपियों के बीच जिम्मेदारियां तय होती थीं और चोरी की पूरी रणनीति पहले से बनाई जाती थी।
सूत्रों के अनुसार, हर सुबह फोन पर यह तय किया जाता था कि कौन चढ़ावे से नोट निकालेगा, कौन कैमरे के सामने खड़ा होकर दृश्य को ढकेगा और कौन अन्य गतिविधियों पर नजर रखेगा। आरोप है कि पूरी वारदात को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया जाता था।
CCTV फुटेज से मिले अहम सुराग
जांच एजेंसियों के मुताबिक, बरामद CCTV फुटेज में कई बार आरोपी अविनाश शुक्ला और मनीष चढ़ावे के नोटों को सीधा कर कपड़ों में छिपाते दिखाई दिए हैं। वहीं अन्य आरोपी कथित तौर पर कैमरे के सामने खड़े होकर उनकी गतिविधियों को छिपाने की कोशिश करते नजर आए।
एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 40 दिनों में 70 बार चोरी किए जाने के संकेत मिले हैं। इनमें सबसे अधिक बार अविनाश शुक्ला और मनीष की गतिविधियां कैमरों में दर्ज होने का दावा किया गया है।
बराबर बांटे जाते थे चोरी के पैसे
पूछताछ में यह भी सामने आया कि चोरी की गई रकम गिरोह के सदस्यों के बीच बराबर बांटी जाती थी। हालांकि, कुछ मामलों में मुख्य भूमिका निभाने वाले आरोपी अविनाश शुक्ला के पास अपेक्षाकृत बड़ा हिस्सा रहने की बात भी जांच में सामने आई है।
CCTV फुटेज डिलीट होने पर भी सवाल
जांच के दौरान कुछ CCTV फुटेज के डिलीट होने का मामला भी सामने आया है। पुलिस को आशंका है कि आरोपियों की CCTV कंट्रोल रूम तक पहुंच हो सकती थी। इसी कड़ी में सुभाष श्रीवास्तव और टिन्नू यादव की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि चोरी की घटनाओं की उन्हें जानकारी थी या नहीं और इस कथित संगठित अपराध में उनकी क्या भूमिका रही।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी आरोपों की पुष्टि के लिए साक्ष्य जुटा रही है।



