सादगी की मिसाल थे सपा विधायक आलम बदी आजमी, रिटायरमेंट के बाद राजनीति में आए और 5 बार बने विधायक

सादगी की मिसाल थे सपा विधायक आलम बदी आजमी, रिटायरमेंट के बाद राजनीति में आए और 5 बार बने विधायक

समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और निजामाबाद (आजमगढ़) से पांच बार विधायक रहे आलम बदी आजमी का गुरुवार सुबह निधन हो गया। 95 वर्षीय आलम बदी आजमी उत्तर प्रदेश के सबसे वरिष्ठ विधायकों में शामिल थे। पेशे से इंजीनियर रहे आलम बदी ने सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में कदम रखा और अपनी सादगी, ईमानदारी तथा जनसंपर्क की शैली के कारण अलग पहचान बनाई। विधायक बनने के बाद भी उनका जीवन बेहद साधारण रहा और वे अक्सर रोडवेज बस तथा स्कूटी से सफर करते थे।

रिटायरमेंट के बाद शुरू हुआ राजनीतिक सफर

आलम बदी आजमी का जन्म 16 मार्च 1936 को आजमगढ़ में हुआ था। उन्होंने सिंचाई विभाग में इंजीनियर के रूप में लंबी सेवा दी। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थामा।

करीब 60 वर्ष की उम्र में उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने उन्हें निजामाबाद सीट से उम्मीदवार बनाया और उन्होंने पहली ही बार में जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पारी की सफल शुरुआत की।

पांच बार बने विधायक

आलम बदी आजमी ने 1996 और 2002 में लगातार जीत हासिल की। वर्ष 2007 में उन्हें बहुजन समाज पार्टी (BSP) के उम्मीदवार अंगद यादव से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि इसके बाद उन्होंने जोरदार वापसी करते हुए 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव जीते। इस तरह वह कुल पांच बार विधायक चुने गए और पूर्वांचल की राजनीति में मजबूत पहचान बनाई।

गोरखपुर से जुड़ा रहा गहरा नाता

हालांकि उनका जन्म आजमगढ़ में हुआ था, लेकिन उनकी शुरुआती शिक्षा गोरखपुर में हुई। उनके पिता वदीउज्जमा आजमी गोरखपुर के इस्लामिया इंटर कॉलेज में गेम्स टीचर थे। आलम बदी ने इसी विद्यालय से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया और सिंचाई विभाग में नौकरी शुरू की। इसी वर्ष अप्रैल में वह अपने स्कूल पहुंचे, जहां उन्हें वर्षों पहले की हाईस्कूल परीक्षा का प्रमाणपत्र औपचारिक रूप से प्रदान किया गया। यह प्रमाणपत्र उन्हें परीक्षा पास करने के कई दशक बाद मिला।

सादगी ही बनी पहचान

आलम बदी आजमी अपनी सादगी के लिए राजनीतिक गलियारों में विशेष रूप से जाने जाते थे। विधायक बनने के बाद भी उन्होंने वीआईपी संस्कृति से दूरी बनाए रखी। बताया जाता है कि वे अक्सर रोडवेज बस से सफर करते थे और लखनऊ में विधानसभा आने-जाने के लिए स्कूटी का इस्तेमाल करते थे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने सुरक्षा घेरे या बड़े काफिलों की बजाय आम लोगों की तरह जीवन जीना पसंद किया। यही वजह थी कि उनकी पहचान एक सादगीपूर्ण और सहज जनप्रतिनिधि के रूप में बनी।

कम खर्च में चुनाव जीतने वाले नेताओं में रहे शामिल

आलम बदी आजमी चुनावी राजनीति में भी अपनी सादगी के लिए चर्चित रहे। उनके बारे में कहा जाता है कि वे सीमित संसाधनों के साथ चुनाव प्रचार करते थे और अपेक्षाकृत कम खर्च में चुनाव लड़ते थे। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध चुनावी हलफनामों के अनुसार, उनके पास चल और अचल संपत्तियों सहित अपेक्षाकृत सीमित संपत्ति थी। राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बावजूद उन्होंने सादगीपूर्ण जीवनशैली बनाए रखी। उनके निधन से समाजवादी पार्टी और उत्तर प्रदेश की राजनीति ने एक ऐसे नेता को खो दिया, जिन्हें ईमानदारी, सादगी और जनसेवा के लिए याद किया जाएगा।