दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर प्रदर्शनकारियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन और धातु वाले प्रोजेक्टाइल के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई है।
याचिका पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद के साथ प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी ने वकील वृंदा ग्रोवर के माध्यम से दाखिल की है। दोनों याचिकाकर्ताओं का दावा है कि वे 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन की फायरिंग में घायल हुए थे।
घायलों के लिए मुआवजा और इलाज की मांग
याचिका में कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि 20 जुलाई की घटना में घायल सभी लोगों को उचित मुआवजा, मुफ्त इलाज, चिकित्सा सुविधाएं और पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पैलेट लगने से कई लोगों को गंभीर चोटें आईं और उन्हें लंबे समय तक इलाज की जरूरत पड़ सकती है।
बिना चेतावनी फायरिंग का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान RAF ने अचानक पंप-एक्शन गन से फायरिंग की, जिससे धातु के छोटे-छोटे पैलेट भीड़ में फैल गए और कई लोगों के शरीर में धंस गए। इसके चलते प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आईं।
BNSS का भी दिया गया हवाला
याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 148 का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी भीड़ को तितर-बितर करने से पहले स्पष्ट चेतावनी देना और शांतिपूर्वक हटने का मौका देना अनिवार्य है। यदि भीड़ नहीं हटती, तब भी पहले कम घातक और वैकल्पिक उपाय अपनाए जाने चाहिए।
घटना को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद
20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ प्रदर्शन के दौरान पुलिस और RAF की कार्रवाई को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस जारी है। विपक्षी दलों ने पैलेट गन के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका के बाद मामला कानूनी स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई की तारीख तय होना बाकी है।



