सड़क हादसे के बाद इलाज के पैसों की टेंशन खत्म! PM-RAHAT योजना से ₹10 करोड़ से ज्यादा के क्लेम का भुगतान

सड़क हादसे के बाद इलाज के पैसों की टेंशन खत्म! PM-RAHAT योजना से ₹10 करोड़ से ज्यादा के क्लेम का भुगतान

सड़क दुर्घटना के बाद सबसे बड़ी चुनौती अक्सर घायल व्यक्ति का इलाज नहीं, बल्कि इलाज शुरू करने के लिए तुरंत पैसों का इंतजाम करना होता है। कई बार इसी देरी की वजह से मरीज की हालत और गंभीर हो जाती है। ऐसी स्थिति से लोगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने PM-RAHAT (Road Accident Cashless Treatment) योजना शुरू की है। इस योजना के तहत सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाती है, ताकि इलाज आर्थिक कारणों से प्रभावित न हो।

अब इस योजना से जुड़े ताजा आंकड़े सामने आए हैं। सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी कि योजना लागू होने के बाद अब तक 10.1 करोड़ रुपये से अधिक के क्लेम का भुगतान किया जा चुका है। हालांकि, आंकड़े यह भी बताते हैं कि अभी बड़ी संख्या में क्लेम का भुगतान बाकी है और प्रक्रिया जारी है।

12 हजार से ज्यादा क्लेम आए, लेकिन सभी का भुगतान अभी नहीं

लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि 28 जुलाई 2026 तक PM-RAHAT योजना के तहत अस्पतालों की ओर से 12,727 क्लेम दाखिल किए गए। इनमें से 9,601 दावों को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन अब तक केवल 7,871 क्लेम का भुगतान हो पाया है।

अगर कुल क्लेम की बात करें तो अब तक लगभग 62 प्रतिशत मामलों में ही भुगतान किया गया है। यानी बड़ी संख्या में स्वीकृत दावे अभी भी भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। सरकार के अनुसार, इन लंबित मामलों की प्रक्रिया भी जारी है और चरणबद्ध तरीके से भुगतान किया जा रहा है।

क्या है PM-RAHAT योजना और कैसे मिलता है इसका लाभ?

PM-RAHAT योजना की शुरुआत सड़क दुर्घटना के घायलों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। इसकी अधिसूचना मई 2025 में जारी की गई थी और 13 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे औपचारिक रूप से लॉन्च किया।

इस योजना के तहत यदि किसी व्यक्ति का राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क हादसा होता है, तो उसे सूचीबद्ध अस्पतालों में तय सीमा तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है। मरीज या उसके परिवार को इलाज के लिए तुरंत पैसे जमा कराने की जरूरत नहीं होती। अस्पताल इलाज का खर्च निर्धारित प्रक्रिया के तहत सीधे सरकार से प्राप्त करता है।

इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि दुर्घटना के बाद इलाज में आर्थिक कारणों से कोई रुकावट नहीं आती और मरीज को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल जाती है।

गुजरात और मध्य प्रदेश सबसे आगे, कई राज्यों में धीमी रफ्तार

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना का सबसे ज्यादा लाभ गुजरात और मध्य प्रदेश में देखने को मिला है।

गुजरात में अब तक 4,308 क्लेम दर्ज किए गए, जिनमें से 3,355 मामलों का भुगतान हो चुका है। वहीं मध्य प्रदेश में 3,850 क्लेम दाखिल हुए और 2,597 दावों का निपटारा किया गया। इसके अलावा असम, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी योजना के तहत अच्छी संख्या में क्लेम दर्ज हुए हैं।

इसके उलट कुछ बड़े राज्यों में योजना का लाभ अभी सीमित स्तर पर ही पहुंचा है। उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या अधिक होने के बावजूद केवल 344 क्लेम दर्ज हुए और उनमें से महज 5 मामलों में भुगतान हुआ। राजस्थान में 144 क्लेम दाखिल किए गए, लेकिन 28 जुलाई तक एक भी दावा मंजूर नहीं हुआ था।

महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों में भी इस योजना का उपयोग अपेक्षा से कम दर्ज किया गया है।

सरकार बढ़ा रही अस्पतालों की संख्या, ताकि ज्यादा लोगों को मिले फायदा

सरकार का कहना है कि PM-RAHAT योजना को अधिक प्रभावी बनाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास स्थित अधिक से अधिक अस्पतालों को इस योजना से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़क दुर्घटना के घायलों को बिना किसी देरी के आपातकालीन इलाज उपलब्ध कराया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना की जानकारी ज्यादा लोगों तक पहुंचे और अधिक अस्पताल इससे जुड़ें, तो सड़क दुर्घटनाओं के बाद इलाज में होने वाली देरी काफी हद तक कम हो सकती है। आने वाले समय में यह योजना देश की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।