सावन के पवित्र महीने में हर साल लाखों शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। कोई गंगाजल लेकर अपने आराध्य भगवान शिव का जलाभिषेक करता है तो कोई कठिन तप और व्रत के साथ यह यात्रा पूरी करता है। लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गुजर रही एक अनोखी कांवड़ यात्रा ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस यात्रा में न तो सबसे ज्यादा चर्चा सजी-धजी कांवड़ की हुई और न ही किसी विशेष आयोजन की। लोगों के बीच सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बनीं 100 साल से अधिक उम्र की सुनहरी देवी, जिन्हें उनका पूरा परिवार पालकी में कंधों पर बैठाकर हरिद्वार ले गया। यह दृश्य जहां भी पहुंचा, वहां लोगों ने इसे श्रद्धा, सेवा और परिवार के संस्कारों की मिसाल बताया।
जब दादी ही बन गईं परिवार की सबसे बड़ी कांवड़
पंजाब से आए इस परिवार ने इस बार कांवड़ यात्रा को अलग अंदाज में मनाने का फैसला किया। परिवार के सदस्यों ने अपनी बुजुर्ग दादी-नानी सुनहरी देवी को ही अपनी सबसे बड़ी “कांवड़” मानते हुए उन्हें पालकी में बैठाकर हरिद्वार पहुंचाया। वहां उनका गंगास्नान कराया गया और अब पूरा परिवार करीब 300 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए अपने घर लौट रहा है।
इस यात्रा की सबसे खास बात यह है कि परिवार का हर सदस्य इसमें अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। कोई पालकी को कंधा दे रहा है तो कोई दादी की देखभाल कर रहा है। रास्ते भर पूरा परिवार एकजुट होकर इस यात्रा को पूरा कर रहा है, जिसने लोगों का दिल जीत लिया है।
पूरा परिवार बना दादी की ताकत, हर कंधे पर दिखी सेवा की भावना
इस अनोखी यात्रा में परिवार के 7 पोते, 6 पड़पोते, 5 पोतियां, 3 पड़पोतियां, 2 बेटियां और 1 नाती शामिल हैं। सभी सदस्य बारी-बारी से पालकी उठाते हैं, ताकि किसी एक व्यक्ति पर ज्यादा बोझ न पड़े और यात्रा भी आराम से पूरी हो सके।
जब यह काफिला सहारनपुर से होकर गुजरा तो सड़क किनारे लोगों की भीड़ जमा हो गई। राहगीर रुककर इस दृश्य को देखने लगे। कई श्रद्धालुओं ने परिवार की सराहना की, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने अपने मोबाइल फोन से वीडियो और तस्वीरें भी रिकॉर्ड कीं। सोशल मीडिया पर भी इस अनोखी कांवड़ यात्रा की चर्चा तेज हो गई।
परिवार ने बताया क्यों लिया यह फैसला
दादी के पोते जोगिंदर कुमार ने बताया कि उनका परिवार हर साल कांवड़ यात्रा करता है। इस बार सभी ने मिलकर तय किया कि भगवान शिव के आशीर्वाद और परिवार को मिली खुशियों के प्रति आभार जताने का सबसे अच्छा तरीका यही होगा कि अपनी बुजुर्ग दादी को हरिद्वार ले जाकर गंगास्नान कराया जाए।
उन्होंने बताया कि सुनहरी देवी की उम्र 100 वर्ष से अधिक हो चुकी है। बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उनके लिए पैदल यात्रा करना संभव नहीं था। ऐसे में पूरे परिवार ने उन्हें पालकी में बैठाकर यात्रा कराने का संकल्प लिया। परिवार का कहना है कि बुजुर्गों की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है और यही उनकी आस्था का सबसे सुंदर रूप है।
आस्था के साथ मिला परिवार और संस्कार का संदेश
सहारनपुर से गुजर रही यह अनोखी कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रही। इसने समाज को यह संदेश भी दिया कि माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान किसी भी पूजा-पाठ से कम नहीं है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां कई बार बुजुर्ग खुद को अकेला महसूस करते हैं, वहीं इस परिवार ने उन्हें सम्मान और प्रेम देकर एक नई मिसाल पेश की है।
यह यात्रा बताती है कि भगवान की भक्ति केवल मंदिरों तक सीमित नहीं होती, बल्कि अपने परिवार और बुजुर्गों की सेवा में भी उतनी ही श्रद्धा छिपी होती है। शायद यही वजह है कि इस अनोखी कांवड़ यात्रा को देखने वाला हर व्यक्ति भावुक हो गया और परिवार के इस प्रयास की खुलकर सराहना करता नजर आया।


