देशभर में हर साल लाखों श्रद्धालुओं की भागीदारी वाली कांवड़ यात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम कदम उठाया है। अदालत ने केंद्र सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें कांवड़ यात्रा के सुरक्षित और व्यवस्थित संचालन के लिए पूरे देश में एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि अलग-अलग राज्यों में यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं को लेकर एक जैसी व्यवस्था नहीं होने से श्रद्धालुओं और आम लोगों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में एक राष्ट्रीय स्तर की नीति तैयार करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कांवड़ यात्रा हर साल करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी होती है और इसके दौरान कई राज्यों में बड़े स्तर पर यातायात और सुरक्षा की चुनौती भी सामने आती है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस, 25 अगस्त तक मांगा जवाब
मंगलवार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। अदालत ने सरकार से 25 अगस्त 2026 तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
याचिका में मांग की गई है कि केंद्र सरकार संबंधित राज्य सरकारों और सक्षम अधिकारियों के साथ मिलकर कांवड़ यात्रा के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय SOP तैयार करे। इसमें संविधान और मौजूदा कानूनों के अनुरूप सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और प्रशासनिक समन्वय के स्पष्ट दिशा-निर्देश शामिल हों।
याचिकाकर्ता का कहना है कि अलग-अलग राज्यों में अलग व्यवस्थाएं होने के कारण कई बार समन्वय की कमी देखने को मिलती है। यदि एक समान प्रोटोकॉल लागू होता है तो यात्रा अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराई जा सकेगी।
एम्बुलेंस और इमरजेंसी सेवाओं के लिए भी उठी अहम मांग
याचिका में केवल श्रद्धालुओं की सुविधा ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा को भी प्रमुखता दी गई है। इसमें अदालत से आग्रह किया गया है कि कांवड़ यात्रा के दौरान जिन मार्गों का उपयोग किया जाता है, वहां एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस और अन्य आपातकालीन सेवाओं के लिए पर्याप्त रास्ता हमेशा उपलब्ध रहे।
इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया है कि यात्रा के दौरान अपनाए गए सुरक्षा उपायों की समय-समय पर समीक्षा की जाए और संबंधित अधिकारियों से अनुपालन रिपोर्ट भी ली जाए। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि तय दिशा-निर्देश केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका प्रभावी तरीके से पालन भी हो।
हर साल बढ़ती भीड़ के बीच क्यों जरूरी मानी जा रही है SOP?
इस वर्ष कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू हुई है और 11 अगस्त तक चलेगी। इस दौरान उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में लाखों श्रद्धालु विभिन्न शिव मंदिरों तक जल लेकर पहुंचते हैं।
इतनी बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही के कारण कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण जैसी चुनौतियां सामने आती हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर एक समान व्यवस्था होने से राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है और श्रद्धालुओं के साथ-साथ आम लोगों को भी राहत मिल सकती है।
पिछले साल भी कांवड़ यात्रा से जुड़े आदेश पर हुई थी सुनवाई
यह पहला मौका नहीं है जब कांवड़ यात्रा से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा हो। जुलाई 2025 में भी शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के उस निर्देश के अमल पर रोक लगा दी थी, जिसमें यात्रा मार्ग पर स्थित ढाबों और भोजनालयों को अपने मालिकों और कर्मचारियों की पहचान सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के लिए कहा गया था।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठा सकता है कि कांवड़ यात्रियों को उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप शाकाहारी और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराया जाए। लेकिन अदालत ने यह भी कहा था कि पुलिस कानून में निर्धारित अधिकारों से आगे बढ़कर ऐसे निर्देश लागू नहीं कर सकती।
अब इस नई याचिका पर केंद्र सरकार के जवाब और आगे होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि अदालत राष्ट्रीय SOP बनाने का निर्देश देती है, तो भविष्य में कांवड़ यात्रा के आयोजन और सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।



