UPPSC की परीक्षाओं में बड़ा बदलाव! हर कमरे में जैमर, AI निगरानी और फेस स्कैन से होगी एंट्री

UPPSC की परीक्षाओं में बड़ा बदलाव! हर कमरे में जैमर, AI निगरानी और फेस स्कैन से होगी एंट्री

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब आयोग की परीक्षाओं में सिर्फ कड़ी निगरानी ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल होगा। हर परीक्षा कक्ष में सिग्नल जैमर लगाए जाएंगे, अभ्यर्थियों की पहचान फेस रिकग्निशन और बायोमेट्रिक सत्यापन से होगी, जबकि पूरे परीक्षा केंद्र पर AI आधारित निगरानी सिस्टम नजर रखेगा। आयोग का मानना है कि इस नई व्यवस्था से पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से होने वाली नकल जैसी समस्याओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

पिछले कुछ वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल के मामलों ने लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा प्रभावित किया है। ऐसे में UPPSC की यह पहल परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय और निष्पक्ष बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नई व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हर अभ्यर्थी को समान अवसर मिले और परीक्षा पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हो।

हर परीक्षा कक्ष में जैमर, मोबाइल और ब्लूटूथ होंगे बेअसर

नई सुरक्षा व्यवस्था के तहत प्रत्येक परीक्षा कक्ष में सिग्नल जैमर लगाए जाएंगे। जैमर सक्रिय रहने के दौरान मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, स्मार्टवॉच और अन्य वायरलेस संचार उपकरण काम नहीं कर पाएंगे। इससे प्रश्नपत्र की फोटो या जानकारी बाहर भेजने और बाहर से उत्तर प्राप्त करने जैसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी।

आयोग का मानना है कि केवल अभ्यर्थियों की तलाशी लेना पर्याप्त नहीं है। बदलती तकनीक के दौर में परीक्षा सुरक्षा के लिए डिजिटल सुरक्षा उपाय भी उतने ही जरूरी हैं। यही वजह है कि इस बार तकनीकी सुरक्षा को परीक्षा व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बनाया जा रहा है।

AI करेगा हर गतिविधि पर नजर, संदिग्ध हरकत पर तुरंत अलर्ट

UPPSC परीक्षा केंद्रों पर लगाए गए CCTV कैमरों को अब AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा। यह तकनीक परीक्षा के दौरान प्रत्येक अभ्यर्थी की गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगी। यदि कोई परीक्षार्थी बार-बार इधर-उधर देखता है, नियमों के विपरीत व्यवहार करता है या कोई संदिग्ध गतिविधि करता दिखाई देता है, तो सिस्टम तुरंत निगरानी टीम को अलर्ट भेज देगा।

इस व्यवस्था से केवल मानव निगरानी पर निर्भरता कम होगी और तकनीक की मदद से अधिक सटीक निगरानी संभव हो सकेगी। इससे परीक्षा के दौरान किसी भी गड़बड़ी पर तत्काल कार्रवाई करने में भी आसानी होगी।

फेस रिकग्निशन और बायोमेट्रिक से सॉल्वर गैंग पर लगेगी रोक

फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वर गैंग पर शिकंजा कसने के लिए आयोग फेस रिकग्निशन और बायोमेट्रिक सत्यापन का भी उपयोग करेगा। परीक्षा केंद्र में प्रवेश के समय अभ्यर्थी की पहचान आवेदन पत्र में दर्ज फोटो और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड से मिलाई जाएगी। पहचान पूरी तरह सही पाए जाने के बाद ही परीक्षा कक्ष में प्रवेश मिलेगा।

इस प्रक्रिया से किसी दूसरे व्यक्ति के स्थान पर परीक्षा देने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। आयोग का मानना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मजबूत होगी।

कंट्रोल रूम से लाइव निगरानी, सुरक्षित रहेगा पूरा डिजिटल रिकॉर्ड

नई व्यवस्था के तहत सभी प्रमुख परीक्षा केंद्रों की गतिविधियों पर केंद्रीय कंट्रोल रूम से भी लगातार नजर रखी जाएगी। अधिकारियों को विभिन्न केंद्रों की लाइव वीडियो फीड उपलब्ध होगी, जिससे किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। आवश्यकता पड़ने पर फ्लाइंग स्क्वॉड को तत्काल संबंधित परीक्षा केंद्र भेजा जाएगा।

आयोग ने परीक्षा केंद्रों के चयन को लेकर भी सख्त मानक तय किए हैं। केवल उन्हीं केंद्रों को परीक्षा के लिए चुना जाएगा जहां उच्च गुणवत्ता वाले CCTV कैमरे, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, पर्याप्त तकनीकी संसाधन और आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों। परीक्षा से पहले केंद्रों का भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा।

इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सभी महत्वपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड, जैसे CCTV फुटेज, बायोमेट्रिक डेटा और अन्य तकनीकी जानकारी सुरक्षित रखी जाएगी। भविष्य में यदि किसी परीक्षा को लेकर शिकायत या विवाद सामने आता है, तो इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा सकेगी।

UPPSC का मानना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत होगा और ईमानदार उम्मीदवारों को निष्पक्ष माहौल मिलेगा। यह व्यवस्था भविष्य की परीक्षाओं के लिए एक नए सुरक्षा मॉडल के रूप में भी देखी जा रही है।