संसद के लगातार बाधित होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सदन में हो रहे हंगामे का सबसे बड़ा नुकसान उन नए सांसदों को उठाना पड़ रहा है, जिन्हें अपनी बात रखने का अवसर ही नहीं मिल पा रहा। प्रधानमंत्री ने इसे नए जनप्रतिनिधियों के साथ अन्याय बताया और कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहां हर सांसद को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सांसदों से संसदीय परंपराओं को समझने, बहस में सक्रिय भागीदारी करने और अपने-अपने क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देने की भी अपील की।
नाश्ते पर सांसदों से मुलाकात, संसद की कार्यप्रणाली पर खुलकर हुई चर्चा
दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनसीपीआई, शिवसेना, एनसीपी (अजित पवार गुट) और अन्य सहयोगी दलों के सांसदों के साथ नाश्ते पर मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में करीब 45 सांसद शामिल हुए। इनमें शिवसेना के 7, एनसीपीआई के 20, एनसीपी (अजित पवार) के 2 सांसद और उपेंद्र कुशवाहा समेत कई अन्य नेता मौजूद थे।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है। इसलिए प्रत्येक सांसद की जिम्मेदारी है कि वह सदन की बहस में तैयारी के साथ हिस्सा ले और जनता की आवाज प्रभावी ढंग से उठाए।
प्रधानमंत्री ने सांसदों को संसदीय इतिहास पढ़ने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही और इतिहास से जुड़ी काफी सामग्री उपलब्ध है, जिसका उपयोग बहस की तैयारी के लिए किया जा सकता है।
‘अपने राज्य को आगे बढ़ाइए, तभी देश आगे बढ़ेगा’
बैठक में प्रधानमंत्री ने विकास को राजनीति से ऊपर रखने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि हर सांसद अपने संसदीय क्षेत्र और राज्य के विकास के लिए पूरी क्षमता से काम करे। जब राज्य आगे बढ़ेंगे, तभी देश भी तेजी से विकास करेगा।
उन्होंने सांसदों से कहा कि यदि किसी विकास परियोजना में कोई बाधा आती है तो वे सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से संपर्क कर सकते हैं। सरकार विकास कार्यों में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है।
प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान कई सांसदों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत भी की। उन्होंने महाराष्ट्र के धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबाळकर से उनके योगाभ्यास के बारे में जानकारी ली और सभी सांसदों को स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जनप्रतिनिधि ही बेहतर तरीके से जनता की सेवा कर सकते हैं।
साथ ही उन्होंने सांसदों से किसानों, मजदूरों और गरीब तबके के लोगों के बीच नियमित रूप से जाने और उनकी समस्याओं को समझने का भी आग्रह किया।
पूर्वोत्तर के विकास और NDA की एकजुटता पर भी दिया जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश के हर क्षेत्र का समान विकास करना है। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले इन क्षेत्रों के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, लेकिन अब सरकार उन्हें नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए लगातार काम कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसी सहयोगी दल को केवल उसके सांसदों की संख्या के आधार पर महत्व नहीं देती। चाहे किसी दल का एक सांसद हो या कई सांसद, सभी सहयोगी दल सरकार के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं और उन्हें बराबर सम्मान दिया जाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की मजबूती ही देश के विकास की मजबूती है और सभी सांसदों को मिलकर इस दिशा में काम करना चाहिए।
‘हंगामे से सबसे ज्यादा नुकसान नए सांसदों का’
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने संसद की लगातार बाधित होती कार्यवाही पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सदन में बार-बार होने वाले हंगामे के कारण नए सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल रहा है। यह केवल उनके साथ अन्याय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए भी उचित स्थिति नहीं है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के लिए विपक्ष से भी बातचीत की है। लेकिन लगातार व्यवधान के कारण न तो सत्ता पक्ष के सांसद अपनी बात रख पा रहे हैं और न ही विपक्ष के सदस्य अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभा पा रहे हैं।
उन्होंने सांसदों से अपील की कि संसद की गरिमा बनाए रखना सभी दलों की साझा जिम्मेदारी है। स्वस्थ बहस और रचनात्मक चर्चा ही लोकतंत्र को मजबूत बनाती है और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का सबसे प्रभावी माध्यम भी यही है।



