UPI पर अब लग सकता है चार्ज! लोकसभा से पास हुआ बड़ा बिल, डिजिटल पेमेंट करने वालों के लिए क्या बदलेगा?

UPI पर अब लग सकता है चार्ज! लोकसभा से पास हुआ बड़ा बिल, डिजिटल पेमेंट करने वालों के लिए क्या बदलेगा?

देश में डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के लिए एक बड़ा बदलाव आने की संभावना बन गई है। लोकसभा ने एक ऐसा विधेयक पारित कर दिया है, जिसके बाद भविष्य में UPI और सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क (Merchant Discount Rate – MDR) लगाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अभी से UPI पर चार्ज लगना शुरू हो जाएगा, लेकिन सरकार को जरूरत पड़ने पर ऐसा करने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा।

यह संशोधन Payment and Settlement Systems Act, 2007 में किया गया है। अब तक कानून में ऐसी व्यवस्था थी कि अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर कोई शुल्क नहीं वसूल सकते थे। नए संशोधन के बाद सरकार अधिसूचना जारी कर यह तय कर सकेगी कि किन डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लागू किया जाए।

क्या बदला है और इसका मतलब क्या है?

लोकसभा ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक में Payment and Settlement Systems Act, 2007 के सेक्शन 10A में संशोधन किया गया है।

पहले यह प्रावधान आयकर अधिनियम की धारा 269SU के तहत निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर किसी भी प्रकार का शुल्क लगाने से रोकता था। अब संशोधन के बाद सरकार को यह अधिकार मिलेगा कि वह अधिसूचना के माध्यम से एक या अधिक डिजिटल भुगतान माध्यमों के लिए अलग व्यवस्था तय कर सके।

यानी, भविष्य में यदि सरकार चाहे तो UPI सहित कुछ डिजिटल भुगतान सेवाओं पर Merchant Discount Rate (MDR) या अन्य शुल्क लागू करने का निर्णय ले सकती है।

हालांकि फिलहाल सरकार ने यह घोषणा नहीं की है कि UPI पर तत्काल कोई शुल्क लगाया जाएगा।

सरकार ऐसा विकल्प क्यों रखना चाहती है?

सरकार का तर्क है कि देश में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ रहा है। UPI आज करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में इस पूरे डिजिटल भुगतान नेटवर्क को सुरक्षित, तेज और मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार निवेश की जरूरत पड़ती है।

सरकार का मानना है कि बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर (PSP) और डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को भी इस व्यवस्था को संचालित करने की लागत उठानी पड़ती है। इसलिए भविष्य में एक ऐसा मॉडल तैयार किया जा सकता है, जिससे डिजिटल भुगतान व्यवस्था आर्थिक रूप से टिकाऊ बनी रहे और भुगतान प्रणाली को लगातार बेहतर बनाया जा सके।

RBI गवर्नर ने क्या कहा?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस मुद्दे पर कहा कि फिलहाल UPI पर MDR लागू होने की बात करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि डिजिटल भुगतान प्रणाली पर होने वाला खर्च आखिर कौन वहन करेगा।

उन्होंने कहा कि इसके दो ही विकल्प हैं। पहला, सरकार टैक्स के जरिए इस व्यवस्था का खर्च उठाती रहे। दूसरा, “यूजर पे” मॉडल के तहत लेनदेन करने वाले पक्ष से MDR के रूप में शुल्क लिया जाए।

मल्होत्रा के अनुसार, चाहे MDR लागू हो या नहीं, भुगतान प्रणाली को मजबूत बनाए रखने के लिए निवेश लगातार जरूरी रहेगा। फिलहाल सरकार आवश्यक कानूनी संशोधन कर रही है और आगे की स्थिति समय के साथ स्पष्ट होगी।

क्या आम UPI यूजर को अभी चिंता करने की जरूरत है?

फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि लोकसभा से बिल पास होने का मतलब यह नहीं है कि आज से UPI पर चार्ज लग गया है। इस संशोधन के जरिए केवल सरकार को भविष्य में अधिसूचना जारी कर शुल्क लागू करने का अधिकार मिला है।

बाजार के कई जानकारों का मानना है कि यदि भविष्य में MDR लागू भी किया जाता है तो संभव है कि यह केवल व्यापारियों (Merchant Transactions) के कुछ बड़े लेनदेन पर लागू हो। आम व्यक्ति के बीच होने वाले Peer-to-Peer (P2P) UPI ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क लागू होगा या नहीं, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।

यानी फिलहाल डिजिटल भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं के लिए व्यवस्था पहले जैसी ही बनी हुई है। आगे किसी भी बदलाव के लिए केंद्र सरकार को अलग से अधिसूचना जारी करनी होगी। ऐसे में आने वाले समय में सरकार की ओर से जारी होने वाले नियमों पर सभी की नजर रहेगी।