संसद के मानसून सत्र में कई दिनों से जारी गतिरोध के बीच अब एक बड़ा बदलाव होता दिख रहा है। छात्रों पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर विपक्ष लगातार गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग कर रहा था। अब सरकार की ओर से संकेत मिले हैं कि अमित शाह लोकसभा में इस मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार हैं। माना जा रहा है कि लोकसभा अध्यक्ष जल्द ही उनके जवाब का समय तय कर सकते हैं। सरकार के इस रुख के बाद संसद की कार्यवाही सामान्य होने की उम्मीद तो बनी है, लेकिन विपक्ष अभी भी अपने सवालों पर कायम है।
अमित शाह के बयान पर टिकी विपक्ष की नजर
छात्र आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर विपक्ष कई दिनों से सरकार को घेर रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष की मुख्य मांग यही है कि अमित शाह सदन में आएं और छात्रों के साथ हुए कथित अन्याय पर अपनी बात रखें।
खरगे के मुताबिक, विपक्ष पिछले 17 दिनों से इस मुद्दे पर गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहा है। उनका आरोप है कि सरकार के रुख की वजह से संसद की कार्यवाही सुचारु तरीके से नहीं चल पा रही है।
विपक्ष का कहना है कि सदन में सरकार का जवाब आना चाहिए और उसके बाद मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। यानी अब पूरा विवाद इस बात पर केंद्रित है कि सरकार कब और किस तरीके से अपना पक्ष रखती है।
रिजिजू बोले- चर्चा होगी, लेकिन हंगामा नहीं
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से संसद की कार्यवाही चलने देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर विस्तार से चर्चा के लिए तैयार है।
रिजिजू ने विपक्ष से यह भरोसा देने को कहा कि जब सरकार चर्चा के लिए तैयार हो, तब सदन में हंगामा नहीं किया जाएगा और गृह मंत्री तथा सरकार का जवाब शांतिपूर्वक सुना जाएगा।
उन्होंने विपक्षी दलों के बीच मतभेद का भी जिक्र किया। रिजिजू का कहना है कि सरकार की तरफ से चर्चा के लिए रास्ता खुला है, लेकिन विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर एक राय नहीं है।
ऐसे में सरकार की चुनौती केवल अमित शाह का बयान कराने तक सीमित नहीं है। उसके बाद सदन में चर्चा किस तरह आगे बढ़ती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
सिर्फ चार दिन बचे, कई अहम बिल अटके
मानसून सत्र के अब केवल चार कार्य दिवस बाकी बताए जा रहे हैं। ऐसे में संसद के सामने समय की कमी भी बड़ी चुनौती बन गई है।
गतिरोध जारी रहने की वजह से महिला आरक्षण, परिसीमन और विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। सोमवार की लोकसभा कार्यसूची में इनमें से कोई भी विधेयक शामिल नहीं था।
इन विधेयकों पर आगे क्या होगा, यह संसद की कार्यवाही सामान्य होने पर काफी हद तक निर्भर करेगा। अगर आने वाले दिनों में भी हंगामा जारी रहता है तो सरकार के विधायी एजेंडे पर इसका असर पड़ सकता है।
सरकार ने विपक्ष से बातचीत तेज की
संसद में लगातार बने गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार विपक्षी नेताओं से बातचीत भी कर रही है। पिछले सप्ताह महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों पर समर्थन जुटाने के लिए विपक्ष के साथ-साथ सहयोगी दलों से संपर्क की कोशिश की गई थी।
किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से दो बार मुलाकात भी की और फोन पर बातचीत की। हालांकि, इन प्रयासों से अभी तक संसद में पूरी तरह गतिरोध खत्म नहीं हुआ है।
अब अमित शाह के सदन में जवाब देने की संभावित तैयारी को सरकार की ओर से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अगर बयान के बाद विपक्ष चर्चा के लिए तैयार होता है और कार्यवाही चलती है, तो बचे हुए चार दिनों में कई अहम मुद्दों पर आगे बढ़ने का रास्ता खुल सकता है। लेकिन अगर गतिरोध फिर कायम रहा, तो मानसून सत्र का बाकी समय भी हंगामे की भेंट चढ़ सकता है।


