देश में फर्जी वकीलों को लेकर एक गंभीर सवाल सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। याचिका में दावा किया गया है कि देश के बार में 30 से 40 फीसदी तक वकील फर्जी हो सकते हैं। यानी मोटे तौर पर हर तीन में से एक वकील की पहचान और प्रैक्टिस पर सवाल खड़ा किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में फर्जी वकीलों के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच एजेंसी यानी सीबीआई को देने की मांग की गई है।
मामला सिर्फ अदालत में मौजूद किसी एक व्यक्ति की पहचान का नहीं है। अगर कोई ऐसा व्यक्ति वकील बनकर लोगों से पैसे ले रहा है, कानूनी सलाह दे रहा है या अदालत से जुड़े काम कर रहा है, जबकि वह वास्तव में अधिकृत वकील नहीं है, तो इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ सकता है। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में उठा फर्जी वकीलों का मुद्दा, केंद्र से मांगा जवाब
यह याचिका राजा चौधरी नाम के एक वकील ने दाखिल की है। सुनवाई के दौरान उन्होंने अदालत के सामने फर्जी वकीलों की समस्या का मुद्दा रखा। उनका कहना था कि कुछ लोग वकालत के पेशे का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि वे वास्तव में इस पेशे के लिए अधिकृत नहीं हैं।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने हुई। याचिकाकर्ता ने फर्जी वकीलों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सीबीआई को जिम्मेदारी देने की मांग की है।
सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट से जुड़े मामलों का भी जिक्र हुआ। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि 105 वकीलों से संबंधित मामला सामने आया है। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया कि अकेले इलाहाबाद बार में 1000 से ज्यादा फर्जी वकील हो सकते हैं।
हालांकि, ये आंकड़े याचिका में किए गए दावे हैं। इनकी पुष्टि या अंतिम निष्कर्ष सुप्रीम कोर्ट के स्तर से अभी नहीं हुआ है।
इलाहाबाद में कार्रवाई शुरू, 68 वकीलों पर FIR
फर्जी वकीलों का मुद्दा उत्तर प्रदेश में भी गंभीर रूप ले चुका है। कुछ दिन पहले कफील खान बनाम उत्तर प्रदेश मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वकालत के पेशे में कथित तौर पर माफिया तत्वों की मौजूदगी पर टिप्पणी की थी और कार्रवाई की जरूरत बताई थी।
इसके बाद इलाहाबाद में बार काउंसिल की सिफारिश पर 68 वकीलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यूपी पुलिस की ओर से बताया गया है कि करीब 100 एफआईआर दर्ज की जानी हैं। हालांकि, इन मामलों में कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी, ताकि प्रक्रिया में किसी तरह का व्यवधान न आए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि इलाहाबाद की स्थिति कोई अकेला मामला नहीं हो सकती। अगर देश के दूसरे हिस्सों में भी इसी तरह की शिकायतें हैं, तो वहां भी जांच और सत्यापन की जरूरत पड़ सकती है।
देश में करीब 20 लाख रजिस्टर्ड एडवोकेट, फिर सवाल क्यों?
कानून मंत्रालय ने अगस्त 2023 में राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि देश में करीब 20 लाख रजिस्टर्ड एडवोकेट हैं। बार काउंसिल के अनुसार हर साल लगभग 80 हजार नए वकील इनरोल होते हैं।
किसी व्यक्ति के लिए वकालत शुरू करने की पहली शर्त कानून की डिग्री है। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित टेस्ट पास करना होता है। तभी उसे प्रैक्टिस की अनुमति मिलती है।
इसके बावजूद फर्जी वकीलों की शिकायतें सामने आना पूरी व्यवस्था के लिए बड़ा सवाल है। यही वजह है कि सिर्फ डिग्री या एनरोलमेंट ही नहीं, बल्कि वकील वास्तव में प्रैक्टिस कर रहा है या नहीं, इसका सत्यापन भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने इसी उद्देश्य से Certificate and Place of Practice Verification Rules, 2015 लागू किए हैं। इन नियमों के तहत हर पांच साल में वकीलों की प्रैक्टिस से संबंधित जानकारी जुटाई जाती है। वकीलों को यह बताना होता है कि वे इस समय कहां प्रैक्टिस कर रहे हैं और कब से कर रहे हैं।
अगर कोई वकील जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराता या सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग नहीं करता, तो बार काउंसिल के पास उसके खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है।
आम आदमी के लिए क्यों बड़ा मुद्दा है?
किसी व्यक्ति के लिए अदालत का मामला पहले ही जटिल और खर्चीला हो सकता है। ऐसे में अगर वह किसी ऐसे व्यक्ति को वकील समझकर फीस दे दे, जो वास्तव में अधिकृत वकील ही नहीं है, तो नुकसान सिर्फ पैसे तक सीमित नहीं रह सकता। कानूनी प्रक्रिया में देरी और मामले की स्थिति पर भी इसका असर पड़ सकता है।
इसी वजह से फर्जी वकीलों की पहचान और सत्यापन का मुद्दा सीधे न्याय व्यवस्था में लोगों के भरोसे से जुड़ता है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका ने इसी चिंता को राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखा है।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। सीबीआई को जांच की जिम्मेदारी देने की मांग पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर नजर रहेगी। वहीं उत्तर प्रदेश में फर्जी वकीलों के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई भी आने वाले समय में इस पूरे मुद्दे की दिशा तय कर सकती है।



