सड़क हादसे के बाद शुरुआती कुछ मिनट कितने अहम होते हैं, यह बात अब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की नई व्यवस्था में साफ दिखाई देती है। NHAI ने अपने सभी परियोजनाओं में NHAI केयर सिस्टम का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है। इसका मकसद हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य को तेज करना और एंबुलेंस सेवाओं को तय समय के भीतर मौके तक पहुंचाना है। खास बात यह है कि तय मानकों में लापरवाही या देरी होने पर संबंधित सेवा प्रदाता पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
NHAI ने बुधवार को जारी सर्कुलर में घटना प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के साथ एंबुलेंस सेवाओं के लिए स्पष्ट SLA यानी Service Level Agreement और दंड का प्रावधान तय किया है। इसका सीधा असर देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले लोगों की आपातकालीन मदद पर पड़ेगा।
हर हाईवे प्रोजेक्ट में अब GPS और NHAI केयर जरूरी
नई व्यवस्था के तहत NHAI की परियोजनाओं पर काम करने वाली सभी ऑन-रोड यूनिट्स को NHAI केयर सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इसमें एंबुलेंस, क्रेन और पेट्रोलिंग वाहन भी शामिल हैं। परियोजना किस मॉडल या मोड पर चल रही है, इससे इस नियम में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
सभी ऑन-रोड वाहनों में AIS-140 मानक वाले GPS लगाए जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक यूनिट को IoT सिम से लैस Android मोबाइल डिवाइस दिया जाएगा। इसमें NHAI केयर मोबाइल एप पहले से इंस्टॉल रहेगा।
घटना प्रबंधकों के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है। उन्हें Android टैबलेट दिया जाएगा, जिसमें NHAI केयर डैशबोर्ड एप्लीकेशन होगा। यानी किसी हादसे या आपात स्थिति की सूचना मिलने से लेकर मदद पहुंचने तक की प्रक्रिया को डिजिटल तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा।
24×7 कॉल सेंटर और हर शिफ्ट में डॉक्टर
NHAI ने आपातकालीन सहायता को मजबूत करने के लिए 24×7 कॉल सेंटर भी स्थापित किया है। प्रत्येक शिफ्ट में आठ हेल्पलाइन कर्मचारी और एक डॉक्टर तैनात रहेगा।
इसके साथ ही सभी क्षेत्रीय कार्यालयों यानी RO और परियोजना कार्यान्वयन इकाइयों यानी PIU को NHAI केयर डैशबोर्ड की सुविधा दी जाएगी। अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों को सिस्टम के इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
इसका उद्देश्य सिर्फ शिकायत दर्ज करना नहीं है। पूरी घटना प्रबंधन प्रक्रिया को एक तय सिस्टम के तहत लाना है, ताकि सड़क पर किसी हादसे की स्थिति में जिम्मेदारी तय हो सके और मदद पहुंचने में अनावश्यक देरी न हो।
10 मिनट की देरी पर भी लगेगा जुर्माना
NHAI ने एंबुलेंस सेवाओं के प्रदर्शन को मापने के लिए 10 प्रमुख KPI/SLA मेट्रिक्स तय किए हैं। इनका पालन नहीं करने पर सीधे आर्थिक दंड का प्रावधान है। NHAI केयर ऐप या GPS की उपलब्धता 99 प्रतिशत से अधिक बनाए रखना जरूरी होगा। इसमें कमी आने पर 2,500 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना लगाया जाएगा।
किसी इमरजेंसी टिकट को एक मिनट से कम समय में स्वीकार करना होगा। हर अतिरिक्त मिनट की देरी पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। सबसे अहम नियम एंबुलेंस के घटनास्थल तक पहुंचने को लेकर है। यदि हादसे की जगह 10 किलोमीटर तक की दूरी पर है, तो एंबुलेंस को 10 मिनट के भीतर पहुंचना होगा। इसमें देरी होने पर प्रत्येक घटना के लिए 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
इसके अलावा टिकट स्वीकार होने के बाद एक घंटे के भीतर मरीज को अस्पताल पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसमें देरी पर भी 10,000 रुपये का दंड होगा। किसी इमरजेंसी टिकट को अस्वीकार करने पर भी 10,000 रुपये प्रति अस्वीकृति का जुर्माना तय किया गया है।
एंबुलेंस नहीं मिली तो दूसरी परियोजना से आएगी मदद
NHAI ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी हादसे के समय अगर संबंधित परियोजना क्षेत्र में एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है, तो नजदीकी परियोजना की एंबुलेंस को तुरंत सहायता के लिए भेजना होगा।
इसके अलावा हर 24 घंटे में कम से कम 5 किलोमीटर का ड्राई रन या मॉक ड्रिल करना जरूरी होगा। इसका पालन नहीं होने पर मासिक भुगतान में कटौती की जाएगी।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इन सभी KPI और SLA की निगरानी तथा जुर्माने की गणना NHAI केयर सिस्टम के जरिए अपने आप होगी। यानी रिकॉर्ड तैयार करने और अनुपालन की निगरानी में डिजिटल सिस्टम की भूमिका अहम रहेगी।
NHAI ने अधिकतम मासिक जुर्माने की सीमा 2.50 लाख रुपये तय की है। यह राशि मासिक या तिमाही भुगतान से काटी जाएगी।
इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य सड़क हादसों के बाद मदद की प्रक्रिया को अधिक तेज, ट्रैक करने योग्य और जवाबदेह बनाना है। NHAI ने सभी परियोजना निदेशकों और क्षेत्रीय अधिकारियों को इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। हाईवे पर सफर करने वालों के लिए इसका सबसे अहम मतलब यही है कि आपात स्थिति में मदद के लिए तय समय और जवाबदेही अब पहले से ज्यादा स्पष्ट होगी।


