स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के तुरंत बाद सियासत गरमा गई। महिला आरक्षण, ‘वंदे मातरम’ और ‘दिमागी नक्सली’ जैसे मुद्दों पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला, जबकि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने जवाब देते हुए कहा कि जनता तीन बार अपना फैसला सुना चुकी है। दोनों पक्षों के बयान अब राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन गए हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की अपील दोहराई। इसके बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सरकार पर महिला आरक्षण को लेकर “दोहरी सोच” अपनाने का आरोप लगाया। वहीं भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जनता ने लगातार तीन चुनावों में तय कर दिया है कि किसने बेहतर काम किया है।
महिला आरक्षण पर क्यों आमने-सामने आए दोनों दल?
कांग्रेस का सबसे बड़ा सवाल महिला आरक्षण कानून के लागू होने को लेकर है। जयराम रमेश ने कहा कि संसद ने सितंबर 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ सर्वसम्मति से पारित कर दिया था। इसके बावजूद सरकार ने इसे 2024 के लोकसभा चुनाव से लागू नहीं होने दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि अप्रैल 2026 में इसकी अधिसूचना जारी की गई, लेकिन इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। कांग्रेस का दावा है कि यदि इस कानून को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग किया जाए तो वह इसके समर्थन में पूरी तरह तैयार है।
कर्नाटक सरकार में मंत्री संतोष लाड ने भी कहा कि स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने की शुरुआत कांग्रेस सरकारों के दौर में हुई थी। उनके मुताबिक, महिला आरक्षण को जल्द लागू करने के लिए सरकार को आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
पीएम मोदी ने क्या कहा था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से कहा कि देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना समय की जरूरत है। उन्होंने पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों में महिला प्रतिनिधियों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि यही अनुभव अब राज्य विधानसभाओं और संसद तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे मिलकर महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ें। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पिछले कई दशकों तक राजनीतिक मतभेदों के कारण महिला आरक्षण का सपना अधूरा रहा, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाने का समय है।
‘वंदे मातरम’ और ‘दिमागी नक्सली’ बयान पर भी बढ़ी बहस
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के भाषण में ‘वंदे मातरम’ के संदर्भ पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत की पहली दो पंक्तियों को अपनाने के पीछे रवींद्रनाथ टैगोर की अहम भूमिका थी और इस ऐतिहासिक संदर्भ को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
इसके अलावा कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सली’ वाले बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। जयराम रमेश ने इसे राजनीतिक विरोधियों पर किया गया हमला बताते हुए कहा कि ऐसे शब्द लोकतांत्रिक बहस को कमजोर करते हैं। कांग्रेस का कहना है कि असहमति रखने वालों को इस तरह संबोधित करना उचित नहीं है।
प्रह्लाद जोशी ने दिया सीधा जवाब
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि जनता लगातार तीन बार अपने मत से बता चुकी है कि किसने देश के लिए बेहतर काम किया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसर पर तुलना करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि जनता का फैसला ही सबसे बड़ा जवाब है।
यह बयान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के उस भाषण के बाद आया, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार पर संसद के प्रति जवाबदेही से बचने, गरीबों की अनदेखी करने और विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देने के आरोप लगाए थे।
स्वतंत्रता दिवस के मंच से शुरू हुई यह जुबानी जंग अब महिला आरक्षण, ऐतिहासिक संदर्भों और राजनीतिक भाषा के इस्तेमाल जैसे मुद्दों तक पहुंच गई है। आने वाले दिनों में इन विषयों पर सियासी बहस और तेज होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।



