हरियाली तीज पर भक्ति का अद्भुत संगम! सोने-चांदी के हिंडोले में बांके बिहारी, अयोध्या में राम-सीता का झूलनोत्सव शुरू

हरियाली तीज पर भक्ति का अद्भुत संगम! सोने-चांदी के हिंडोले में बांके बिहारी, अयोध्या में राम-सीता का झूलनोत्सव शुरू

हरियाली तीज के पावन अवसर पर शनिवार को उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख धार्मिक केंद्र—वृंदावन और अयोध्या—भक्ति और उल्लास से सराबोर नजर आए। वृंदावन के प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण को पहली बार इस वर्ष के झूलनोत्सव के लिए गर्भगृह से बाहर लाकर विशाल स्वर्ण-रजत हिंडोले में विराजमान कराया गया। वहीं अयोध्या के मणि पर्वत पर प्रभु श्रीराम और माता सीता के पारंपरिक झूला विहार के साथ वार्षिक सावन झूला मेले का शुभारंभ हुआ।

सुबह से ही दोनों तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिरों में जयकारों, भजनों और राग मल्हार की मधुर धुनों के बीच ऐसा माहौल बना, जिसने सावन की आध्यात्मिक परंपरा को और जीवंत कर दिया।

वृंदावन में स्वर्ण-रजत हिंडोले पर विराजे बांके बिहारी

हरियाली तीज के दिन वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। इसी परंपरा के तहत सुबह 6:30 बजे मंदिर के पट खुलते ही हजारों श्रद्धालु ठाकुरजी के दिव्य दर्शन के लिए उमड़ पड़े।

इस बार भगवान बांके बिहारी को करीब 32 फीट चौड़े और 12 फीट ऊंचे स्वर्ण-रजत निर्मित विशाल हिंडोले में विराजमान किया गया। जैसे ही श्रद्धालुओं ने यह मनमोहक स्वरूप देखा, पूरा मंदिर परिसर “बांके बिहारी लाल की जय” के जयकारों से गूंज उठा।

हरियाली तीज के विशेष महत्व को देखते हुए ठाकुरजी और उनकी सखियों को हरे रंग की विशेष पोशाक पहनाई गई। मंदिर परिसर को भी सावन की हरियाली और फूलों की सजावट से आकर्षक रूप दिया गया। हिंडोले के दोनों ओर सखियों की प्रतीकात्मक प्रस्तुति ने झूलनोत्सव की पारंपरिक छटा को और निखार दिया।

घेवर-फैनी का भोग और राग मल्हार से गूंजा मंदिर

झूलनोत्सव केवल दर्शन तक सीमित नहीं रहा। मंदिर में ठाकुरजी को हरियाली तीज के पारंपरिक प्रसाद घेवर और फैनी का भोग अर्पित किया गया। इसके साथ ही विश्राम के लिए विशेष सुख सेज भी सजाई गई।

दर्शन के दौरान महिलाओं ने राग मल्हार गाकर सावन की खुशियां मनाईं। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और उत्सव का ऐसा वातावरण दिखाई दिया, जिसने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

ब्रज की परंपरा के अनुसार हरियाली तीज पर कई मंदिरों में झूलनोत्सव आयोजित होता है, लेकिन बांके बिहारी मंदिर का स्वर्ण-रजत हिंडोला हर साल सबसे बड़ा आकर्षण माना जाता है।

अयोध्या में शुरू हुआ सावन झूला मेला

हरियाली तीज के साथ ही अयोध्या में भी धार्मिक उत्सव की शुरुआत हुई। मणि पर्वत पर प्रभु श्रीराम और माता सीता के पारंपरिक झूला विहार के साथ वार्षिक सावन झूला मेला शुरू हो गया।

यह मेला 28 अगस्त तक चलेगा। पहले दिन विभिन्न मंदिरों की 11 झांकियां मणि पर्वत पहुंचीं, जहां श्रद्धालुओं ने राम-सीता के झूलनोत्सव के दर्शन किए।

अयोध्या के राम जन्मभूमि, कनक भवन और अन्य प्रमुख मंदिरों में भी झूला उत्सव का आयोजन किया गया। खास बात यह रही कि राम मंदिर में यह आयोजन पहली बार कुबेर नवरत्न टीला पर आयोजित किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

सावन की परंपरा और श्रद्धालुओं की आस्था का संगम

हरियाली तीज भारतीय संस्कृति में सावन के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में गिनी जाती है। यह केवल प्रकृति की हरियाली का उत्सव नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना से जुड़ी प्राचीन धार्मिक परंपराओं का भी प्रतीक है।

वृंदावन में बांके बिहारी के स्वर्ण-रजत हिंडोले के दर्शन और अयोध्या में राम-सीता के झूलनोत्सव ने इस बार श्रद्धालुओं को भक्ति का अनूठा अनुभव दिया। दोनों पावन नगरों में उमड़ी आस्था की यह तस्वीर सावन के आध्यात्मिक महत्व और भारतीय सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक बनकर सामने आई।