‘जमीन, आसमान या नर्क… कहीं भी नहीं बचेंगे आतंकी’, पहलगाम हमले के बाद PM मोदी के निर्देश का NSA डोभाल ने किया खुलासा

‘जमीन, आसमान या नर्क… कहीं भी नहीं बचेंगे आतंकी’, पहलगाम हमले के बाद PM मोदी के निर्देश का NSA डोभाल ने किया खुलासा

पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा एजेंसियों को जो संदेश दिया था, उसका खुलासा अब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने किया है। डिस्कवरी की डॉक्यूसीरीज Declassified: Operation Sindoor में डोभाल ने बताया कि प्रधानमंत्री का निर्देश बिल्कुल साफ था—हमले के जिम्मेदार लोगों का पीछा किया जाएगा, चाहे वे जमीन पर हों, आसमान में हों या कहीं भी छिपे हों। डोभाल के मुताबिक यह सिर्फ तत्काल सैन्य कार्रवाई का आदेश नहीं था, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत के लंबे और निरंतर अभियान का संकेत भी था। उनके बयान से पहलगाम हमले के बाद सरकार की रणनीति और निर्णय प्रक्रिया की कई अहम बातें सामने आई हैं।

सऊदी दौरे से लौटते ही पीएम मोदी ने पूछा पहला सवाल

अजीत डोभाल ने बताया कि 22 अप्रैल को जब पहलगाम में आतंकी हमला हुआ, उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब के दौरे पर थे। भारत लौटने के बाद एयरपोर्ट पर ही वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पहली बैठक हुई।

डोभाल के अनुसार, प्रधानमंत्री ने सबसे पहले पूरी घटना की जानकारी ली। इसके तुरंत बाद उन्होंने एक सीधा सवाल पूछा—हमला किसने किया और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है? उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि हमलावरों की पहचान और उनकी जिम्मेदारी को लेकर कोई भ्रम नहीं रहना चाहिए।

डोभाल ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों ने कम समय में अहम जानकारी जुटाई और जांच को तेजी से आगे बढ़ाया। उन्होंने इसके लिए भारतीय खुफिया एजेंसियों की सराहना भी की।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ सिर्फ जवाबी कार्रवाई नहीं, लंबी रणनीति का हिस्सा

NSA ने कहा कि प्रधानमंत्री जब यह कहते हैं कि “ऑपरेशन सिंदूर जारी है”, तो उसका अर्थ केवल एक सैन्य अभियान नहीं है। उनके मुताबिक इसका मतलब है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक इस खतरे का पूरी तरह मुकाबला नहीं किया जाता।

उन्होंने बताया कि पहलगाम हमले के बाद सरकार का फोकस उन आतंकी ढांचों को निशाना बनाना था, जिन्हें इस हमले से जुड़ा माना गया। इसी रणनीति के तहत 7 मई को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया।

इस अभियान के दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए। डोभाल ने कहा कि अभियान का उद्देश्य विशेष रूप से उन कैंपों को नष्ट करना था, जिन्हें पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार माना गया।

पहलगाम हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में आम नागरिकों को निशाना बनाया गया था। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। घटना के बाद पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हुई थी।

डोभाल ने कहा कि भारत की संप्रभुता की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस लड़ाई में किसी तरह की सीमा नहीं हो सकती। उनके अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों में सबसे अहम बात यह है कि जिम्मेदार लोगों की पहचान सटीक हो और कार्रवाई उसी आधार पर की जाए।

संदेश सिर्फ आतंकियों के लिए नहीं, सुरक्षा नीति का संकेत भी

डोभाल के बयान से यह स्पष्ट होता है कि पहलगाम हमले के बाद सरकार की प्राथमिकता केवल त्वरित प्रतिक्रिया देना नहीं थी, बल्कि एक व्यापक सुरक्षा रणनीति के तहत आगे बढ़ना भी था। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री का संदेश यह था कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का अभियान किसी एक घटना तक सीमित नहीं रहेगा।

यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब Operation Sindoor को लेकर कई जानकारियां सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन रही हैं। इससे पहलगाम हमले के बाद लिए गए फैसलों और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका को लेकर नई जानकारी सामने आई है।