संसद के हालिया मानसून सत्र को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संस्थापक और प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया है कि युवाओं के विरोध प्रदर्शन और शिक्षा से जुड़े कई अहम सवाल लोकसभा में पूछने की अनुमति नहीं दी गई। उनका दावा है कि एक सांसद की ओर से गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सवाल तीन बार भेजे गए थे, लेकिन उन्हें नियम 41(2) का हवाला देकर स्वीकार नहीं किया गया। दास ने इसे संसदीय जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए सवाल उठाया कि अगर संसद में ऐसे प्रश्न नहीं पूछे जाएंगे, तो सरकार से जवाब आखिर कहां मांगा जाएगा।
किन सवालों पर उठाया गया विवाद?
सौरव दास के मुताबिक, लोकसभा सांसद मैथेश्वरन वीएस ने केंद्र सरकार से जवाब मांगने के लिए तीन बार प्रश्न भेजे थे। उन्होंने कहा कि इनमें नोटिस नंबर 101799 और 101801 शामिल थे और ये गृह मंत्रालय तथा शिक्षा मंत्रालय से जुड़े विषयों पर आधारित थे।
दास का दावा है कि इन प्रश्नों में नीट-यूजी 2026 आवेदन शुल्क वापसी, छात्रों के विरोध प्रदर्शन, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रदर्शनकारियों के साथ हुए व्यवहार जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा गया था।
उनके अनुसार, इन सभी सवालों को संसद में सूचीबद्ध होने की अनुमति नहीं मिली।
छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े कौन-कौन से मुद्दे थे?
CJP के प्रवक्ता ने कहा कि प्रस्तावित सवालों में कई ऐसे विषय शामिल थे, जो सीधे युवाओं और छात्रों से जुड़े थे।
उनके मुताबिक, इनमें पूछा गया था कि नीट-यूजी 2026 का आवेदन शुल्क वापस करने पर सरकार का क्या रुख है। इसके अलावा यह भी सवाल था कि सरकार पर लोगों का भरोसा कम होने की वजह क्या है।
दास ने दावा किया कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पीने का पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने, प्रदर्शनकारियों से सरकार की बातचीत और पेपर लीक जैसी समस्याओं के समाधान पर भी जवाब मांगा गया था।
उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों के साथ हुए व्यवहार को लेकर भी सवाल पूछे जाने थे।
नियम 41 का हवाला देकर सवाल रोके गए, CJP ने उठाए सवाल
सौरव दास का कहना है कि इन प्रश्नों को रोकने के लिए लोकसभा के नियम 41(2) की कई धाराओं—(I), (IV), (V), (XVIII) और (XXII)—का हवाला दिया गया।
उन्होंने इन कारणों को असामान्य बताते हुए कहा कि यदि इस तरह के प्रश्न भी स्वीकार नहीं किए जाएंगे, तो संसद में जवाबदेही की प्रक्रिया कमजोर होगी।
दास ने यह भी सवाल उठाया कि उन दिनों गृह मंत्री अमित शाह संसद में क्यों नहीं आए और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर जवाब क्यों नहीं दिया गया।
‘प्रश्नकाल लोकतंत्र का सबसे अहम हिस्सा है’
CJP प्रवक्ता ने कहा कि किसी सांसद का सरकार से सवाल पूछने का अधिकार केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि संसदीय लोकतंत्र की बुनियाद है।
उनके मुताबिक, प्रश्नकाल इसलिए होता है ताकि सरकार के पास मौजूद शक्तियों के इस्तेमाल पर जनता के चुने हुए प्रतिनिधि जवाब मांग सकें। उन्होंने कहा कि यदि संसद में सवाल पूछने की गुंजाइश कम होगी, तो लोग अपनी बात रखने के लिए सड़कों का सहारा लेने पर मजबूर हो सकते हैं।
दास ने यह भी कहा कि संसद केवल सरकारी नीतियों पर मुहर लगाने का मंच नहीं हो सकती और युवाओं से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल, इस मामले में खबर में केंद्र सरकार या लोकसभा सचिवालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। ऐसे में विवाद मुख्य रूप से CJP की ओर से लगाए गए आरोपों और उठाए गए सवालों के इर्द-गिर्द केंद्रित है।



