राहुल गांधी के संसद मार्ग थाने के बाहर धरने को लेकर सियासी टकराव और तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस सांसद के विरोध प्रदर्शन पर तीखा हमला बोलते हुए इसे “कैमराजीवी ड्रामा” और “सस्ती राजनीति” करार दिया है। केंद्रीय मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आरोप लगाया कि यह धरना छात्रों या न्याय की लड़ाई के लिए नहीं, बल्कि वंदे मातरम् विवाद से ध्यान हटाने की कोशिश है। दूसरी ओर, भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने भी राहुल गांधी पर कानून और न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी करने का आरोप लगाया। ऐसे में यह मुद्दा अब सिर्फ धरने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि न्यायिक जांच, छात्र आंदोलन और राष्ट्रगीत विवाद को लेकर दोनों दलों के बीच नया राजनीतिक संघर्ष बन गया है।
नड्डा बोले- सुप्रीम कोर्ट जांच कर रही, फिर धरने की जरूरत क्यों?
जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के धरने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, उस पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही संज्ञान ले चुका है। उन्होंने कहा कि अदालत ने मामले की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी गठित की है।
नड्डा ने कहा कि जब सर्वोच्च अदालत जांच की निगरानी कर रही है, तब पुलिस स्टेशन के बाहर धरना देना राजनीतिक संदेश देने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी मीडिया की सुर्खियां बटोरने के लिए यह कदम उठा रहे हैं।
उनके मुताबिक, यह विरोध प्रदर्शन छात्रों के हित में नहीं बल्कि कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
वंदे मातरम् विवाद से जोड़कर लगाए आरोप
भाजपा अध्यक्ष ने धरने की टाइमिंग पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस समय वंदे मातरम् से जुड़े विवाद को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही है। नड्डा का दावा है कि इसी मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी ने नया राजनीतिक अभियान शुरू किया है।
उन्होंने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर जवाबदेही से बचने की कोशिश करने का आरोप लगाया। नड्डा ने कहा कि जनता इन सवालों का जवाब चाहती है और कांग्रेस इससे बच नहीं सकती।
हालांकि, उन्होंने अपनी टिप्पणी में इसे पूरी तरह राजनीतिक मुद्दा बताते हुए कांग्रेस के रुख पर निशाना साधा।
रविशंकर प्रसाद ने भी साधा निशाना
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी राहुल गांधी की रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद मार्ग थाने के बाहर बिना पूर्व अनुमति धरने पर बैठना उचित नहीं था।
रविशंकर प्रसाद के अनुसार, पुलिस पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि संबंधित मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जांच समिति के रहते इस तरह का धरना न्यायिक प्रक्रिया पर अनावश्यक दबाव बनाने जैसा प्रतीत होता है।
उनका आरोप था कि कांग्रेस अब राजनीतिक मुद्दों को नए विवादों से जोड़कर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
छात्र आंदोलन से शुरू हुआ मुद्दा अब सियासी बहस में बदला
यह पूरा विवाद उस छात्र आंदोलन से जुड़ा है, जिसमें पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसी घटनाक्रम के बाद राहुल गांधी ने संसद मार्ग थाने के बाहर धरना दिया था। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए हाई-पावर्ड कमेटी गठित कर दी है, जो पुलिस कार्रवाई और उससे जुड़े पहलुओं की जांच करेगी।
अब इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। एक तरफ कांग्रेस इसे छात्रों और न्याय से जुड़ा सवाल बता रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा इसे राजनीतिक नाटक और ध्यान भटकाने की रणनीति करार दे रही है। आने वाले दिनों में अदालत की जांच और दोनों दलों की राजनीतिक प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय कर सकती है।


