बिहार लोक सेवा आयोग यानी BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह का एक बयान अब उनके लिए भारी पड़ गया है। आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों को लेकर दिए गए ‘हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार’ वाले बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बिहार सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सामान्य प्रशासन विभाग को परीक्षा नियंत्रक को निलंबित करने का निर्देश दिया है। मामला शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 से जुड़ी अभ्यर्थियों की नाराजगी और परीक्षा के पैटर्न को लेकर चल रही चर्चा के बीच सामने आया।
अधिकारी का बयान सामने आने के बाद आंदोलनकारी अभ्यर्थियों में नाराजगी और बढ़ गई। अब सरकार के सीधे हस्तक्षेप से यह मामला BPSC की परीक्षा व्यवस्था और अभ्यर्थियों के साथ संवाद के तरीके को लेकर भी चर्चा में आ गया है।
TRE-4 को लेकर चल रही थी बहस, तभी सामने आया बयान
दरअसल, बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 को लेकर अभ्यर्थियों के बीच लगातार चर्चा चल रही थी। परीक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब देने के लिए BPSC की ओर से स्थिति स्पष्ट की जा रही थी।
इस दौरान आयोग के सचिव हेमंत कुमार सिंह और परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह मौजूद थे। परीक्षा नियंत्रक ने TRE-4 की परीक्षा प्रारंभिक परीक्षा यानी PT और मुख्य परीक्षा यानी Mains, दो चरणों में कराने के फैसले के बारे में जानकारी दी।
उनका कहना था कि परीक्षा के दो चरणों में होने को लेकर सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों में कई तरह की बातें और अफवाहें चल रही हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि शिक्षक भर्ती परीक्षा को दो चरणों में आयोजित करना सिर्फ बिहार में होने वाली व्यवस्था नहीं है।
इसी दौरान मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने चर्चित कहावत का इस्तेमाल किया।
‘हाथी चले बाजार…’ पर भड़के अभ्यर्थी
परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने आंदोलनकारी छात्रों और परीक्षा को लेकर उठ रही चर्चाओं के संदर्भ में कहा, ‘हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार।’
बयान का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। अभ्यर्थियों ने इसे आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रति असंवेदनशील टिप्पणी के तौर पर लिया। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।
अभ्यर्थियों के बीच पहले से TRE-4 की परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल थे। ऐसे में परीक्षा नियंत्रक का यह बयान विवाद का नया कारण बन गया। शिक्षक अभ्यर्थी संघ के सौरभ कुमार ने भी इस पर नाराजगी जताई और मुख्यमंत्री आवास के घेराव की बात कही थी।
उन्होंने कहा था कि प्रदर्शन के दौरान परीक्षा नियंत्रक के बयान का जवाब दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, निलंबन का आदेश
विवाद बढ़ने के बाद बिहार सरकार ने मामले में कार्रवाई की। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सामान्य प्रशासन विभाग को राजेश कुमार सिंह को निलंबित करने का निर्देश दिया।
सरकार के इस कदम से साफ है कि BPSC जैसे संवैधानिक महत्व वाले संस्थान से जुड़े अधिकारियों के सार्वजनिक बयानों को लेकर सरकार ने गंभीरता दिखाई है।
अभ्यर्थियों के लिए यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में उम्मीदवार लंबे समय और संसाधन लगाते हैं। परीक्षा की तारीख, पैटर्न और भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में आयोग और अभ्यर्थियों के बीच संवाद का तरीका भी उतना ही मायने रखता है।
अब TRE-4 को लेकर आगे क्या होगा?
इस पूरे विवाद की शुरुआत TRE-4 की परीक्षा दो चरणों में कराने को लेकर उठे सवालों से हुई थी। BPSC की ओर से इस व्यवस्था को लेकर स्पष्टीकरण दिया जा रहा था। लेकिन इसी दौरान परीक्षा नियंत्रक की टिप्पणी ने पूरा मुद्दा एक अलग दिशा में पहुंचा दिया।
अब सरकार की कार्रवाई के बाद निगाहें आगे की प्रक्रिया पर हैं। अभ्यर्थी चाहते हैं कि भर्ती परीक्षा से जुड़े सवालों का स्पष्ट और आधिकारिक जवाब मिले। वहीं सरकार के सामने यह चुनौती भी है कि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उम्मीदवारों के बीच भरोसा बना रहे।
फिलहाल वायरल वीडियो और विवादित बयान पर मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई का फैसला लिया गया है। TRE-4 की परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों की चिंताएं और आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।


