गडकरी का बड़ा संकेत? बोले- “अब ज्यादा काम नहीं कर पाता”, नई पीढ़ी को जिम्मेदारी देने की बात

गडकरी का बड़ा संकेत? बोले- “अब ज्यादा काम नहीं कर पाता”, नई पीढ़ी को जिम्मेदारी देने की बात

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान ने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक सियासी चर्चाओं को तेज कर दिया है। नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन और अब कम हो रहे काम के बोझ का जिक्र किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह पिछले करीब 30 वर्षों से लगातार सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं और अब पहले की तरह ज्यादा सामाजिक काम नहीं कर पाते। साथ ही उन्होंने नई पीढ़ी को आगे आने और जिम्मेदारी संभालने की बात कही। हालांकि, गडकरी ने राजनीति से संन्यास लेने की कोई घोषणा नहीं की है।

30 साल के सफर के बाद बोले गडकरी- अब नई पीढ़ी आगे आए

नागपुर में आयोजित ‘एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग’ के कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने अपने कामकाज और सार्वजनिक जीवन को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह कोई प्रेरणा स्रोत होने का दावा नहीं करते। अब उनकी काम करने की क्षमता पहले जैसी नहीं रही है।

गडकरी ने कहा कि जब वह ज्यादा काम कर सकते थे, तब उन्होंने पूरी क्षमता के साथ काम किया। अब समय है कि नई पीढ़ी आगे आए और काम की जिम्मेदारी संभाले। उनके मुताबिक, नए लोग आगे आ रहे हैं और पुराने लोग उन्हें अपने अनुभव से मार्गदर्शन दे रहे हैं।

उनकी यह बात इसलिए भी चर्चा में आ गई क्योंकि गडकरी राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे में उनके अपने सक्रिय काम को लेकर कही गई बात को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है।

क्या यह राजनीति से दूरी का संकेत है?

गडकरी के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या वह धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से पीछे हटने की तैयारी कर रहे हैं? हालांकि, उपलब्ध बयान में उन्होंने ऐसा कोई संकेत सीधे तौर पर नहीं दिया है।

उनकी बात का मुख्य फोकस जिम्मेदारी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और वरिष्ठ लोगों की भूमिका को मार्गदर्शन तक सीमित करने पर था। यानी गडकरी का संदेश संगठन और सामाजिक काम में पीढ़ीगत बदलाव की जरूरत से जुड़ा दिखाई देता है।

राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने वाले नेताओं के लिए यह बदलाव स्वाभाविक प्रक्रिया भी माना जाता है। गडकरी ने भी अपने अनुभव का इस्तेमाल नई पीढ़ी को दिशा देने की बात कही है।

आदिवासी गांवों को लेकर गडकरी ने रखा बड़ा लक्ष्य

कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने सामाजिक विकास से जुड़े अपने लक्ष्य की भी बात की। उन्होंने कहा कि काम को इस स्तर तक पहुंचाना है कि महाराष्ट्र के किसी भी आदिवासी गांव में अंधेरा न रहे और वहां विकास की रोशनी पहुंचे।

उन्होंने कहा कि इस तस्वीर को बदलने की जिम्मेदारी सभी की है। इसी दिशा में मानकर ट्रस्ट के काम का भी उन्होंने जिक्र किया।

गडकरी की बात में सिर्फ राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि सामाजिक भागीदारी पर भी जोर दिखाई दिया। उनका कहना था कि बदलाव तभी संभव है, जब लोग मिलकर जिम्मेदारी निभाएं और काम को आगे बढ़ाएं।

समोसा, सेहत और बदली हुई जिंदगी का भी किया जिक्र

गडकरी ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए अपनी जीवनशैली में आए बदलाव की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि पहले पार्टी के लिए काम करते समय वह खाने-पीने को लेकर ज्यादा सतर्क नहीं रहते थे। यहां तक कि कई बार समोसा खाने के बाद भी सो जाते थे।

लेकिन कोरोना के बाद उन्होंने अपनी सेहत को लेकर ज्यादा गंभीरता दिखाई। अब वह रोजाना एक्सरसाइज करते हैं और शरीर को स्वस्थ रखने पर ध्यान देते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर इंसान का शरीर स्वस्थ नहीं है, तो सत्ता और पद का क्या फायदा। गडकरी के इस बयान से साफ है कि वह उम्र और लंबे सार्वजनिक जीवन के साथ स्वास्थ्य को भी अहम मानते हैं।

फिलहाल, उनके बयान को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जरूर शुरू हो गई हैं, लेकिन इसे सीधे तौर पर राजनीति से संन्यास की घोषणा मानना जल्दबाजी होगी। गडकरी ने केवल इतना कहा है कि अब नई पीढ़ी को आगे आना चाहिए और वरिष्ठ लोगों को अपने अनुभव से उनका मार्गदर्शन करना चाहिए।