महंगाई पर खरगे का बड़ा हमला: प्याज, टमाटर से तेल तक बढ़े दाम, बोले- आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ा

महंगाई पर खरगे का बड़ा हमला: प्याज, टमाटर से तेल तक बढ़े दाम, बोले- आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ा

त्योहारों के मौसम से पहले रसोई के बढ़ते खर्च को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कीमतों को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। खरगे ने दावा किया कि पिछले वर्षों में प्याज, टमाटर, आटा, सरसों का तेल और दाल जैसी चीजों की कीमतों में बड़ा इजाफा हुआ है। उनका कहना है कि आम परिवार के लिए महंगाई अब सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि हर महीने के घरेलू बजट का सीधा सवाल बन गई है। हालांकि, खरगे की ओर से पेश किए गए ये आंकड़े उनके राजनीतिक दावे का हिस्सा हैं।

‘कभी दाल, कभी तेल तो कभी सब्जी’… खरगे ने साधा निशाना

मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बीजेपी और केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में लंबे समय से बीजेपी की सरकार है, लेकिन आम आदमी के सामने महंगाई की चुनौती बनी हुई है।

खरगे ने अपने पोस्ट में कहा कि कभी दाल, कभी सब्जी, कभी तेल और अब चीनी जैसी जरूरी चीजों की कीमतें घरेलू बजट पर दबाव डाल रही हैं। उनका आरोप है कि जब जनता महंगाई पर सवाल उठाती है, तो मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश की जाती है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी महंगाई के सवाल को लगातार उठाती रहेगी। उन्होंने खास तौर पर त्योहारों के दौरान बढ़ते घरेलू खर्च का मुद्दा उठाया और रोजमर्रा की वस्तुओं के दामों का तुलनात्मक ब्यौरा साझा किया।

टमाटर 17.50 से 120 रुपये, प्याज भी 200% से ज्यादा महंगा होने का दावा

खरगे की ओर से साझा किए गए आंकड़ों में मई 2013 और अगस्त 2026 की कीमतों की तुलना की गई है। इन आंकड़ों के मुताबिक, टमाटर की कीमत 17.50 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 120 रुपये हो गई है। इसमें करीब 585 फीसदी की वृद्धि का दावा किया गया है।

इसी तरह प्याज की कीमत 23 रुपये से बढ़कर 73 रुपये प्रति किलो बताई गई है। खरगे के अनुसार, यह करीब 217 फीसदी की बढ़ोतरी है।

आटे की कीमत भी 21 रुपये से बढ़कर 69 रुपये प्रति किलो बताई गई है। यानी इसमें करीब 228 फीसदी का इजाफा होने का दावा किया गया है।

सरसों के तेल को लेकर साझा आंकड़ों में कीमत 102 रुपये से बढ़कर 263 रुपये बताई गई है। इसके आधार पर करीब 157 फीसदी वृद्धि का दावा किया गया है।

दालों की कीमतों में भी बढ़ोतरी का जिक्र किया गया है। खरगे के मुताबिक, तुअर, उड़द और चना जैसी दालें औसतन 140 रुपये से बढ़कर करीब 153 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं।

चीनी और तेल की कीमतें भी बनी चिंता

खरगे ने चीनी, तेल, दूध और दाल जैसी जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि खाने-पीने की बुनियादी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे सीधा असर मध्यमवर्गीय और आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ता है।

रसोई का खर्च बढ़ने का मतलब सिर्फ एक-दो सामान महंगा होना नहीं है। परिवारों को महीने की खरीदारी में कई चीजों के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है। त्योहारों के दौरान मिठाई, पकवान और दूसरे खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से यह दबाव और महसूस हो सकता है।

इसी संदर्भ में खरगे ने सरकार से जुड़े आर्थिक दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आंकड़ों और जमीनी खर्च के बीच अंतर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, जनता को सिर्फ बयान नहीं, बल्कि महंगाई से राहत देने वाले ठोस उपाय चाहिए।

महंगाई पर सियासत तेज, अब राहत के उपायों पर नजर

कांग्रेस अध्यक्ष का यह हमला ऐसे समय आया है जब प्याज, चीनी और तेल जैसी वस्तुओं की कीमतों को लेकर बाजार में चर्चा है। खरगे ने इसे राजनीतिक बहस से आगे आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा मुद्दा बताया।

हालांकि, महंगाई के आंकड़ों और उसके कारणों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग दावे रहे हैं। ऐसे में खरगे की ओर से जारी आंकड़ों को उनके राजनीतिक आरोपों और तुलना के तौर पर देखा जाना चाहिए।

आम उपभोक्ता के लिए असली सवाल सीधा है—महीने की कमाई में से किराने का खर्च कितना बढ़ रहा है। अगर जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतें लगातार ऊपर रहती हैं, तो इसका असर परिवार की बचत और दूसरे खर्चों पर भी पड़ता है।

अब देखना होगा कि सरकार महंगाई के इस राजनीतिक हमले पर क्या जवाब देती है और जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।