चंद्र ग्रहण के दिन राखी बांधने को लेकर कन्फ्यूजन? जानें बहनों के लिए कौन सा समय है शुभ

चंद्र ग्रहण के दिन राखी बांधने को लेकर कन्फ्यूजन? जानें बहनों के लिए कौन सा समय है शुभ

रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण की खबर ने भाई-बहनों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर ग्रहण पड़ रहा है तो बहनें भाई की कलाई पर राखी आखिर किस समय बांधें? ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण और सूतक काल के दौरान धार्मिक कार्यों को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं। हालांकि, इस बार भारत में चंद्र ग्रहण का असर नहीं माना जा रहा है और यहां सूतक काल भी लागू नहीं होगा। ऐसे में रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए शुभ समय सुबह 5 बजकर 57 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक बताया गया है।

ग्रहण के बीच नहीं, शुभ समय देखकर बांधें राखी

रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में इसके लिए शुभ मुहूर्त का भी खास महत्व माना गया है। खासकर जब ग्रहण की स्थिति बन रही हो, तब राखी बांधने के समय को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, ग्रहण काल और सूतक के दौरान राखी बांधना उचित नहीं माना जाता। इसलिए ऐसी स्थिति में बहनों को या तो सूतक शुरू होने से पहले राखी बांधनी चाहिए या फिर ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी करके यह रस्म करनी चाहिए।

हालांकि भारत में इस चंद्र ग्रहण का प्रभाव नहीं बताया गया है। इसलिए यहां सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। इसी वजह से बहनों के लिए सुबह का समय राखी बांधने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक बताया गया शुभ समय

रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया गया है। इस अवधि में बहनें भाई को राखी बांध सकती हैं।

मान्यता है कि सूतक शुरू होने से पहले का समय धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अधिक अनुकूल होता है। ऐसे समय में पूजा-पाठ और रक्षासूत्र बांधने की परंपरा बिना किसी बाधा के पूरी की जा सकती है।

धर्मसिंधु में भी शुभ समय में रक्षासूत्र बांधने के महत्व का उल्लेख किया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विधि और शुभ मुहूर्त का ध्यान रखकर राखी बांधने से भाई के लिए रक्षा और मंगल की कामना की जाती है।

ग्रहण के बाद राखी बांधनी हो तो क्या करना होगा?

अगर किसी स्थिति में राखी ग्रहण समाप्त होने के बाद बांधनी हो, तो धार्मिक नियमों के अनुसार पहले स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ कपड़े पहनने और घर के देवस्थान की सफाई करने की बात कही गई है।

पूजा स्थल को स्वच्छ करने के बाद ही राखी बांधने की रस्म पूरी करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि ग्रहण के मोक्ष के बाद शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी करके किया गया धार्मिक कार्य शुभ माना जाता है।

यानी ग्रहण की स्थिति में केवल समय देखना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। स्नान, साफ वस्त्र और पूजा स्थल की स्वच्छता जैसी बातों का भी ध्यान रखा जाता है।

भद्रा काल को भी नजरअंदाज न करें

राखी बांधने के लिए सिर्फ ग्रहण और सूतक ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। भद्रा काल का भी विशेष ध्यान रखने की धार्मिक मान्यता है। शुभ मुहूर्त तय करते समय ऐसा समय चुनने की सलाह दी जाती है, जो भद्रा और सूतक दोनों से मुक्त हो।

इसलिए रक्षाबंधन पर राखी बांधने से पहले मुहूर्त देखना बेहतर माना जाता है। इस बार भारत में चंद्र ग्रहण का असर और सूतक काल नहीं होने के कारण सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक का समय खास तौर पर महत्वपूर्ण बताया गया है।

आखिरकार, रक्षाबंधन का सबसे बड़ा भाव भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का है। शुभ मुहूर्त और धार्मिक परंपराओं का पालन इसी भावना के साथ किया जाता है, ताकि त्योहार पूरे विधि-विधान और सकारात्मक भाव के साथ मनाया जा सके।