अब कोर्ट के बाहर विवाद सुलझाने का रास्ता होगा और मजबूत! केंद्र ने बनाई ‘मेडिएशन काउंसिल ऑफ इंडिया’, दिल्ली में होगा मुख्यालय

अब कोर्ट के बाहर विवाद सुलझाने का रास्ता होगा और मजबूत! केंद्र ने बनाई ‘मेडिएशन काउंसिल ऑफ इंडिया’, दिल्ली में होगा मुख्यालय

केंद्र सरकार ने भारत में विवादों को अदालत के बाहर बातचीत और समझौते के जरिए सुलझाने की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने मेडिएशन एक्ट, 2023 के तहत ‘मेडिएशन काउंसिल ऑफ इंडिया’ (Mediation Council of India) के गठन की आधिकारिक सूचना जारी कर दी है। काउंसिल का मुख्यालय दिल्ली में होगा। इसका उद्देश्य भारत में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मेडिएशन को बढ़ावा देना और इसके लिए एक व्यवस्थित ढांचा तैयार करना है।

सरकार की यह पहल उन लोगों और संस्थानों के लिए अहम मानी जा सकती है, जो लंबे समय तक चलने वाली कानूनी लड़ाई के बजाय आपसी सहमति से विवाद का समाधान चाहते हैं। मेडिएशन में किसी विवाद पर फैसला थोपने के बजाय पक्षों के बीच बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश की जाती है।

मेडिएशन एक्ट के तहत क्यों बनाई गई काउंसिल?

मेडिएशन एक्ट, 2023 का उद्देश्य देश में मेडिएशन, खासकर इंस्टीट्यूशनल मेडिएशन, को बढ़ावा देना और उसे अधिक व्यवस्थित बनाना है। इसके दायरे में कमर्शियल और अन्य तरह के विवादों को मेडिएशन के जरिए सुलझाने की व्यवस्था शामिल है।

कानून में मेडिएशन से हुए समझौतों को लागू करने, मेडिएटर्स के रजिस्ट्रेशन के लिए संस्थागत व्यवस्था तैयार करने और कम्युनिटी मेडिएशन को बढ़ावा देने का भी प्रावधान है।

केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय के कानूनी मामलों के विभाग की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन में कहा गया है कि एक्ट की धारा 31(1) के तहत केंद्र सरकार ने इस काउंसिल का गठन किया है। इसका नाम मेडिएशन काउंसिल ऑफ इंडिया होगा और इसका हेड ऑफिस दिल्ली में रहेगा।

काउंसिल को मिलेंगी कौन-कौन सी शक्तियां?

मेडिएशन काउंसिल ऑफ इंडिया को कानून के तहत एक कॉर्पोरेट बॉडी का दर्जा दिया गया है। इसका मतलब है कि यह अपने नाम से कानूनी तौर पर काम कर सकेगी।

काउंसिल को चल और अचल संपत्ति हासिल करने, उसे अपने पास रखने या बेचने और कॉन्ट्रैक्ट करने की शक्ति होगी। इसके अलावा वह अपने नाम से मुकदमा कर सकेगी और उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।

काउंसिल का मुख्यालय दिल्ली में होगा। हालांकि, केंद्र सरकार जरूरत के मुताबिक किसी दूसरी जगह को भी इसका मुख्यालय घोषित कर सकती है। इसके अलावा काउंसिल केंद्र सरकार से सलाह लेकर भारत या विदेश में दूसरे कार्यालय भी खोल सकेगी।

इससे साफ है कि व्यवस्था का दायरा केवल दिल्ली तक सीमित रखने की योजना नहीं है। कानून काउंसिल को जरूरत के अनुसार व्यापक स्तर पर काम करने की गुंजाइश देता है।

कौन-कौन होंगे काउंसिल में?

मेडिएशन काउंसिल ऑफ इंडिया की संरचना भी कानून में तय की गई है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त एक चेयरपर्सन, दो सदस्य, दो पदेन सदस्य, एक पदेन सदस्य-सचिव और एक पार्ट-टाइम सदस्य शामिल होंगे।

पदेन सदस्यों को छोड़कर बाकी सदस्यों का कार्यकाल नियुक्ति की तारीख से चार साल का होगा। उन्हें दोबारा नियुक्त भी किया जा सकता है।

हालांकि, उम्र को लेकर भी सीमा तय है। चेयरपर्सन 70 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद पद पर नहीं रह सकेंगे। अन्य सदस्यों के लिए यह सीमा 67 वर्ष है। यह प्रावधान पदेन सदस्यों पर लागू नहीं होगा।

एक और महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि अगर चेयरपर्सन की नियुक्ति पार्ट-टाइम आधार पर होती है, तो नियुक्त सदस्यों में कम से कम एक सदस्य फुल-टाइम होना जरूरी होगा।

कारोबार से लेकर घरेलू विवादों तक, क्या बदलेगा?

मेडिएशन व्यवस्था का मकसद सिर्फ अदालतों का बोझ कम करना नहीं है। इसके जरिए ऐसे विवादों को भी बातचीत के माध्यम से सुलझाने की कोशिश की जाती है, जहां दोनों पक्ष किसी स्वीकार्य समाधान तक पहुंच सकते हैं।

मेडिएशन एक्ट में कमर्शियल विवादों के साथ अन्य प्रकार के विवादों को भी शामिल किया गया है। वहीं घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मेडिएशन को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी नई काउंसिल के व्यापक उद्देश्य का हिस्सा है।

अब मेडिएशन काउंसिल ऑफ इंडिया के गठन के साथ इस क्षेत्र के लिए एक केंद्रीय संस्थागत ढांचा सामने आया है। काउंसिल की भूमिका मेडिएटर्स के रजिस्ट्रेशन, मेडिएशन से जुड़ी व्यवस्था को मजबूत करने और कानून के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण होगी।

आम नागरिक के नजरिए से देखें तो इसका महत्व इस बात में है कि विवाद सुलझाने के लिए अदालत की लंबी प्रक्रिया के अलावा मेडिएशन को भी एक संगठित विकल्प के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। आने वाले समय में यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है, यह काउंसिल के कामकाज और मेडिएशन के इस्तेमाल के विस्तार पर निर्भर करेगा।