राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS अब भारत से बाहर अपने संपर्क और संवाद का दायरा बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। संघ की रणनीति में एक अहम बदलाव यह है कि विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों और RSS से सहानुभूति रखने वाले लोगों की ओर से बनाए गए स्वतंत्र मंचों को संवाद के लिए ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। अमेरिका में American Hindu for Engagement and Dialogue (AHEAD) और ब्रिटेन में Integral जैसे संगठन इसी मॉडल का हिस्सा बताए जा रहे हैं। इनके जरिए संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के कार्यक्रम, सामुदायिक बैठकें और विभिन्न सामाजिक-धार्मिक समूहों के साथ संवाद आयोजित किए जा रहे हैं।
RSS प्रमुख मोहन भागवत की अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की मौजूदा यात्रा को इसी बदलती रणनीति का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। विदेशों में संघ की गतिविधियों का फोकस केवल प्रवासी भारतीय समुदाय तक सीमित नहीं है। अंतरधार्मिक संवाद और स्थानीय सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने पर भी जोर दिखाई दे रहा है।
अमेरिका में बड़ा कार्यक्रम, फिर कनाडा का रुख
मोहन भागवत की विदेश यात्रा के दौरान अमेरिका में शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में वैश्विक एकीकरण महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का आयोजन AHEAD की ओर से किया जा रहा है। इसमें हिंदू सामाजिक, धार्मिक और सामुदायिक संगठनों से जुड़े बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
अमेरिका के कार्यक्रम के बाद भागवत अगले दिन कनाडा के टोरंटो जाएंगे। वहां उनका कम्युनिटी प्रोग्राम प्रस्तावित है, जिसमें भारतीय और कनाडाई मूल के लोग शामिल होंगे।
कनाडा में दो दिन रहने के बाद संघ प्रमुख 2 से 7 सितंबर तक ब्रिटेन की यात्रा पर रहेंगे। लंदन में भारतीय मूल के लोगों से मुलाकात के अलावा विभिन्न धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद की संभावना भी बताई गई है। इसमें यहूदी, ईसाई और सिख समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं।
विदेशों में RSS को लेकर धारणा बदलने की कोशिश?
RSS से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी रणनीति का एक उद्देश्य विदेशों में संगठन को लेकर बनी धारणाओं और गलतफहमियों को सीधे संवाद के जरिए दूर करना है।
भारत में RSS की राजनीतिक और सामाजिक भूमिका लगातार सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा रहती है। बीजेपी के वैचारिक मार्गदर्शक के तौर पर भी संघ की पहचान है। ऐसे में विदेशों में संगठन को लेकर रुचि बढ़ने के बीच संघ अब अपना पक्ष सीधे लोगों के सामने रखने पर जोर दे रहा है।
संघ से जुड़े लोगों के मुताबिक, इन संवादों में हिंदुत्व, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पहचान और मौजूदा वैश्विक चुनौतियों जैसे मुद्दों पर भारतीय दृष्टिकोण सामने रखा जा रहा है।
यानी रणनीति सिर्फ संगठन का विस्तार करने की नहीं, बल्कि संवाद के जरिए अपनी विचारधारा और दृष्टिकोण को अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक पहुंचाने की भी है।
AHEAD और Integral जैसे स्वतंत्र मंच क्यों अहम?
RSS के इस मॉडल की खास बात यह है कि विदेशों में सक्रिय सभी मंच औपचारिक तौर पर RSS की संगठनात्मक संरचना का हिस्सा नहीं हैं। इसके बावजूद वे संघ के व्यापक उद्देश्यों और मूल्यों के अनुरूप गतिविधियां करते हैं।
अमेरिका में AHEAD और ब्रिटेन में Integral जैसे मंच RSS नेताओं के कार्यक्रमों, सामुदायिक संवाद और बैठकों के आयोजन में सहयोग कर रहे हैं। इसके अलावा हिंदू स्वयंसेवक संघ भी विदेशों में संघ से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा है।
संघ से जुड़े लोगों का मानना है कि स्वतंत्र स्थानीय संगठनों के जरिए स्थानीय समाज से जुड़ना आसान होता है। इससे सिर्फ भारतीय प्रवासी समुदाय तक पहुंच नहीं बनती, बल्कि दूसरे सामाजिक समूहों के साथ भी संवाद का रास्ता खुलता है।
यही वजह है कि विदेशों में ऐसे संगठनों का नेटवर्क RSS की अंतरराष्ट्रीय रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता दिखाई दे रहा है।
पिछले एक साल में बढ़ी विदेशी सक्रियता
RSS की यह गतिविधि केवल मोहन भागवत की मौजूदा यात्रा तक सीमित नहीं है। पिछले एक साल में संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी विदेशों का दौरा कर चुके हैं।
संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जर्मनी का दौरा कर चुके हैं। वहीं अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर कजाकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा कर चुके हैं। जानकारी के मुताबिक, आंबेकर के भी मोहन भागवत के साथ ब्रिटेन दौरे में शामिल होने की संभावना है।
विदेशों में संपर्क बढ़ाने के साथ RSS पदाधिकारियों के ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के देशों में भारतीय मिशनों के साथ नियमित संपर्क में रहने की बात भी सामने आई है।
अब भागवत की मौजूदा यात्रा को इस पूरी रणनीति के अगले चरण के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले समय में स्थानीय स्वतंत्र मंचों के जरिए विदेशों में RSS का संवाद नेटवर्क और विस्तार पा सकता है।
संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान इस मॉडल की सफलता और आगे की दिशा का आकलन इंदौर में होने वाली अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में किया जाएगा। ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि RSS विदेशों में अपने संगठनात्मक संपर्क को किस तरह और कितना व्यापक बनाता है।


