बिहार में बड़ा सियासी इनाम! कुशवाहा के बेटे के लिए MLC सीट छोड़ने वाले देवेश कुमार को सम्राट चौधरी ने दिया कैबिनेट मंत्री स्तर का पद

बिहार में बड़ा सियासी इनाम! कुशवाहा के बेटे के लिए MLC सीट छोड़ने वाले देवेश कुमार को सम्राट चौधरी ने दिया कैबिनेट मंत्री स्तर का पद

बिहार की राजनीति में सोमवार को हुई कुछ नियुक्तियों ने सियासी गलियारों में चर्चा बढ़ा दी है। सबसे ज्यादा ध्यान बीजेपी नेता देवेश कुमार की नियुक्ति पर गया है। देवेश कुमार ने जुलाई 2026 में विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। अब सम्राट चौधरी सरकार ने उन्हें राज्य योजना परिषद का उपाध्यक्ष बनाया है। यह पद कैबिनेट मंत्री स्तर का है। नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब बिहार सरकार में अलग-अलग राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरणों को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है।

देवेश कुमार वही नेता हैं, जिन्होंने उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के लिए अपनी MLC सीट छोड़ी थी। अब उन्हें राज्य योजना परिषद में अहम जिम्मेदारी मिली है। नियुक्ति के बाद देवेश कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी नेता नितिन नवीन और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का आभार जताया।

MLC सीट छोड़ने के बाद मिला बड़ा जिम्मा

देवेश कुमार 2021 में बिहार विधान परिषद के सदस्य बने थे। हालांकि, जुलाई 2026 में उन्होंने MLC पद से इस्तीफा दे दिया था। उस समय भी उनका इस्तीफा राजनीतिक चर्चा का विषय बना था।

अब सरकार ने उन्हें राज्य योजना परिषद का उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। इस पद का दर्जा कैबिनेट मंत्री के बराबर है। सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, उनका कार्यकाल नियुक्ति की तारीख से तीन साल या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, रहेगा।

इस नियुक्ति को देवेश कुमार के राजनीतिक सफर में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के तौर पर देखा जा रहा है। परिषद से जुड़े कामकाज में राज्य की योजनाओं और विकास से जुड़े विषय अहम होते हैं।

ABVP से बीजेपी तक लंबा संगठनात्मक सफर

देवेश कुमार का राजनीतिक जुड़ाव छात्र जीवन से ही शुरू हो गया था। वह ABVP से जुड़े रहे हैं। इसके बाद बीजेपी संगठन में उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं।

वे पार्टी के राज्य प्रवक्ता, उपाध्यक्ष, मुख्यालय प्रभारी और महासचिव जैसे पदों पर काम कर चुके हैं। यानी संगठन के भीतर उनका अनुभव केवल एक पद तक सीमित नहीं रहा है।

देवेश कुमार स्वतंत्रता सेनानी पंडित यमुना कारजी के पोते हैं। उनके राजनीतिक और संगठनात्मक सफर को देखते हुए सोमवार की नियुक्ति को उनके लिए एक अहम प्रशासनिक-सियासी जिम्मेदारी माना जा रहा है।

हरेंद्र बहादुर सिंह को भी मिली अहम जिम्मेदारी

बिहार सरकार ने सोमवार को सिर्फ देवेश कुमार की नियुक्ति का ऐलान नहीं किया। नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले हरेंद्र बहादुर सिंह को राज्य नागरिक परिषद का महासचिव बनाया गया है।

वहीं, राज्य नागरिक परिषद के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी डॉ. अजय कुमार सिंह को दी गई है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, डॉ. अजय कुमार सिंह स्वर्गीय बछेश्वर सिंह के पुत्र हैं और सीवान जिले के सिसवन थाना क्षेत्र के नंदमुरा के निवासी हैं।

सीवान से जुड़े होने के कारण उनकी नियुक्ति को लेकर स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है। राज्य स्तर के निकाय में जिले को प्रतिनिधित्व मिलने से इसे क्षेत्रीय नजरिए से भी अहम माना जा रहा है।

सम्राट सरकार में दिखा राजनीतिक संतुलन

सोमवार की नियुक्तियों को एक साथ देखें तो बिहार सरकार में अलग-अलग राजनीतिक और संगठनात्मक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को जिम्मेदारियां दिए जाने की तस्वीर सामने आती है।

एक ओर देवेश कुमार जैसे बीजेपी संगठन से लंबे समय से जुड़े नेता को कैबिनेट मंत्री स्तर की जिम्मेदारी मिली है। दूसरी ओर हरेंद्र बहादुर सिंह की नियुक्ति के जरिए नीतीश कुमार से जुड़े राजनीतिक समीकरण भी चर्चा में हैं।

फिलहाल इन नियुक्तियों का असर सरकार और संगठन के स्तर पर किस तरह दिखाई देता है, यह आगे स्पष्ट होगा। लेकिन इतना तय है कि देवेश कुमार की नई जिम्मेदारी ने बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।