उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी अब भाजपा के संगठनात्मक स्तर पर तेज होती दिख रही है। लखनऊ में हुई ‘सेवा संकल्प अभियान’ की कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी ने कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारी का अलग-अलग लेकिन जुड़ा हुआ संदेश दिया। योगी ने साफ कहा कि सरकार के काम के भरोसे बैठने की जरूरत नहीं है, जबकि स्मृति ईरानी ने सरकार की उपलब्धियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहुंचाने का प्लान सामने रखा। मतलब साफ है—आने वाले चुनाव में भाजपा बूथ से लेकर सोशल मीडिया तक अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी में है।
योगी ने कार्यकर्ताओं को चेताया- सरकार के काम के भरोसे मत बैठिए
कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा कार्यकर्ताओं को संगठन की सक्रियता बनाए रखने की नसीहत दी। उनका संदेश था कि केवल सरकार की उपलब्धियों के आधार पर चुनावी मैदान में निश्चिंत होकर बैठना ठीक नहीं होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से सक्रिय होने और जनता के बीच सरकार के काम की जानकारी लेकर जाने को कहा।
योगी ने विपक्ष पर Gen-Z, Gen Alpha और राम मंदिर जैसे मुद्दों को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि ऐसे नैरेटिव का जवाब तथ्यों और सरकार के काम के जरिए देना होगा।
उन्होंने वीर सावरकर के एक कथन का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं को सक्रियता का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी को उन कार्यकर्ताओं से ज्यादा चिंता होनी चाहिए जो जरूरत के समय सक्रिय नहीं होते।
यानी सरकार की उपलब्धियां अपनी जगह हैं, लेकिन संगठन की मशीनरी को लगातार जमीन पर काम करते रहना होगा।
शिक्षा से स्टार्टअप तक, योगी ने गिनाए सरकार के काम
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में 2017 से पहले और अब की स्थिति का अंतर भी सामने रखा। उन्होंने खास तौर पर बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों का जिक्र किया और कहा कि स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए सरकार ने काम किया है।
योगी ने प्रदेश में स्टार्टअप और एयर कनेक्टिविटी के आंकड़े भी बताए। उनके मुताबिक, 2017 में उत्तर प्रदेश में सिर्फ 12 पंजीकृत स्टार्टअप थे, जबकि अब यह संख्या 24 हजार से ज्यादा हो चुकी है।
एयर कनेक्टिविटी को लेकर उन्होंने कहा कि 2017 तक लखनऊ और वाराणसी में दो चालू एयरपोर्ट थे। अब प्रदेश में 17 घरेलू और पांच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट संचालित हैं या शुरू होने के अंतिम चरण में हैं।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और RRTS जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि इन उपलब्धियों की जानकारी केवल बड़े मंचों तक सीमित न रहे, बल्कि बूथ और घर-घर तक पहुंचे।
स्मृति ईरानी का डिजिटल वार, नेताओं से ज्यादा लाभार्थी बोलेंगे
कार्यशाला में स्मृति ईरानी ने भाजपा की चुनावी रणनीति का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू सामने रखा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के डिजिटल नैरेटिव का मुकाबला केवल नेताओं के भाषणों से नहीं किया जा सकता।
इसके लिए सरकार की योजनाओं का लाभ पाने वाले लोगों की वास्तविक कहानियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंचाना होगा।
स्मृति ईरानी ने संगठन को उत्तर प्रदेश के करीब 29 हजार शक्ति केंद्रों से कम से कम 10-10 सक्सेस स्टोरी जुटाने का निर्देश दिया। इनमें पीएम आवास योजना से घर पाने वाले परिवार, ODOP से जुड़े कारीगर, मुद्रा योजना से कारोबार शुरू करने वाले उद्यमी और ऑपरेशन कायाकल्प से बदले स्कूलों के विद्यार्थी शामिल होंगे।
इन लाभार्थियों के करीब एक मिनट के वास्तविक वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर साझा करने की योजना है। यानी भाजपा सरकार के काम को अब सिर्फ नेताओं की जुबानी नहीं, बल्कि योजना का लाभ लेने वाले लोगों की अपनी कहानी के जरिए जनता तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है।
बूथ और डिजिटल नेटवर्क को साथ चलाने की तैयारी
स्मृति ईरानी ने प्रदेश अध्यक्ष और संगठन के पदाधिकारियों से कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संवाद बनाए रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने केंद्र सरकार के 13 अभियानों को प्रभावी तरीके से चलाने की बात कही।
उनका कहना था कि कार्यकर्ताओं की समस्याएं और सुझाव सुने जाने चाहिए। जहां सरकार की मदद जरूरी हो, वहां संगठन और सरकार मिलकर समाधान की दिशा में काम करें।
उन्होंने कार्यशाला में PPT के जरिए कार्यकर्ताओं को अभियान की पूरी रूपरेखा भी समझाई। इससे यह संकेत मिलता है कि भाजपा 2027 की तैयारी को केवल चुनावी सभाओं तक सीमित नहीं रखना चाहती।
एक तरफ योगी आदित्यनाथ ने बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय रहने का संदेश दिया। दूसरी तरफ स्मृति ईरानी ने डिजिटल नैरेटिव और लाभार्थियों की कहानियों को चुनावी संवाद का हिस्सा बनाने की रणनीति बताई।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 का मुकाबला अभी दूर है, लेकिन भाजपा की तैयारी से साफ है कि पार्टी संगठन, सरकार की उपलब्धियों और डिजिटल पहुंच—तीनों को एक साथ चुनावी रणनीति में जोड़ रही है।


